यहां की विशेषता मां त्रिशला के गर्भधारण काल की लेटी हुई मूर्ति है। भगवान के जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक की मूर्तियों से भगवान के जीवनकाल को दर्शाया है।
ग्वालियर. ग्वालियर में किले की तलहटी पर उरवाई गेट के पास त्रिशलागिरी में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर की गर्भकाल से मोक्ष कल्याणक तक का 5 मूर्तियों से वर्णन है। यहां की विशेषता मां त्रिशला के गर्भधारण काल की लेटी हुई मूर्ति है। भगवान के जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक की मूर्तियों से भगवान के जीवनकाल को दर्शाया है। बताते हैं, मूर्तियों का निर्माण राजा डूंगरसिंह के शासनकाल में 1450 के करीब हुआ।
1. विशाल मूर्ति में माता त्रिशला को आराम करते दिखाया है। पास ही अन्य देवियों की मूर्तियां हैं।
2. दूसरी मूर्ति भगवान के जन्म की है। इसमें वे माता की गोद में बैठे हैं और इंद्र भगवान महावीर स्वामी को सुमेरू पर्वत पर ले जाने आए हैं।
3. तीसरी मूर्ति में भगवान महावीर तपस्या कर रहे हैं।
4. चौथी मूर्ति में भगवान को ज्ञान प्राप्त होता है। वे लोगों के कल्याण में इसका उपयोग करते हैं।
5. पांचवीं मूर्ति में भगवान मोक्ष को प्राप्त करते हैं।
देशभर में मनाई जा रही महावीर जयंती
महावीर जयंती गुरुवार को देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है, इस दिन सुबह से ही चल समारोह में भगवान महावीर के जयकारे गूंजते नजर आने लगे, शाजापुर में सकल जैन समाज ने भव्य चल समारोह निकाला, जिसमें समाज के बच्चे, महिला पुरुष, युवक-युवतियों काफी संख्या में शामिल थे।
चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के अवसर पर गुरुवार सुबह सकल जैन समाजजनों द्वारा शहर में चल समारोह निकाला गया। चल समारोह में शामिल छोटी छोटी बालिकाएं व युवतियां एवं महिलाएं हाथों में अहिंसा परमो धर्म और महावीर स्वामी के सिद्धांत लिखी हुई तख्तियां लेकर नारे लगाते हुए चल रही थी। शहर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ चल समारोह जैन उपाश्रय पर पहुंचा। चल समारोह का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने स्वागत भी किया। यहां पर जैन संतों और साध्वियों ने समाज जनों को प्रवचन दिए। इस दौरान बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के महिला पुरुष शामिल रहे।