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‘सहालग’ पर संकट : अब शगुन के लिफाफे में भी क्यूआर कोड चलेगा क्या? बाजार से 10-50-100 के नए नोट गायब!

19 जून से सहालग (शादियों) का सीजन शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार बैंड-बाजा और बारात के बीच एक अजीब सा सन्नाटा है। संकट नकदी का नहीं, बल्कि ‘खुल्ले’ (छोटे नोटों) का है। हालात इतने विकट ...

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ग्वालियर. 19 जून से सहालग (शादियों) का सीजन शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार बैंड-बाजा और बारात के बीच एक अजीब सा सन्नाटा है। संकट नकदी का नहीं, बल्कि ‘खुल्ले’ (छोटे नोटों) का है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि बाजार से 10, 20, 50 और 200 रुपए के नए नोट पूरी तरह नदारद हैं। नौबत यहां तक आ गई है कि लोग मजाकिया लहजे में कहने लगे हैं कि इस बार शादियों में दूल्हा भी गले में नोटों की माला की जगह डिजिटल स्कैनर टांगकर घूमेगा और मेहमान शगुन के लिफाफे देने के बजाय सीधे क्यूआर कोड स्कैन करेंगे! शादी वाले परिवारों से लेकर आम व्यापारियों तक, हर कोई इस समय छोटे नोटों के संकट से त्रस्त है। व्यापारियों ने बैंकों के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस दी हैं, लेकिन छोटे नोटों की आमद जस की तस है। कुल मिलाकर, डिजिटल इंडिया के दौर में भी भारतीय शादियों और रोजमर्रा के व्यापार का मिजाज बिना नकद नारायण के अधूरा है।

खेल समझिए… बाजार पर 500 के नोट का ‘कब्जा’

छोटे नोटों की इस भयंकर किल्लत के पीछे एक बड़ा गणित काम कर रहा है। दरअसल, इस समय बाजार में मौजूद कुल करेंसी वैल्यू का 85.4 फीसदी हिस्सा अकेले 500 रुपए के बड़े नोटों का है। मात्र 14.6 फीसदी हिस्सेदारी में ही बेचारे 10, 20, 50, 100 और 200 रुपए के नोट अपनी सांसें गिन रहे हैं। एक्सपट््र्स का मानना है कि यह अनुपात बिल्कुल उल्टा होना चाहिए था, ताकि बाजार सुचारू रूप से चल सके। पिछले काफी समय से नागपुर से आने वाली करेंसी का हाल यही बना है।

एक्सपर्ट: आरबीआइ को बढ़ाना होगा सर्कुलेशन

अगर बाजार में छोटे नोटों की समस्या आ रही है, तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) को स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार छोटे नोटों का सर्कुलेशन तुरंत बढ़ाना चाहिए, ताकि आम जनता और व्यापारियों को परेशानी न हो। मैं खुद इस मामले में वरिष्ठ स्तर (आरबीआइ) पर बात करके पता लगाती हूं कि आखिर छोटे नोटों की सप्लाई के पीछे कहां रुकावट आ रही है।

  • अमिता शर्मा, लीड बैंक मैनेजर ग्वालियर

इनका कहना है

400 रुपए वापस करने की व्यवस्था तो जैसे-तैसे हो जाती है, लेकिन ऊपर के 50 रुपए छुट्टे देने में हालत खराब हो रही है। बाजार में जो थोड़े-बहुत छोटे नोट घूम भी रहे हैं, वे इतने पुराने, कटे-फटे और जर्जर हैं कि उन्हें लेने में भी डर लगता है।
दिलीप खंडेलवाल, पूर्व अध्यक्ष, खेरिज किराना व्यवसायी संघ

इधर एटीएम उगल रहे रंग-बिरंगे नोट

एक ओर जहां बैंकों से छोटे नए नोट नहीं मिल पा रहे हैं वहीं दूसरी ओर एटीएम में रुपए निकालने पर रंग-बिरंगे नोट निकल रहे हैं। ङ्क्षशदे की छावनी निवासी अकबर खान ने बताया कि पिछले दिनों जब मैं शाम को खेड़ापति रोड स्थित एचडीएफसी की एटीएम से पैसे निकालने गया तो कुछ 500 रुपए के नोट रंगे हुए (गुलाबी रंग के) और कुछ पर स्याही लगी हुई थी। जिसके तुरंत बाद मैंने एटीएम की बैंक के ऑफिस जाने की कोशिश की लेकिन शाम हो जाने के कारण वहां क्लोङ्क्षजग चल रही थी और शनिवार भी था। उन लोगों ने मुझे अगले वर्किंग डे में आने को कहा। दो दिन बाद बैंक में गया उनको पूरा मामला समझाया तब उन्होंने मेरे 2500 रुपए बदल कर दिए।