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नगर निगम में गार्बेज शुल्क पर उलटफेर : कम की गई दरें रद्द, पुरानी दरें बहाल

तीखी बहस और सभापति के हस्तक्षेप के बाद बड़ा फैसला नगर निगम परिषद में गार्बेज शुल्क (कचरा शुल्क) को लेकर एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला। 29 दिसंबर 2025 को चैंबर ऑफ कॉमर्स की मांग पर सर्वसम्मति से शुल्क के ‘युक्तियुक्तकरण’ का फैसला हुआ था, जिसमें कई श्रेणियों में शासन द्वारा निर्धारित दरों […]

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नगर निगम परिषद में गार्बेज शुल्क को लेकर हंगामा करते पार्षद व सदन में बात रखते नेता प्रतिपक्ष।

तीखी बहस और सभापति के हस्तक्षेप के बाद बड़ा फैसला

नगर निगम परिषद में गार्बेज शुल्क (कचरा शुल्क) को लेकर एक बार फिर तीखा टकराव देखने को मिला। 29 दिसंबर 2025 को चैंबर ऑफ कॉमर्स की मांग पर सर्वसम्मति से शुल्क के 'युक्तियुक्तकरण' का फैसला हुआ था, जिसमें कई श्रेणियों में शासन द्वारा निर्धारित दरों को काफी कम कर दिया गया था। लेकिन इस फैसले पर सवाल उठने के बाद निगमायुक्त संघ प्रिय ने पुनर्विचार प्रस्ताव पेश किया, जिस पर गुरुवार को सदन में विपक्षी पार्षद इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं दिखे और उनका कहना था कि बिना प्रस्ताव का पूरा अवलोकन किए निर्णय लेना उचित नहीं होगा, इसलिए इसे वापस करते हुए समय दिया जाए। जबकि निगमायुक्त संघ प्रिय ने सदन में कहा कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक है और दरें स्पष्ट नहीं होने से वसूली अटकी हुई है। यदि यदि विसंगतियां नहीं सुधारी गईं तो प्रस्ताव शासन को भेजना पड़ेगा और राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा। अंतत: सभापति मनोज सिंह तोमर के हस्तक्षेप कर बैठक को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया और बाद में पार्षदों व अधिकारियों के बीच सहमति बनाई गई। अंतत: निर्णय हुआ कि जिन बिंदुओं पर पुनर्विचार भेजा गया है, वहां पूर्व स्वीकृत दरों के अनुसार ही गार्बेज शुल्क वसूला जाएगा।

प्रमुख विसंगतियां

निजी होटल : 5000 वर्गफीट तक 30 हजार की दर को घटाकर 5,000 कर दिया गया था। 10 हजार वर्गफीट तक 60 हजार की दर घटकर 7 से 10,000 के बीच कर दी गई। 10 हजार वर्गफीट से अधिक पर 90 हजार की दर को पहले 30 हजार और फिर 15 हजार कर दिया गया। परिषद का यह निर्णय अब पलट दिया है।

सिनेमा हॉल/सिनेप्लेक्स: प्रति स्क्रीन 10 हजार, 20 हजार और 30 हजार की वार्षिक दरों को घटाकर क्रमश: 8, 15 और 25 हजार किया गया था। अब पुरानी दरें बहाल होंगी।

शॉपिंग मॉल: एक लाख रुपये की तय दर को क्षेत्रफल के आधार पर तोडकऱ 10 हजार से 75 हजार तक कर दिया गया था। यह भी अब पूर्व दरों के अनुरूप होगा। इसी प्रकार शोरूम-सह-वर्कशॉप, मल्टी ब्रांड आउटलेट, बैंक व ऑफिस तथा शासकीय एवं निजी वेयरहाउस की दरों में भी बदलाव किए गए थे।

दुकानें: शासन ने 22 सितंबर 2023 को 400 वर्गफीट तक की दुकान पर 500 रुपये शुल्क तय किया था। एमआईसी ने 201 से 1000 वर्गफीट तक 500 रुपये रखा, लेकिन परिषद ने इसे घटाकर 360 रुपये कर दिया। अब फिर 500 रुपये ही वसूले जाएंगे। बड़े क्षेत्रफल की दुकानों में भी वर्गफीट की सीमा बदलकर शुल्क कम कर दिया गया था, जिसे अब दुरुस्त किया जाएगा।

फैक्ट्री-कारखाने: 20 हजार वर्गफीट तक 2500 रुपये की दर को परिषद ने घटाकर 2000 किया। 50 हजार वर्गफीट पर 10 हजार की जगह 3 हजार, एक लाख वर्गफीट पर 20 हजार की जगह 7 हजार और उससे अधिक पर 50 हजार की जगह 10 हजार रुपये तय कर दिए गए थे। अब इन श्रेणियों में भी पुरानी दरें लागू होंगी।

निजी शिक्षण संस्थाएं: 3000 वर्गफीट तक 5000 रुपये की दर को घटाकर 2500 किया गया। 3001 से 10 हजार वर्गफीट पर 7500 की दर को नई श्रेणियां बनाकर 5 हजार तक सीमित कर दिया गया। बड़े संस्थानों पर भी 20 हजार और 50 हजार की दरों में कटौती की गई। यह पूरा ढांचा अब पुन: संशोधित होगा।

निजी छात्रावास/हॉस्टल/आश्रम: संपूर्ण क्षेत्रफल पर 10 हजार रुपये की दर घटाकर 7 हजार कर दी गई थी। अब फिर 10 हजार रुपये ही वसूले जाएंगे।

अन्य प्रस्तावों पर विवाद, बैठक 2 मार्च तक स्थगित

बैठक में पुराने निगम मुख्यालय की छह दुकानों और दो हाल को किराए पर देने तथा हुरावली में 23 बीघा जमीन पर लगभग 448 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के टेंडर आमंत्रित करने के प्रस्तावों पर भी विवाद हुआ। नेता प्रतिपक्ष हरिपाल सिंह ने विसंगतियां बताते हुए अवलोकन के लिए समय मांगा। निगमायुक्त ने दो टूक कहा कि ये प्रस्ताव निगम के राजस्व को मजबूत करने के लिए हैं और इन्हें लटकाना शहर के हित में नहीं है। लेकिन विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा। अंतत: सभापति ने बैठक को 2 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया