
शंभूदयाल गुप्ता @ ग्वालियर/श्योपुर
डिजिटल इंडिया और मॉल वाले कल्चर के बीच भले ही देश के आधुनिकता की ओर बढ़ रहा हो, लेकिन आज भी गांवों की कई परंपराओं और संस्कृतियों को ग्रामीण सहेजे हुए हैं। यही वजह है कि शहरों और बड़े कस्बों में विलुप्त हो रहे हाट बाजार, आज भी जिले के चंद गांवों में आयोजित किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है बड़ौदा क्षेत्र बत्तीसा के मकड़ावदा और पांडोला, जहां आज भी साप्ताहिक हाट बाजार न केवल हर सप्ताह लगते हैं बल्कि उनमें खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचते हैं।
राजस्थान के हाड़ौती संस्कृति में रचे बसे जिले के बड़ौदा बत्तीसा क्षेत्र के ग्राम मकड़ावदा और पांडोला में साप्ताहिक हाट बाजारों में शायद ही कोई कमी आई है। यही वजह है कि मकड़ावदा में रविवार को और पांडोला में गुरुवार को हाट बाजार लगते हैं, जिनमें श्योपुर और बड़ौदा के साथ ही राजस्थान के बारां, मांगरोल, रामगढ़, बमेारी आदि के दुकानदार आते हैं और अपनी दुकानें सजाते हैं। इन हाट बाजारों में कपड़े, बर्तन, शृंगार सामग्री, जनरल स्टोर, सब्जी-भाजी आदि सहित अन्य रोजमर्रा की कई चीजें मिलती हैं।
मकड़ावदा से लगे हैं 20 गांव
मकड़ावदा में रविवार को लगने वाले हाट बाजार में आसपास के लगभग 20 गांवों के ग्रामीण खरीदारी करने आते हैं। यही वजह है कि मकड़ावदा का हाट बाजार आज भी अपनी संस्कृति को बचाए हुए है। हालांकि बड़ौदा नगर में भी बुधवार को हाट बाजार लगता था, लेकिन ये अब विलुप्ता सा हो गया है।
Published on:
01 Jan 2018 04:26 pm
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