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शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी से महकेगी शहीदों की बगिया, काकोरी शहीद अशफाक की माटी पहुंची भटनेर

हनुमानगढ़. शहीद अशफाक उल्लाह खान के घर की मिट्टी से भरा कलश मंगलवार को हनुमानगढ़ टाउन स्थित शहीद स्मारक में रखवाया गया। काकोरी शहीद के पौत्र अशफाक उल्लाह माटी का कलश लेकर यहां पहुंचे।

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शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी से महकेगी शहीदों की बगिया, काकोरी शहीद अशफाक की माटी पहुंची भटनेर

शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी से महकेगी शहीदों की बगिया, काकोरी शहीद अशफाक की माटी पहुंची भटनेर

शहीदों के घर-आंगन की मिट्टी से महकेगी शहीदों की बगिया, काकोरी शहीद अशफाक की माटी पहुंची भटनेर
- शहीद अशफाक उल्लाह खान के पौत्र ने किया टाउन स्थित शहीद स्मारक का लोकार्पण
- क्रांतिकारी शहीदों व संघर्ष करने वालों को पाठ्य पुस्तकों में समान रूप से जगह नहीं मिलने का झलका दर्द
हनुमानगढ़. शहीद अशफाक उल्लाह खान के घर की मिट्टी से भरा कलश मंगलवार को हनुमानगढ़ टाउन स्थित शहीद स्मारक में रखवाया गया। काकोरी शहीद के पौत्र अशफाक उल्लाह माटी का कलश लेकर यहां पहुंचे। स्मारक स्थल पर कलश रखवाने के साथ ही इसका लोकार्पण भी कर दिया गया। अब जल्दी ही आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले अन्य शहीदों के घर-आंगन की माटी तथा उनसे जुड़ी वस्तुएं व दस्तावेजों को स्मारक स्थल पर रखवाया जाएगा। जंगे आजादी में फांसी की सजा पाने वाले एवं कारावास की सजा भुगतने वाले 375 गुमनाम शहीदों की तस्वीरों तथा उनके साहस की गाथा को स्मारक स्थल में जगह दी गई है। इस संख्या में निरंतर इजाफा होगा। इसके लिए नागरिक सुरक्षा मंच तथा स्मारक स्थल संयोजक एडवोकेट शंकर सोनी निरंतर प्रयासरत हैं।
शहीद अशफाक उल्लाह खान के पौत्र अशफाक उल्लाह का लोकार्पण समारोह के दौरान नागरिक अभिनंदन किया गया। होटल राजवी पैलेस से शहीद स्मारक स्थल तक वाहनों के साथ तिरंगा रैली निकाली गई। रास्ते में कई जगहों पर शहीद के परिजन का स्वागत किया गया। शहीद स्मारक में आयोजित समारोह में एडवोकेट शंकर सोनी रचित पुस्तक 'गुमनाम क्रांतिवीरÓ का विमोचन भी किया गया। समारोह की अध्यक्षता कर्नल राजेन्द्र प्रसाद ने की। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त डीजे विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि क्रांति के लिए शहादत जरूरी होती है। हमारे क्रांतिकारियों ने यह बखूबी कर के दिखाया। मगर आज मीडिया आदि कृत्रिम कटुता पैदा कर रहे हैं। जबकि आजादी की लड़ाई साझी थी। सबने मिलकर लड़ी थी। मंच संचालन वरिष्ठ साहित्यकार राजेश चड्ढ़ा ने किया। समारोह में गायक कलाकार सिकंदर ने अपनी आजादी को हम हर्गिज भुला सकते नहीं.. गीत प्रस्तुत किया। दीपेन्द्रकांत व निहित सुधाकर ने दुष्यंत की गजल 'हो गई है पीर पर्वत सी अब पिघलनी चाहिएÓ तरन्नुम में पढ़कर सबमें जोश भर दिया। इस मौके पर ओम बिश्नोई, लाजपतराय भाटिया, ओमप्रकाश सुथार, जीजीएस ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा, बार संघ अध्यक्ष मनजिन्द्र लेघा, एडवोकेट हनीश ग्रोवर, डॉ. संतोष राजपुरोहित, राधेश्याम टाक, भगवान सिंह, मोहन शर्मा, कपिल कालरा, धीरेंद्र सिंह, राजवीर माली, खालिद अहमद, पंकज सिंह, आशीष गौतम, बाबू खान, अश्विनी नारंग, भारतेन्दू सैनी आदि मौजूद रहे।
झलका अनदेखी का दर्द
समारोह में अशफाक उल्लाह खान ने कहा कि हनुमानगढ़ में जो शहीद स्मारक बनाया गया है, वैसे स्मारक हर शहर में होने चाहिए। यह जिम्मेदारी सरकारों की है जो ढंग से नहीं निभाई गई। हालांकि नागरिक संगठन अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। सशस्त्र क्रांतिकारियों को पाठ्यक्रमों में पर्याप्त जगह नहीं दी गई। कहीं जिक्र भी किया गया तो मुख्तसर सा। यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि जो बड़ी-बड़ी कुर्सियां आज मिली हुई हैं, उनके पायों पर शहीदों का खून लगा हुआ है। बेशुमार कुर्बानी देकर हम यहां तक पहुंचे हैं।
दोस्ती बिस्मिल-अशफाक सी
अशफाक उल्लाह खान ने कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान जैसी दोस्ती की देश को जरूरत है। दोनों की अपने धर्म में गहरी आस्था थी। मगर दोनों के लिए राष्ट्र धर्म सर्वोपरि था। आज युवाओं को उनकी दोस्ती, जीवनी व संघर्ष के बारे में बताया-पढ़ाया जाए। इससे हम यह समझ सकेंगे कि धर्म और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी व वफादारी कैसे निभाई जाती है।
मां के लिए नहीं रखा नाम
शहीद अशफाक उल्लाह ने फांसी से पहले परिजनों से कहा कि उनके जाने के बाद घर में किसी बच्चे का नाम अशफाक जरूर रखना। मगर शहीद के परिवार की दूसरी पीढ़ी में किसी बच्चे का नाम अशफाक उल्लाह नहीं रखा गया। परिजनों ने सोचा कि शहीद की माता जब भी घर में अशफाक नाम सुनेगी तो उसे शहीद अशफाक उल्लाह याद आएंगे। मां हर समय ही बेटे के गम में रहेगी। इसलिए बाद में शहीद अशफाक उल्लाह खान के भाई के पोते का नाम अशफाक उल्लाह रखा गया।
सबक देगी गुमनाम क्रांतिकारी
एडवोकेट शंकर सोनी ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के दस्तावेज, सेडिशन रिपोर्ट आदि का अध्ययन कर कोरोना काल में 'गुमनाम क्रांतिकारीÓ पुस्तक लिखी। इसमें 1857 से लेकर 1947 तक के प्रमुख आंदोलन, संघर्ष एवं एक्शन में मुख्य भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारियों के बारे में जानकारी दी गई है। फांसी की सजा या काले पानी की सजा भुगतने वाले जांबाजों के संघर्ष को बयां किया गया है जो स्कूल व कॉलेज की पाठ्य पुस्तकों में नहीं मिलता।
स्मारक में शहादत की दास्तां
भद्रकाली रोड स्थित शहीद स्मारक में जंगे आजादी की लड़ाई में जान देने वाले या बरसों बरस जेल की सलाखों के पीछे जिंदगी काटने वाले वीरों की प्रतिमाएं बनाई गई हैं। इसमें बहुत से जाबांज ऐसे हैं जिनको भुला दिया गया है। जिनके नाम लोगों को मुश्किल से याद हैं, उनकी शहादत की पूरी कहानी इस स्मारक स्थल पर लोगों को सुनाई जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर सोनी अपनी जमा पूंजी से शहीद स्मारक स्थल का निर्माण करने में करीब चार वर्ष से जुटे हुए हैं। इसका निर्माण बगैर सरकारी सहायता या जन सहयोग के कराया गया है। ऑडियो-विजुअल लाइब्रेरी का कार्य जल्दी ही शुरू होगा। एडवोकेट शंकर सोनी ने बताया कि करीब अस्सी लाख रुपए का यह प्रोजेक्ट है। युवा पीढ़ी आजादी के परवानों के संघर्ष को गहनता से रुचि के साथ जान सके, बस यही ख्वाहिश है।
अभिनंदन को आए संगठन
शहीद अशफाक उल्लाह के पौत्र अशफाक खान का अभिनंदन करने के लिए शहर के प्रमुख संगठन व संस्थाएं जुटी। एसकेडी विश्वविद्यालय, भटनेर किंग्स क्लब, भटनेर पोस्ट, भारत विकास परिषद नगर इकाई, केमिस्ट एसोसिएशन, गुरुद्वारा सिंह साहब कमेटी, श्रीनीलकंठ महादेव सेवा समिति, टाइम्स कॉलेज, मदान स्कूल, लायंस क्लब हनुमानगढ़, लोहिया स्कूल, उधम सिंह सेवा समिति, स्वामी सेवा समिति, रोटरी क्लब, भारत विकास परिषद भटनेर शाखा, लायंस क्लब डायमंड, पेस्टिसाइड यूनियन, फूडग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, अग्रोहा विकास ट्रस्ट, पारस हुंडई, ख्वाजा गरीब नवाज वेलफेयर सोसाइटी, भद्रकाली सेवा समिति आदि ने अभिनंदन किया।