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अधिकारी बोले- प्रबंधन करे बसें अनुबंधित, स्कूल संचालकों ने कहा- नहीं कर सकते

अधिकारी बोले- प्रबंधन करे बसें अनुबंधित, स्कूल संचालकों ने कहा- नहीं कर सकते
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ग्वालियर

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Gaurav Sen

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Updated: 10 May 2018, 9:53 AM IST

parents association gwalior

parents association gwalior

ग्वालियर। आने वाले सत्र में बच्चों को किसी अव्यवस्था, बदइंतजामी और दुर्घटना का शिकार न होना पड़े और चालक -परिचालकों को सही वेतन का भुगतान करने सहित कई बिंदुओं पर शिक्षा विभाग, बस ऑपरेटर्स और स्कूल प्रबंधकों सहित चालक परिचालक संघ की बैठक जिला पंचायत परिसर में हुई।

चालक-परिचालक संघ ने वेतन के अलावा बच्चों की सुरक्षा को भी एजेंडे में शामिल किया था, लेकिन ज्यादातर समय आपसी छींटाकशी और वाद-विवाद में निकल गया। डेढ़ घंटे चली बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई स्थाई समाधान नहीं निकल सका और न ही वेतन निर्धारण को लेकर सहमति बन सकी। अंत में चालक परिचालक संघ की अगुवाई कर रहे भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र कुशवाह ने कहा, संघ की मांगों का निराकरण न हुआ तो सत्र खुलने के बाद काम पर नहीं आएंगे। इस दौरान अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल प्रबंधन बसों को अनुबंधित करके संचालित कराएं, लेकिन जवाब में स्कूल संचालकों ने सीधे तौर पर बस अनुबंधित करने से मना कर दिया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तृतीय श्रेणी कर्मचारी भेजकर औपरचारिकता पूरी की, जिससे स्कूल संचालकों पर डीईओ के अलावा कोई भी प्रभाव नहीं छोड़ सका।

अफसर, स्कूल संचालक और ऑपरेटर में एेसे चली चर्चा














































आरटीओ प्रतिनिधि



चालक-परिचालक संघ के ज्ञापन में स्कूल प्रबंधन द्वारा १२ माह काम और १० माह का वेतन शामिल है। फंड राशि हेल्पर और ड्राइवर के वेतन से काटने का उल्लेख है।


राहुल श्रीवास्तव:स्कूल आउट सोर्स से बस लगाते हैं, यह बस संचालक देखें। हां बैठने की समस्या है।
डीईओ:स्कूल के बाहर तो बस स्टाफ की व्यवस्था कर सकते हैं।
चालक संघ:बसें आउटसोर्स की हैं, लेकिन पैसा तो स्कूल के पास जाता है, स्कूल प्रबंधक कमीशन काटकर भुगतान करते हैं।
स्कूल संचालक:हम बीच से हट जाते हैं, बस ऑपरेटर सीधे पैरेंट्स से पैसा लें।
डीईओ:जो उचित मांग हैं, उनको सॉल्व किया जाना चाहिए। एेसे इंतजाम हों कि आपस में तकरार न हो, बस में ओवर क्राउड न हो, यह जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की है।
यातायात निरीक्षक:जिन स्कूलों में बस अंदर लगती हैं, वहां बस स्टाफ के बैठने के इंतजाम हो सकते हैं।
चालक संघ:बस ऑपरेटर्स भी शोषण करते हैं। बस में लॉग बुक रखी जाए, जो ड्राइवर-हेल्पर रूट पर हो, उसका नाम लिखा जाए।
बस संचालक:स्कूल प्रबंधन और बस ऑपरेटर्स को झेलना पड़ रहा है, नीति की बात करिए। एक बस लेकर देखो तो पता चलेगा, कैसे संचालित होती है। सरकारी कार्यक्रमों में जाने का पैसा नहीं मिलता है, फिर हम चालक को अतिरिक्त पैसे कैसे दें।
यातायात निरीक्षक:बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से जिस भी वाहन से बच्चे आएं, उसको अनुबंधित करिए। छोटे वाहन से लाने के लिए आप सभी पालकों से साइन करा लेते हो। छोटे वाहन से बच्चे ले जाने पर उतने ही बच्चे ले जाएं, जितने वाहन में आएं।




























स्कूल प्रबंधक:हम अनुबंध नहीं कर सकते हैं। या तो ऑटो बंद करा दें, या फिर उनको सही करा दें।
राहुल श्रीवास्तव:पैरेंट्स ५० रुपए बचाने के चक्कर में स्वयं का वाहन लगा लेते हैं और ऑटो वालों का ही साथ देते हैं।
नीलू भदौरिया:बस नियम से चल चलती हैं, ऑटो-वैन बगैर अनुमति के फिर भी कार्रवाई बसों पर ही होती है।
चालक संघ:कोई भी स्कूल संचालक अनुबंध पत्र देने को तैयार नहीं होता है।
राहुल श्रीवास्तव:वैन में कम बच्चे होने पर किराया १५०० रुपए हो जाएगा, पैरेंट्स दे नहीं पाते हैं।
कलेक्टर प्रतिनिधि:व्यवस्था इस तरह हो कि हमारे आपके बीच मतभेद न हो।




















डीईओ:बच्चों की समस्याओं का हल निकालने के लिए पालक समिति बनाई जाए।
स्कूल संचालक:निर्देश पत्र में प्रत्येक सेक्शन लिखा है, इसको संशोधित करवाकर प्रत्येक क्लास करवाया जाए, क्योंकि सेक्शन के हिसाब से तो संख्या बहुत हो जाएगी।
डीईओ:ठीक है, प्रत्येक सेक्शन की बजाय प्रत्येक क्लास से एक पैरेंट को समिति में लिया जाए। नियमित बैठकें हों।

थोड़े से रुपए बचाने के चक्कर में अभिभावक बच्चों को असुरक्षा में न धकेलें

स्कूल बसें नियम से चलती हैं, फिटनेस व अन्य सरकारी अनुमति भी होती हैं, जबकि ऑटो, वैन बिना नियम के संचालित हो रही हैं, लेकिन जब कोई घटना हो जाए तो चेकिंग बसों की होती है। ऑटो-वैन में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर लाया जाता है।
नीलू भदौरिया, अध्यक्ष-स्कूल बस ऑपरेटर एसोसिएशन

अभिभावक सिर्फ रुपए बचाने के चक्कर में असुरक्षित ऑटो-वैन लगा लेते हैं या स्वयं का वाहन लगा लेते हैं। स्कूल आउट सोर्स से बस लगाते हैं, इसलिए आउट सोर्स की जिम्मेदारी ज्यादा है। समस्याएं भी ज्यादातर आउटसोर्स से हैं।
राहुल श्रीवास्तव, अध्यक्ष-प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

स्कूल संचालकों को गाइडलाइन का पालन करना ही पड़ेगा। सभी नियमों में बंधे हुए हैं, कुछ कमियां बस संचालकों की भी रहती है, सभी बिंदुओं का पालन कराएं तो घटना-दुर्घटना होगी ही नहीं। सभी की भागीदारी हो तो पालन संभव है।
जगदीश राजौरिया, आरटीओ प्रतिनिधि

बच्चों की सुरक्षा सबका दायित्व है। प्रशासन की प्राथमिकता बच्चों को सुरक्षा प्रदान करना ही है। स्कूल प्रबंधन ड्राइवरों के लिए इंतजाम कर सकते हैं। स्कूल प्रबंधन व बस ऑपरेटर ख्याल रखें बस में ओवर क्राउड न हो, जितनी सीट उतने बच्चे बैठें।
आरएन नीखरा, जिला शिक्षा अधिकारी

चालक और परिचालकों को बस ऑपरेटर ६ हजार और ढाई हजार वेतन देते हैं, जबकि हमारी मंाग है कि १२ हजार रुपए ड्राइवर और 8 हजार रुपए हेल्पर को न्यूनतम वेतन दिया जाए। स्कूलों में बस स्टाफ के बैठने की जगह दी जाए।

अजयसिंह जादौन, अध्यक्ष-चालक-परिचालक संघ, ग्वालियर

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