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स्टूडेंट्स ने सीखी मुखौटा निर्माण की कला

- राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में हुआ आयोजन

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स्टूडेंट्स ने सीखी मुखौटा निर्माण की कला

स्टूडेंट्स ने सीखी मुखौटा निर्माण की कला

ग्वालियर. राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के नाटक एवं रंगमंच संकाय के एमपीए प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने नाटक एवं रंगमंच संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ.हिमांशु द्विवेदी के मार्गदर्शन में मुखौटा निर्माण की कला का प्रशिक्षण लिया। मुखौटा निर्माण छात्र-छात्राओं के पाठ्यक्रम का हिस्सा है उनकी 20 दिवसीय कक्षा के दौरान डॉ.हिमांशु द्विवेदी ने मास्क के इतिहास, मास्क की परंपरा और मास्क के विभिन्न प्रकार से निर्माण की विधि को साहित्यिक और प्रायोगिक रूप में समझाया। कक्षा के दौरान छात्रों ने पेपरमेसी, कागज के गत्ते, चार्टपेपर, पीओपी आदि से मास्क बनाए। इन मास्क में कथककली, कुटियत्तम, जनजाति मास्क, कृष्ण का मुकुट, हास्य, वीर आदि रसों को मिलाकर क्षेत्रीय जनजाति कलाओं के अलावा आधुनिक विषयों पर प्रयोगात्मक ढंग से विभिन्न तरीके से तैयार किया गया। डॉ.द्विवेदी ने कहा कि हम रंगकर्म का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं हमारे लिए कोई भी चीज यूं ही नहीं होगी हम जो भी काम करें चाहे वह छोटा या बड़ा कुछ भी हो चाहे उसमें बजट या संसाधन हो या ना हो लेकिन हमारा मकसद मोटिव और उसके पीछे का उद्देश्य बिल्कुल क्लियर होना चाहिए तभी हम किसी भी निर्माण प्रक्रिया के पीछे उसको जस्टिफाई कर सकते हैं। यही अंतर एक प्रशिक्षित और बिना प्रशिक्षित कलाकार में होता है प्रशिक्षित कलाकार जो भी करता है चाहे छोटा हो या बड़ा लेकिन उसके पीछे उसका एक उद्देश्य, लॉजिक और मोटिवेट होता है बिना उद्देश्य के कोई भी कार्य विधि सफल नहीं हो सकते।