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53 ‘ब्लैक स्पॉट’ 14 अंधेरे रास्ते, असुरक्षित महसूस करती हैं महिलाएं-बेटियां

ग्वालियर. ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच ग्वालियर की हकीकत उलट है। शहर की कई सडक़ें अब महिलाओं, बेटियों के लिए असुरक्षित होती जा रही हैं। दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा, कॉलेज जाती छात्राएं हों या घर का सामान लेने निकलीं महिलाएं— उनके जहन में अपनी सुरक्षा का मुद्दा चलता रहता […]

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ग्वालियर. ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच ग्वालियर की हकीकत उलट है। शहर की कई सडक़ें अब महिलाओं, बेटियों के लिए असुरक्षित होती जा रही हैं। दिन का उजाला हो या रात का अंधेरा, कॉलेज जाती छात्राएं हों या घर का सामान लेने निकलीं महिलाएं— उनके जहन में अपनी सुरक्षा का मुद्दा चलता रहता है। विडंबना देखिए, पुलिस की फाइलों में तो ङ्क्षपक बूथ और बेटी की पेटी जैसी योजनाएं हैं, लेकिन धरातल पर गुड़ा-गुड़ी का नाका से लेकर कंपू तक की सडक़ों पर शोहदों की शिकायतें आम हैं।

शराब के अहाते और मनचलों का हॉटस्पॉट

शहर के कई इलाके अब असुरक्षा के ङ्क्षसबल बन चुके हैं। गुड़ा-गुड़ी का नाका पर स्थित शराब की दुकान महिलाओं के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है। यहां दिनभर शराबियों का जमावड़ा रहता है, जो आते-जाती महिलाओं पर भद्दी फब्तियां कसते हैं। यही हाल केआरजी कॉलेज (कंपू) का है, जहां छात्राओं की सुरक्षा भगवान भरोसे है। कोङ्क्षचग सेंटरों और गल्र्स स्कूलों के बाहर मंडराते मनचले पुलिस की मुस्तैदी के दावों की हवा निकाल रहे हैं।

स्टेशन और किले पर शराबियों का राज

ग्वालियर किले पर महिलाओं का अकेले जाना मतलब छेडख़ानी को दावत देना है। कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाला सुनसान इलाका हो या रेलवे स्टेशन का परिसर, हर तरफ असामाजिक तत्वों का बोलबाला है। स्टेशन पर रात में ट्रेन पकडऩा या उतरना महिलाओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

असुरक्षा का कब्जा

महिला सुरक्षा की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने खुद शहर में 53 ऐसे स्थान चिह्नित किए हैं जिन्हें ब्लैक स्पॉट माना गया है। इनमें पुलों के नीचे, सुनसान गलियां और प्रमुख कोङ्क्षचग सेंटर्स शामिल हैं। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने नगर निगम को पत्र लिखकर 14 ऐसे अंधेरे रास्तों की सूची दी है, जहां स्ट्रीट लाइट न होने के कारण अपराधी सक्रिय रहते हैं।

पुलिस के दावे बनाम कड़वी हकीकत

हमने कोङ्क्षचग सेंटर, गल्र्स स्कूल और कॉलेज जैसे 53 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं। इन जगहों पर पेट्रोङ्क्षलग बढ़ाई जा रही है। ङ्क्षपक बूथ और ’बेटी की पेटी’ के माध्यम से महिलाएं बिना डरे शिकायत कर सकती हैं। हमारी प्राथमिकता महिला सुरक्षा है।
शिखा सोनी, डीएसपी, महिला सुरक्षा

रेलवे स्टेशन, किले से शराबियों को हटाना जरूरी

किले पर खासकर अकेले जाने में महिलाएं काफी अधिक घबराती हैं, जहां लड़कियों, महिलाओं के साथ छेड$खानी की काफी घटनाएं देखने में आती हैं। साथ ही रात में कलेक्ट्रेट तरफ सूनसान इलाके में महिलाएं जाने से डरती हैं। साथ ही रेलवे स्टेशन पर भी माहौल खराब देखने को मिल रहा है। शराबी वहां का माहौल खराब कर रहे हैं वहीं महिलाओं की सुरक्षा की ²ष्टि से ठीक नहीं है।
हनी शर्मा, संस्थापक अध्यक्ष, स्त्री शक्ति मंच

सतर्कता की सुरक्षा की कुंजी

रात में बाहर निकलते समय अपनी लोकेशन घरवालों को शेयर करना, आस पास का ध्यान रखना, रात में बाहर निकलते समय पेपर स्प्रे जैसे सुरक्षा के आइटम रखना जरूरी है। सतर्क रहकर ही अपनी सुरक्षा को निश्चित किया जा सकता है। सिटी सेंटर, हरिशंकर पुरम, सिकंदर कंपू जैसे स्थानों पर जब अकेले निकलना होता है तब वहां असुरक्षा की संभावनाएं लगती हैं। इन स्थानों पर पुलिस को अधिक गश्त और सीसीटीवी कैमरा लगाने की जरूरत है।

  • नीता अग्रवाल, लायंस क्लब आद्या