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कोरोना का असर… 10 दिन में फोर्ट पहुंचे 385 लोकल टूरिस्ट, गाइड की टूट रही आस

कोविड-19 के कारण टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। रोजाना फोर्ट पर 400 से 700 पहुंचने वाले टूरिस्ट की संख्या आज घटकर 35 से 40 हो गई है

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कोरोना का असर... 10 दिन में फोर्ट पहुंचे 385 लोकल टूरिस्ट, गाइड की टूट रही आस

ग्वालियर. कोविड-19 के कारण टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। रोजाना फोर्ट पर 400 से 700 पहुंचने वाले टूरिस्ट की संख्या आज घटकर 35 से 40 हो गई है। ऑर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की ओर से मॉन्युमेंट्स 8 जुलाई से ग्वालियर में ओपन हो गए थे। 8 से 24 जुलाई तक कुल 385 लोकल टूरिस्ट मॉन्युमेंट्स देखने पहुंचे। यानि 10 में कुल 385 टूरिस्ट आए। इसमें एक हफ्ते 15 से 21 जुलाई तक मॉन्युमेंट्स बंद रहा। ऐसे में टूरिस्ट पर पूरी तरह से निर्भर रहने वाले गाइड भी बेरोजगार हो गए। डोमेस्टिक और फॉरेनर टूरिस्ट के न आने से उनके पास अब कोई बिजनेस नहीं है। ऐसे में उन्होंने अभी तक जो भी जमा किया था, उसी में गुजर बसर कर रहे हैं। हालांकि इस दौरान गाइड ने स्टेट, सेंट्रल और प्रशासन से राहत पैकेज के लिए प्रयास किए, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।


पर्यटन की संभावनाएं तलाशने शुरू किया मंच
अंकित अग्रवाल, हेरिटेज वॉक लीडर
ग्वालियर में प्रतिवर्ष काफी संख्या में डोमेस्टिक और फॉरेनर टूरिस्ट आते हैं, जो सिटी मॉन्युमेंट्स देखते हैं। उन्हें अपने शहर के रिच हेरिटेज दिखाने के लिए कई गाइड मौजूद हैं, जिनकी रोजी-रोटी का सहारा भी टूरिस्ट ही हैं। लेकिन कोविड-19 के बाद से स्थितियां पूरी तरह से बदल गईं। मार्च से शुरू हुआ संक्रमण अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में हम सभी पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। विडम्बना इस बात की है कि गवर्नमेंट की ओर से भी गाइड के लिए कोई राहत पैकेज नहीं दिया गया। मैंने हाल ही में पर्यटन विकास मंच फोरम तैयार किया, जिसके माध्यम से पर्यटन के लिए संभावनाएं तलाशी जा सकें।


अभी तक जो बचाया, उसी से जीवनयापन
सुरेश चौरसिया, गाइड
फरवरी लास्ट वीक से ही टूरिस्ट का आना कम हो गया था और मार्च के थर्ड वीक से लॉकडाउन लग गया। हम ग्वालियर आने वाले टूरिस्ट को अपने शहर के रिच मॉन्युमेंट्स से परिचित कराते हैं। लेकिन मार्च से लेकर अभी तक एक भी टूरिस्ट नहीं मिला। ऐसे में अभी तक जो बचाया था, उसी के सहारे जीवन चला रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक। पर्यटन बुरी तरह प्रभावित होने से भरण पोषण पर दिक्कत आ पड़ी है। हमारा बिजनेस छह माह कमाने और छह माह खाने का रहता है। लेकिन इस बार कमाने को कुछ भी नहीं मिला।


गवर्नमेंट से की मांग, नहीं मिला कोई फायदा
पुनीत द्विवेदी, गाइड
ग्वालियर फोर्ट पर अभी रोजाना 35 से 40 लोकल टूरिस्ट पहुंच रहे हैं, जिनको गाइड की आवश्यकता नहीं होती। हम फोर्ट जाते भी हैं, तो कोई बिजनेस नहीं है। हमने स्टेट और सेंट्रल गवर्नमेंट से आर्थिक पैकेज की मांग की थी, लेकिन सिवा आश्वासन के कुछ हासिल नहीं हुआ। कलेक्टर से भी मुलाकात की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सरकार ने कई सेक्टर के बारे में सोचा, लेकिन टूरिज्म के बारे में कुछ नहीं सोचा। मप्र सरकार को हम गाइड के बारे में भी ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि यह सेक्टर कब फिर से उसी रूप में आएगा। इसका कोई भरोसा नहीं है और हम पूरी तरह से टूरिस्ट पर ही डिपेंड हैं।