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प्रदेश में सबसे महंगी नसबंदी, फिर भी कुत्तों का आतंक, ग्वालियर में 1170 रु. प्रति डॉग खर्च, 174 लोग शिकार

आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) अभियान की हकीकत चौंकाने वाली आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) अभियान की हकीकत चौंकाने वाली है। प्रदेश में कुत्तों की सबसे महंगी नसबंदी ग्वालियर में हो रही है, […]

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आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) अभियान की हकीकत चौंकाने वाली

आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) अभियान की हकीकत चौंकाने वाली है। प्रदेश में कुत्तों की सबसे महंगी नसबंदी ग्वालियर में हो रही है, प्रति कुत्ता 1170 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर में कुत्तों का आतंक कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। तुलना करें तो भोपाल में यही खर्च करीब 1000 रुपए और जबलपुर में 968 रुपए है। सवाल यह है कि जब ग्वालियर में सबसे ज्यादा रकम खर्च हो रही है तो नतीजे सबसे कमजोर क्यों हैं। ग्वालियर नगर निगम में बढ़ती कुत्तों की संख्या का कहीं न कहीं फेल होने का मुख्य कारण जिन अफसरों को एबीसी सेंटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है वह उनका सही ढंग से पालन नहीं कर पा रहे है। इसका कारण उन पर एक की जगह 3-4 पद होना और उसे भी सही नहीं संभाल पा रहे है फिर भी उन्हें नोडल व सहायक नोडल की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिना पर्याप्त समय और विशेषज्ञता के यह अभियान सफल हो सकता है, जिम्मेदारों पर ही काम का बोझ ज्यादा हो, तो अभियान की रफ्तार और मॉनिटरिंग प्रभावित होना तय है।

जिम्मेदारी उन पर, जो पहले से चार-चार विभाग संभाल रहे

केशव सिंह चौहान (उपयंत्री) – नोडल अधिकारी, एबीसी सेंटर

अतिरिक्त चार्ज: मदाखलत नोडल अधिकारी, मदाखलत अधिकारी ग्वालियर विधानसभा

गौरव परिहार (विनियमित कर्मचारी)– सहायक नोडल अधिकारी, एबीसी सेंटर

अतिरिक्त चार्ज: वंडर पार्क नोडल अधिकारी, ट्रैफिक प्रभारी, जू केयर टेकर

सिर्फ 20–25 कुत्ते रोज पकड़े जा रहे

करीब एक करोड़ रुपए में कुत्ते पकड़ने का ठेका लेने वाली एनिमल केयर फाउंडेशन संस्था एक गाड़ी से 15–20 कुत्ते पकड़ रही है, जबकि निगम की गाड़ी से सिर्फ 5 कुत्ते। यानी कुल मिलाकर रोजाना 20 से 25 कुत्ते ही पकड़े जा रहे हैं। इनकी नसबंदी बिरला नगर पुल और लक्ष्मीगंज के नीचे संचालित एबीसी सेंटर में दो डॉक्टरों की देखरेख में की जा रही है। लेकिन शहर की आबादी और कुत्तों की संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा बेहद कम माना जा रहा है।

रोज बढ़ रहे हमले, 174 लोग एक दिन में शिकार

सोमवार को ही शहर में 174 लोगों को कुत्तों ने काटा। सिविल अस्पताल हजीरा-48, जिला अस्पताल मुरार- 61, जेएएच-45 नए और पुराने मिलाकर 499 लोग रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। यह आंकड़ा हालात की गंभीरता बयां करता है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा झुंड

नौगजा रोड, शिंदे की छावनी, नबाब साहब का कुआं, रामदास घाटी, लक्ष्मण तलैया, शब्दप्रताप आश्रम रोड, कोटेश्वर, आनंद नगर, विनय नगर, किला गेट, सेवा नगर, जीडीए ऑफिस के पास, रेलवे स्टेशन मरी माता, फूलबाग, डीबी मॉल के सामने, नदी गेट, छप्पर वाला पुल, राममंदिर चौराहा, नई सड़क, माधव कॉलेज, लक्ष्मीगंज चौराहा, एबी रोड पुलिस चौकी, बजरिया, थाटीपुर, भीमनगर, बारादरी, गोले का मंदिर, चेतकपुर रोड, जीवाजी विवि तिराहा, हुरावली रोड सहित कई क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड आम दिख रहे हैं।

बिरला नगर के साथ लक्ष्मीगंज का एबीसी सेंटर चालू करा दिया गया है। संस्था और निगम की गाड़ियां कुत्ते पकड़ रही हैं। जल्द ही अभियान में तेजी लाई जाएगी और आश्रय स्थल भी बनाए जाएंगे।

प्रदीप तोमर, अपर आयुक्त नगर निगम