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जर्मनी की युवती से लिया गिटार, प्रयोग कर बना दी मोहन वीणा, तब भारतीयकरण की हुई शुरुआत

आइटीएम संगीत सम्मेलन में आए पं. विश्वमोहन भट्ट का परिवार

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जर्मनी की युवती से लिया गिटार, प्रयोग कर बना दी मोहन वीणा, तब भारतीयकरण की हुई शुरुआत

जर्मनी की युवती से लिया गिटार, प्रयोग कर बना दी मोहन वीणा, तब भारतीयकरण की हुई शुरुआत

ग्वालियर.

मेरे पिताजी से संगीत सीखने एक युवती जर्मनी से आई। जब वह वापस जाने लगी तो मैंने उनसे उनका गिटार ले लिया। उनके जाने के बाद मैंने उस गिटार के साथ प्रयोग करना शुरू किया। उसमें नए तार लगाए। अपनी सोच-समझ से कुछ खूंटियां भी लगाईं। गिटार में जो तार पहले से लगे थे, मैंने उन्हें हटा दिया और सितार व सरोद के तार को उसमें लगाना शुरू कर दिया। उसी वक्त इस इंस्ट्रुमेंट के भारतीयकरण की शुरुआत हुई। फिर बाद में इसमें मैंने तुंबा लगाया। 20 तार लगाए और जैसा वाद्ययंत्र मैं बनाना चाहता था, वैसा बनाया। इस तरह इस वाद्ययंत्र का नाम मैंने मोहन वीणा रखा। यह कहना था संगीत के पुरोधा एवं ग्रैमी अवार्डी पं. विश्व मोहन भट्ट का। वह आइटीएम यूनिवर्सिटी के नाद एम्फीथियेटर में शास्त्रीय संगीत के पुरोधा पंडित विश्वमोहन भट्ट ने अपनी तीन पीढिय़ों के साथ मोहन वीणा के तार झंकृत कर उपस्थित रसिकों पर खूब अपना जादू चलाया। सितार और वीणा के संगम से बनी मोहन वीणा की खास प्रस्तुति पर शहरवासी वाह-वाह करने को मजबूर हो गए। मौका था दो दिवसीय आइटीएम संगीत सम्मेलन-15 ‘परम्परा’ के समापन अवसर का। इस मौके पर तीन पीढिय़ों के सुरों का संगम नजर आया। विश्व प्रख्यात मोहन वीणा वादक एवं ग्रैमी अवार्ड विजेता पं. विश्वमोहन भट्ट ने मोहन वीणा पर संगीत की प्रस्तुति दी। वहीं उनके पुत्र पं. सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा और युवा अंकित भट्ट ने सितार पर संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। तबले पर संगत हिमांशु ने दी।

ग्रैमी अवार्डी ने राग बिहाग से की शुरुआत
पं. विश्वमोहन भट्ट ने शुरुआत राग बिहाग से की। उन्होंने आलाप, जोड़, झाला के साथ प्रारंभिक विलम्बित मध्य द्रुत गतें तीन ताल में पेश कीं। पं. विश्वमोहन भट्ट ने अपनी कालजयी कृति ग्रैमी अवार्ड जीतने वाली उस रचना मीटिंग वाई द रिवर की राग जोग पर आधारित प्रस्तुति देकर संगीत की इस शाम में सुरों के चार चांद लगा दिए। संगीत सभा में भट््ट परिवार ने राग भोपाली-पहाड़ी आधारित एक धुन की संगीतमयी प्रस्तुति दी। अंत में वंदेमातरम धुन के साथ समापन किया। पं. सलिल भट्ट ने सात्विक वीणा और पं. अंकित भट्ट ने सितार के माध्यम से एक से बढकऱ एक प्रस्तुतियां दीं।

पांच वाद्यों की ध्वनि आती है मोहन वीणा से
पं. विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि बचपन में मैं थोड़ा विद्रोही किस्म का था। मेरा हमेशा से ही मन था कि मैं एक ऐसा साज बनाऊं, जिसमें सितार, सरोद, वीणा, सारंगी, संतूर सभी की ध्वनि आए, वह भी शास्त्रीय संगीत के साथ। शास्त्रीय संगीत में भी गायकी अंग मतलब जो गायन है, मैं उसे नए साज पर बजाऊं। मोहन वीणा में मैंने तंत्रकारी अंग व गायन अंग, दोनों का समावेश किया। मेरा मानना है कि दोनों के समावेश पर ही मेरा संगीत पूरा होगा।

मैंने सेना छोडकऱ संगीत को चुना
पं. सलिल भट्ट ने कहा कि हमारे दादा पं. मनमोहन भट्ट महान संगीतज्ञ के साथ स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। मैंने भी भारतीय सेना ज्वॉइन की थी, लेकिन मेरे मन में हमेशा एक ही कमी खलती थी, वह थी भारतीय परिवारों में संस्कारों की कमी। इसके चलते मैंने सेना छोडकऱ संगीत को माध्यम बनाया। संगीत से मैं देश की संस्कृति, शास्त्रीय संगीत के प्रति लोगों को जागरूक कर रहा हूं।

युवाओं को संगीत प्रिय विषय में देना चाहिए योगदान
पं. अंकित भट्ट ने कहा कि मैं 12 साल की उम्र से सितार बजा रहा हूं। आज युवाओं को भी संगीत प्रिय विषय का चयन कर प्रतिदिन कुछ अपना समय संगीत को देना चाहिए। युवाओं को कोई भी शास्त्रीय संगीत वाद्य यंत्र चाहे संतूर हो, सितार हो, को अपने जीवन में स्थान देना होगा। तब ही उनके जीवन का कोई अर्थ होगा।

ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी के फाउंडर चांसलर रमाशंकर सिंह, चांसलर रुचि सिंह चौहान, प्रो चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रो. एसएस भाकर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जयंत सिंह तोमर ने किया।