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झुलसाती गर्मी में कई सालों बाद तिघरा में बनी ये स्थिति, लोगों में खुशी

तिघरा से रोज 7 एमसीएफटी से अधिक पानी शहर में किया जा रहा है सप्लाई

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झुलसाती गर्मी में राहत की बात: तिघरा में भरपूर पानी,लोगों में खुशी की लहर

ग्वालियर। देश-प्रदेश में चारों ओर जलसंकट के हालात हैं। लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं। ऐसे में शहर की लाइफलाइन तिघरा डैम खुशखबरी लाया है कि इस बार शहर में जलसंकट के हालात नहीं बनेंगे। तिघरा में इतना पानी है कि बारिश में देरी हुई तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसमें दिसंबर तक शहर की प्यास बुझाने लायक पानी है। ये सुखद स्थिति हमेशा तभी रह सकती है जब सभी लोग पानी की हर बूंद सहेजने लगें।

सिंचाई विभाग के सब इंजीनियर संतोष तिवारी ने बताया, इस बार तिघरा डैम की स्थिति अच्छी है। ऐसी स्थिति कई सालों बाद बनी है, जब जून में तिघरा का जलस्तर 730 फीट से अधिक है। वर्तमान जलस्तर 731.85 फीट है। तिघरा से रोज 7 एमसीएफटी से अधिक पानी शहर में सप्लाई किया जा रहा है, 3 एफसीएफटी लीकेज और वाष्पीकरण में चला जाता है।

यानी प्रतिदिन 10 एमसीएफटी पानी कम हो रहा है। पिछले साल 2018-19 में तिघरा का जलस्तर डेड स्टोरेज तक पहुंच गया था और बारिश आने तक हालात खराब हो गए थे। इसलिए इस बार प्रशासन ने तिघरा में ककेटो से पानी लिफ्ट किया है।

शहर के छोटे बांधों को भी भरना होगा
शहर में पेयजल सप्लाई तिघरा से ही होती है। बारिश कमजोर हो तो हालात बिगड़ जाते हैं। इसका विकल्प निगम और प्रशासन अभी तक नहीं तलाश पाए। तिघरा के निर्माण के समय शहर की आबादी लगभग 1 लाख थी, जो अब 14 लाख के आसपास है। इस दौरान पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई। शहर के छोटे बांधों को भी भरना होगा, तभी तिघरा का दबाव कम होगा।

यह है दूसरे बांधों की स्थिति
तिघरा के अलावा अंचल के दूसरे बांधों की स्थिति भी इस साल बेहतर है। ककेटो का स्तर 1110.95 फीट है, यह 13.55 फीट खाली है। पेहसारी का स्तर 1088.40 फीट है, यह 9 फीट खाली है।

बंूद-बूंद बचाएंगे तो ही खुश रह पाएंगे
इस साल की खुशी स्थायी बनी रही इसके लिए शहर के लोगों में पानी बचाने की जागरूकता जरूरी है। अगर मानसून अच्छा नहीं रहा तो अगले वर्ष पानी की समस्या बढ़ जाएगी। यदि शहर के लोग पानी बर्बादी ही रोक लें तो भविष्य की परेशानी से बचा जा सकता है।