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मै तो उसे इलाज के लिए लाया था लेकिन डॉक्टरों ने मार दिया मेरी पत्नी को, पढि़ए एक पति की दर्दभरी कहानी

मै तो उसे इलाज के लिए लाया था लेकिन डॉक्टरों ने मार दिया मेरी पत्नी को, पढि़ए एक पति की दर्दभरी कहानी

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मुरैना। जौरा अस्पताल से रैफर होकर आई प्रसूता ने जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि उसे उपचार नहीं मिला, जिससे मौत हो गई। चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। वहीं किसान कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पीडि़त पक्ष के समर्थन में अस्पताल के वार्ड में धरना-आंदोलन शुरू कर दिया। एसडीएम के जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद धरना खत्म हुआ।

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मृतक महिला के पति का आरोप है कि जिला अस्पताल आने के बाद दो घंटे तक उसकी पत्नी को उपचार नहीं मिला। जब उसकी मौत हो गई तब कहा, इसको ग्वालियर ले जाओ। चिकित्सक समय पर उपचार शुरू कर देते तो उसकी जान बच सकती थी। जानकारी के अनुसार कविता (30) पत्नी महेश कुशवाह निवासी किशनपुर अपने मायके मकूंदा में थी।

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पेट में दर्द हुआ तो पास के अस्पताल जौरा में दिखाने ले गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उसने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन नवजात ने थोड़ी देर में ही दम तोड़ दिया। महिला की हालत खराब होने पर चिकित्सक ने कविता को जिला अस्पताल रैफर कर दिया। परिजन महिला को बुधवार की सुबह करीब सात बजे लेकर मेटरनिटी में पहुंचे। वहां डॉ. सरिता राठौर ड्यूटी पर थीं। परिजन का आरोप है कि महिला का किसी ने इलाज शुरू नहीं किया। इसलिए मौत हो गई। पति महेश कुशवाह ने बताया कि जौरा में प्रसव के दौरान मृत अवस्था में गली हुई लड़की हुई थी। मेरी पत्नी कविता को जिला अस्पताल के लिए रैफर कर दिया।

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यहां सात बजे मेटरनिटी में आ चुकी थी, लेकिन चिकित्सक ने इलाज शुरू नहीं किया और 10 बजे मेरी पत्नी को स्टाफ बाहर लेकर आया और बोला इसे ग्वालियर ले जाओ, हमने रैफर कर दिया, लेकिन उस समय कविता की मौत हो चुकी थी। चिकित्सक ने कविता की मौत हो जाने के बाद रैफर किया गया। महेश ने यह भी बताया कि डॉक्टर ने कहा था कि पहले डिलीवरी हो रही है, उसको निपटा लें, उसके बाद इलाज शुरू करते हैं। अगर मेरी पत्नी को समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी मौत नहीं होती।

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आशा कार्यकर्ताओं ने कहा, डिलीवरी के लिए जाते हैं पैसे
आशा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से मेटरनिटी नर्सों पर आरोप लगाया कि यहां बिना पैसे के डिलीवरी नहीं होती। एक केस के तीन से चार हजार रुपए तक नर्स लेती हैं, उसके बाद इलाज होता है। पैसे न मिलने तक मरीज की जो भी हालत हो, उस पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। मेटरनिटी में पैसा ही सबकुछ है। आशा कार्यकर्ताओं ने यहां तक कहा कि हमने कई बार अधिकारियों से शिकायत की है कि मेटरनिटी में प्रसूताओं से पैसा लिया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।

कविता कुशवाह का बीपी लॉ था, घबराहट हो रही थी। उसको सात बजे मेटरनिटी में लेकर आ गए थे। यहां किसी ने उपचार ही नहीं किया। इसलिए उसने दम तोड़ दिया।
राजकुमारी कुशवाह, आशा कार्यकर्ता


महिला जौरा से रैफर होकर आई थी। उसको खून की कमी थी। उसका उपचार किया था। हमारे यहां नौ बजे आई थी। 8.50 पर तो उसका पर्चा बना है। जिस समय वह आई थी, उस समय तो कोई डिलीवरी भी नहीं थी इसलिए इलाज न करने का तो कोई सवाल ही नहीं है।
डॉ. सरिता राठौर, ड्यूटी चिकित्सक


प्रसूता को जौरा में बच्ची हुई थी, उसकी वहां मौत हो गई थी। प्रसूता को जौरा से मुरैना रैफर किया। यहां लेकर आए, उसका इलाज भी किया। हालत बिगडऩे पर उसे ग्वालियर रैफर किया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई। उसकी हालत पहले से ही अधिक खराब थी, तभी तो जौरा से रैफर किया था।
डॉ. पदमेश उपाध्याय, आरएमओ, जिला अस्पताल, मुरैना

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