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परिषद में हंगामा फिर भी जनता को चपत, फाइलों में दफन हुई छह प्रतिशत संपत्तिकर की छूट

लाल टिपारा गोशाला 19.50 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर आपत्ति, एक ही ठेकेदार का जमकर विरोध

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nagar nigam parishad meeting

नगर निगम प्रशासन की कछुआ चाल और जिम्मेदारों की फाइल-फाइल खेलने की आदत ने शहर की जनता को आर्थिक नुकसान पहुंचा दिया है।

नगर निगम प्रशासन की कछुआ चाल और जिम्मेदारों की फाइल-फाइल खेलने की आदत ने शहर की जनता को आर्थिक नुकसान पहुंचा दिया है। समय पर संपत्तिकर जमा करने वाले जागरूक नागरिकों को मिलने वाली 6 प्रतिशत की छूट का प्रस्ताव प्रशासनिक गलियारों में महीनों तक धूल फांकता रहा। जब यह प्रस्ताव परिषद की बैठक में पहुंचा, तब तक उसकी समय-सीमा ही खत्म हो चुकी थी। गुरुवार को जलविहार स्थित मुख्यालय में हुई निगम परिषद की बैठक इसी सुस्ती की भेंट चढ़ गई। आक्रोशित पार्षदों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सदन में जमकर हंगामा किया, जिसके चलते बिना किसी निर्णय के बैठक को 12 जनवरी तक के लिए स्थगित करना पड़ा। संपत्तिकर में 6 प्रतिशत छूट का मामला जैसे ही पटल पर आया, विपक्षी पार्षदों ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। पार्षद नागेंद्र राणा और अनिल सांखला ने पूछा कि जुलाई में एमआईसी द्वारा लिए गए निर्णय को परिषद तक पहुंचने में छह महीने क्यों लगे? निगमायुक्त संघ प्रिय ने सफाई दी कि महापौर की स्वीकृति के बाद इसे एजेंडे में शामिल किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आखिरकार, अव्यावहारिक हो चुके इस प्रस्ताव को वापस लेना पड़ा। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन नागरिकों ने ईमानदारी से टैक्स भरा, उन्हें निगम की सुस्ती के कारण मिलने वाली छूट से वंचित रहना पड़ा।

पंगु सिस्टम का खामियाजा भुगते जनता…
निगम की यह बैठक परिषद की विफलता का जीवंत दस्तावेज है। सात प्रस्ताव और शून्य निर्णय ! जब निगम को पता था कि कर छूट की समय-सीमा है, तो फाइल को दबाकर क्यों रखा गया? क्या यह जनता के साथ धोखा नहीं है ? अधिकारियों के निजी अहं और पार्षदों की आपसी खींचतान के बीच शहर का विकास और जनता की राहत दोनों अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। बैठकें सिर्फ हंगामे की भेंट चढ़ती जा रही हैं। कोई फैसला नहीं हो पा रहा।

मारपीट प्रकरण पर हंगामा…धरना
बैठक में कर संग्रहक एवं वर्तमान में सामान्य प्रशासन में पदस्थ धर्मेंद्र सोनी द्वारा सुरेंद्र राठौर व अजित पर एफआइआर का मामला वार्ड 64 के पार्षद मनोज यादव ने उठाते हुए आरोप लगाया कि टीसी द्वारा वर्ष 2014 से ही टैक्स लिया जा रहा है व कर जमा होने के बावजूद शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और पुलिस प्रकरण बनाए जा रहे हैं। इस पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के सभी पार्षदों ने आसंदी घेरकर सभापति से कार्रवाई की मांग की। वहीं कुछ पार्षद धरने पर भी बैठ गए थे। सभापति ने निगमायुक्त को पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सदन में यह चर्चा रही कि बिल्डर को बचाने के लिए पार्षद दबाव बना रहे हैं।

कुल संपत्तियां: 3.48 लाख (नगर निगम सीमा में)।
वसूली: केवल 1.90 लाख संपत्तियों से ही अब तक टैक्स वसूला गया।
विवाद: शहर की बड़ी संख्या में संपत्तियां नोटिस के फेर में उलझी हैं।

प्रशासन ने जुलाई में ही एमआईसी में प्रस्ताव पास किया था, लेकिन परिषद में आने में देरी हुई। यदि किसी अधिकारी की गलती है, तो उसके खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
शोभा सिकरवार, महापौर

नामकरण और कर छूट जैसे प्रस्तावों की समीक्षा कर उन्हें दोबारा सदन में रखने के निर्देश दिए गए हैं। धर्मेंद्र सोनी के मामले में भी जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
संघ प्रिय, निगमायुक्त

गौशाला और नामकरण, सियासी रस्साकशी में उलझे मुद्दे
गौशाला: लाल टिपारा गौशाला के लिए 19.50 करोड़ रुपए के पशु आहार के प्रस्ताव पर भी भारी विरोध हुआ। पार्षदों ने आरोप लगाया कि 5 साल से एक ही ठेकेदार को काम दिया जा रहा है और 19.26 करोड़ रुपए पहले ही खर्च दिखाए जा चुके हैं। मामले की जांच के लिए समिति बनाने की मांग उठी।
नामकरण: क्षेत्रीय कार्यालय-3 और चेतकपुरी रोड के नामकरण प्रस्तावों पर भी आम सहमति नहीं बन पाई। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब नामकरण समिति बनी हुई है, तो प्रस्ताव सीधे सदन में कैसे आ रहे हैं।