यह पीड़ा बीते रोज बस द्वारा अपने गांव से श्योपुर आई एक युवती ने पुलिस कप्तान साकेत प्रकाश पांडेय को सुनाई। साथ ही पुलिस कप्तान को पत्रिका अखबार दिखाते हुए यह बात भी बताई कि पत्रिका में निर्भीक बचपन अभियान के तहत जो खबरे प्रकाशित हो रही है,उसे पढ़कर ही उसे हिम्मत आई और उस हिम्मत के सहारे ही वह एसपी कार्यालय तक आ पाई है। इस मामले में पुलिस कप्तान ने भी बिना कोई देरी किए परेशान करने वाले मनचले को अच्छे से सबक सीखाकर युवती की परेशानी को एक ही दिन में खत्म करवा दिया।