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2018 के नियम लागू नहीं होंगे, इसलिए मीसा बंदी की पेंशन दी जाए, अब पत्नी को आधी पेंशन राशि मिल सकेगी

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मीसा बंदी पेंशन को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पति का आवेदन 2017 में लंबित है। इसलिए इस आवेदन पर 2018 का आदेश लागू नहीं होगा। इस कारण याचिकाकर्ता का पति पेंशन का हकदार है। इसलिए नियमानुसार पेंशन का भुगतान किया जाए। याचिकाकर्ता को अब आधी पेंशन मिल सकेगी। क्योंकि पति की मौत के बाद पत्नी को पेंशन मिलनी है।

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2018 के नियम लागू नहीं होंगे, इसलिए मीसा बंदी की पेंशन दी जाए, अब पत्नी को आधी पेंशन राशि मिल सकेगी

2018 के नियम लागू नहीं होंगे, इसलिए मीसा बंदी की पेंशन दी जाए, अब पत्नी को आधी पेंशन राशि मिल सकेगी

निर्मलात्यागी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि उनके पति इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे थे। इमरजेंसी के दौरान जेल में रहने वालों को प्रदेश सरकार पेंशन दे रही है। इसके लिए शासन के पास आवेदन किया, लेकिन उसे खारिज कर दिया। यदि जेल में रहने का सबूत नहीं है तो जिन लोगों के साथ जेल में बंद रहे हैं, उनके शपथ पत्र के आधार पर पेंशन के हकदार हैं। दो मीसा बंदियों का शपथ पत्र पेश किया, फिर भी पेंशन नहीं दी। शासकीय अधिवक्ता सोहित मिश्रा ने तर्क दिया कि 2007 व 2012 के नियमों में बदला कर दिया गया है। 2018 में जो नियम आए हैं, उसके अनुसार ही पेंशन मिल सकेगी। नए नियम में जेल का प्रमाण पत्र पेश करना पड़ेगा। याचिकाकर्ता के आवेदन पर 2018 के नियम के अनुसार फैसला लिया गया है। इस कारण मीसा बंदी की पेंशन नहीं मिल सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 4 मार्च 2020 को जारी आदेश को निरस्त कर दिया है और पेंशन देने का आदेश दिया है।