
Domestic disputes: घरेलू विवादों में मोबाइल अहम कड़ी (Photo Source: AI Image)
Domestic disputes: मोबाइल फोन अब केवल बातचीत का माध्यम नहीं रहा, बल्कि कई परिवारों में विवाद की जड़ बनता जा रहा है। उज्जैन के चिमनगंज स्थित वन स्टॉप सेंटर के आंकड़े इस बदलते सामाजिक संकट की ओर इशारा कर रहे है। काउंसलिंग के दौरान सामने आए मामलों में पिछले एक वर्ष में 50 से अधिक ऐसे प्रकरण मिले, जिनमें मोबाइल फोन पति-पत्नी या परिवार के अन्य सदस्यों के बीच तनाव और अलगाव का कारण बना।
वन स्टॉप सेंटर में 1 जनवरी से 31 मई 2026 तक कुल 748 मामले पहुंचे। इनमें 551 घरेलू हिंसा, 52 घर से भागने, 28 गुमशुदगी, 14 लिव-इन संबंध, 4 छेड़छाड़ और 3 दुष्कर्म से जुड़े मामले शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार घरेलू विवादों के कई मामलों में मोबाइल फोन विवाद की अहम कड़ी बनकर सामने आया। देर रात तक चैटिंग, सोशल मीडिया पर बढ़ती सक्रियता, अनजान लोगों से संपर्क, मोबाइल की गोपनीयता और एक-दूसरे के फोन की निगरानी को लेकर पैदा हुआ अविश्वास कई रिश्तों के टूटने की वजह बना।
माधवनगर क्षेत्र की एक महिला ने पति पर प्रताड़ना का आरोप लगाते केस हुए वन स्टॉप सेंटर में शरण ली। जांच में सामने आया कि पति की एक युवती से इंस्टाग्राम पर लगातार बातचीत को लेकर घर में विवाद शुरू हुआ था। काउंसलिंग के बाद दोनों के बीच समझौता हो गया।
नानाखेड़ा क्षेत्र के एक दंपती के बीच पति के मोबाइल में पासवर्ड लगाने को लेकर लगातार विवाद होता रहा। पत्नी को किसी अन्य संबंध का संदेह था। मामला घरेलू हिंसा तक पहुंचा और महिला वन स्टॉप सेंटर पहुंची। कई दौर की काउंसलिंग के बाद दोनों ने फिर साथ रहने का निर्णय लिया।
एक नवविवाहिता अपने पति के ऑनलाइन गेम खेलने और देर रात तक मोबाइल उपयोग से परेशान होकर मायके चली गई। परिवार में लगातार तनाव बना रहा। वन स्टॉप सेंटर में दोनों की काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद दंपती के बीच समझौता हो सका।
काउंसलिंग के दौरान यह भी सामने आया कि कई महिलाएं और पुरुष सोशल मीडिया पर बने संबंधों के कारण अपने वैवाहिक जीवन से दूर होते गए। कुछ मामलों में मोबाइल पर बातचीत को लेकर शंका इतनी बढ़ गई कि बात मारपीट और घर छोड़ने तक पहुंच गई।
ऐसे में कई युवतियां घर से निकलकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं, जहां उन्हें आश्रय और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया गया। वन स्टॉप सेंटर की टीम के अनुसार अधिकांश मामलों में समस्या का मूल कारण केवल मोबाइल नहीं, बल्कि उससे उपजा अविश्वास और पति-पत्नी के बीच संवाद की कमी थी। काउंसलिंग के जरिए करीब 75 से 80 प्रतिशत मामलों का समाधान किया गया और कई टूटते परिवारों को दोबारा जोड़ा गया।
Updated on:
12 Jun 2026 05:20 pm
Published on:
12 Jun 2026 05:20 pm
