
सिंधी समाज ने मनाया थदड़ी पर्व, घरों में नहीं जला चूल्हा
ग्वालियर. सिंधी समाज का प्रमुख सांस्कृतिक पर्व थदड़ी (वदी सतहिं) पर्व गुरुवार को मनाया गया। रक्षाबंधन के आठवें दिन यानी सातम को यह पर्व समूचा सिंधी समुदाय हर साल हर्षोल्लास से मनाता है। इस मौके पर समाजजन ने शीतला माता का पूजन, आराधना की। थदड़ी पर ठंडा भोजन किया जाता है, इसके चलते घरों में चूल्हा नहीं जलाया गया। सिंधी समाज के तरूण प्रेमानी ने बताया कि पर्व को मनाने के लिए एक दिन पहले बुधवार की शाम महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के सिंधी व्यंजन कूपड़, गच, कोकी, सूखी तली हुई सब्जियां, रायता, दहीबड़े आदि बनाए। रात को सोने से पूर्व चूल्हे पर जल छिडकक़र पूजा की गई और चूल्हे को ठंडा किया गया। यह ठंडा खाना गुरुवार को पूजा के बाद खाया गया। इस मौके पर शीतला माता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
छोटे बच्चों के लिए मांगी दुआ
इस पूजा में घर के छोटे बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया गया और मां का स्तुति गान कर उनके लिए दुआ मांगी गई कि वे शीतल रहें व माता के प्रकोप से बचे रहें। इसके साथ ही थदड़ी के दिन घर के बड़े बुजुर्ग सदस्यों की ओर से छोटे सदस्यों को भेंट स्वरूप कुछ न कुछ दिया जाता है, जिसे खर्ची कहते हैं। थदड़ी पर्व पर बेटियों को भी विशेषकर मायके से बुलाकर इस त्योहार में शामिल किया गया। इसके साथ ही उसके ससुराल में भी भाई या छोटे सदस्य द्वारा सभी व्यंजन और फल भेंट स्वरूप भेजे गए, इसे थदड़ी का डिण (उपहार) कहा जाता है।
चालीहा महोत्सव में हुई कव्वाली
दानाओली स्थित झूलेलाल मंदिर में भगवान झूलेलाल के चालीहा महोत्सव के अंतर्गत चल रहे नौरेजो साहब में गुरुवार को कासम कव्वाल का रंगारंग कार्यक्रम संपन्न हुआ। यहां 19 अगस्त को नटराज ग्रुप का खाटू श्याम संकीर्तन, 21 अगस्त को शहजादा साईं कार्यक्रम, 23 अगस्त को शुभम नाथानी एवं निशी धमेचा का रंगारंग कार्यक्रम, 24 अगस्त को अखंड पाठ साहब का भोग, भंडारा और 25 अगस्त को शाम 7 बजे महाआरती के साथ चल समारोह निकाला जाएगा।
Published on:
19 Aug 2022 02:02 am
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
