मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी, इसकी वजह से महंगे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पौधे को नहीं हो रहे उपलब्ध
-कृषि विभाग किसानों को कर रहा है जागरूक
हनुमानगढ़. वर्तमान समय में जिले के खेतों में रबी फसलों की कटाई और थ्रेसिंग का कार्य चल रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार थ्रेसिंग उपरांत फसल अवशेष बहुत कम कीमत पर बेच दिया जाता है। वैसे भी कीटनाशी / खरपतवारनाशी रसायनों के उपयोग तथा उर्वरकों पर निर्भरता के कारण भूमि में न्यूनतम जैविक कार्बन 0.5 प्रतिशत की जगह औसत 0.2 प्रतिशत पाया जा रहा है। जैविक कार्बन की कमी के कारण महंगे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पौधे को उपलब्ध नहीं होते। जैविक कार्बन बाजार में नही मिलता लेकिन सभी फसलों के अवशेष अर्ताथ खेत में गिरे पौधे के प्रत्येक भाग, खरपतवार का खेत में सडऩे गलने से,फसलों के बदल – बदल कर बोने से, विभिन बेक्ट्रियल कल्चर के उपयोग से जैविक कार्बन के स्तर को सुरक्षित किया जा सकता है। कृषि विभाग के सहायक निदेशक बीआर बाकोलिया ने सभी कृषि अधिकारियों से निर्देशित किया है कि वह किसानों को इसके प्रति जागरूक करें। खेत में फसल अवशेष को भूमि में ही मिलाने की सलाह दें। ताकि मिट्टी की सेहत सुधर सके। इधर जिले में खरीफ सीजन के तहत बीटी कपास की बिजाई शुरू हो चुकी है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इस दौरान विभागीय अधिकारियों को शिकायत मिल रही है कि विभिन्न किस्मों का बीटी कपास का बीज उपलब्ध होते हुए भी बीज विक्रेताओं द्वारा कृषकों को उनकी मांग के अनुरूप कम्पनी विशेष की कुछ चुनिंदा किस्मों के बीज की मांग करने पर उनकी आवश्यकता के अनुरूप बीज नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद विभाग की ओर से निर्देश जारी किया है कि बीज का अब तक किए गए वितरण एवं वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक की सूचना बीज विक्रेता फर्मवार प्रस्तुत करेंगे।