महलगांव की महिलाओं ने इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए आए प्रलोभनों को भी ठुकरा दिया, वहीं पुलिस का वज्र भी डरा धमकाकर चला गया। शहर का यह एकमात्र एेसा आंदोलन था, जिसमें दुकान के बाहर रात में भी महिलाएं धरना देकर बैठी रहती थी। आंदोलन के दौरान बारिश भी हुई, लेकिन वे डटी रहीं।