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तस्वीरें खुद बयां करेगी हड़प्पाकालीन सभ्यता के बनने व मिटने की दास्तां

पुरुषोत्तम झा. हनुमानगढ़. विश्व-प्रसिद्ध कालीबंगा संग्रहालय देश ही नहीं विदेशी पर्यटकों को भी खूब लुभा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से अभी भी खुदाई कार्य जारी है।

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बार कोड स्कैन करते ही पर्यटक आने वाले दिनों में सुन व देख सकेंगे हड़प्पा कालीन सभ्यता की कहानी

बार कोड स्कैन करते ही पर्यटक आने वाले दिनों में सुन व देख सकेंगे हड़प्पा कालीन सभ्यता की कहानी

पुरुषोत्तम झा. हनुमानगढ़. विश्व-प्रसिद्ध कालीबंगा संग्रहालय देश ही नहीं विदेशी पर्यटकों को भी खूब लुभा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से अभी भी खुदाई कार्य जारी है। इसमें समय-समय पर कई दुर्लभ वस्तुएं मिल रही है। इसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि हनुमानगढ़ जिले का यह कालीबंगा क्षेत्र पांच हजार वर्ष पूर्व कितना खुशहाल रहा होगा। इस सभ्यता के बनने व मिटने की कहानी कैसी रही है, इसकी जानकारी पर्यटकों को आसानी से मिल सके, इसके लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई पहल करने जा रहा है। इसमें कालीबंगा संग्रहालय की हर गैलरी के प्रवेश द्वार पर बार कोड स्कैनर मशीनें लगाने की तैयारी की जा रही है।
एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें बार कोड स्केन करते ही फोटो गैलरी मोबाइल में खुल जाएगी। हर फोटो की कहानी बयां करने के लिए ऑडियो सिस्टम भी लगाया गया है। जो गैलरी की हर वस्तु के बारे में उपयोगी जानकारी देगी। उक्त नवाचार लागू होने पर यहां आने वाले पर्यटक हड़प्पाकालीन सभ्यता को बेहतर तरीके से जान सकेंगे। पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़े जानकार कहते हैं कि कालीबंगा का यह क्षेत्र हड़प्पन लोगों के व्यापार का भी प्रमुख केंद्र रहा है। नगर सभ्यता के लिहाज से यह अहम था। कृषि कार्य को लेकर भी यह क्षेत्र काफी चर्चित रहा है। फिर किसी प्राकृतिक आपदा के चलते पूरा का पूरा क्षेत्र ध्वस्त हो गया। करीब 65 बरसों से चल रहे उत्खनन कार्य के दौरान अब तक मिली करीब 1450 वस्तुओं को सहेज कर कालीबंगा संग्रहालय में लगाया गया है। जो इस बात को बताने के लिए काफी है कि जब दुनिया के लोग जंगलों में जीवन बसर करने को मजबूर थे, उस वक्त कालीबंगा के लोग कितने संपन्न और सभ्यता की दृष्टि से कितने आगे थे।

सात फुटी थे लोग
कालीबंगा संग्रहालय के एक कोने में करीब सात फुट के मनुष्य का कंकाल रखा गया है। उत्खनन स्थल पर जहां से कंकाल मिले हैं, वहां पर मिट्टी के कुछ बर्तन भी मिले हैं। जिस तरह से कंकाल निकले हैं, उसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि हड़प्पन लोगों की ऊंचाई करीब सात फुट औसत रही होगी। कालीबंगा संग्रहालय की गैलरी में हड़प्पाकालीन मृदभांडों व उनके अवशेषों, पक्की मिट्टी से बने खिलौनों, शतरंज व चौसर खेलने के पासों, पानी निकासी के लिए प्रयोग किए जाने वाली पाइपों, छोटे पक्षियों के शिकार के लिए काम में ली जाने वाली सीलिंग बॉल्स व पक्की मिटटी के बर्तन, अंत्येष्टि संस्कार प्रक्रिया में उपयोग होने वाले बर्तनों तथा उत्खनन से प्राप्त तांबा निर्मित उपकरणों को दर्शाया गया है।

सबके लिए 5 रुपए शुल्क
कालीबंगा संग्रहालय में कार्यरत पुरातत्व विभाग के चिन्ह्कार ईश्वराम के अनुसार संग्रहालय शुक्रवार को छोडकऱ पूरे सप्ताह पर्यटकों के लिए खुला रहता है। पर्यटकों की जानकारी के लिए गैलरियों में जगह-जगह पुरावशेषों के बारे में जानकारी लिखकर बोर्ड भी लगाए हुए हैं। संग्रहालय में भारतीय नागरिकों व अन्य देश के नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क पांच रुपए निर्धारित है। जबकि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रवेश नि:शुल्क है।

…..फैक्ट फाइल…..
-करीब 5000 वर्ष पुरानी मानी जाती है हड़प्पाकालीन सभ्यता।
-उत्खनन के दौरान मिली करीब 1450 वस्तुओं को कालीबंगा संग्रहालय में लगाया गया है।
-हड़प्पन लोगों की औसत ऊंचाई करीब 07 फुट होने का अनुमान लगाया गया है।
-कालीबंगा में स्थित तत्कालीन हड़प्पा नगर में करीब 10 हजार लोगों के जीवन-बसर करने की बात पुरातत्वविद कह रहे हैं।