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एक शताब्दी प्राचीन शिवालय में नित्य शिवभक्तों की गूंज

एक शताब्दी प्राचीन शिवालय में नित्य शिवभक्तों की गूंज अनूठे भक्त भोलेनाथ के, दो माह से नियमित कर रहे है नया श्रंगार

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Shiva devotees

एक शताब्दी प्राचीन शिवालय में नित्य शिवभक्तों की गूंज

हनुमानगढ़/संगरिया. श्रावण मास के अवसर पर क्षेत्र के शिवालयों में नियमित तौर पर शिवभक्तों का जोश देखते ही बनता है। इस बार श्रावण मास के मध्य पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) आने से यह श्रद्धा भाव दोगुना रंग लिए हुए है। सनातन धर्म में विक्रमी संवत के श्रावण मास को भगवान शिव की उपासना का माह माना जाता है। यह भगवान शिव का प्रिय माह भी है इसलिए इस अवसर पर भगवान शिव के पूजन का विशेष महत्व है। इसमें श्रद्धालुओं द्वारा शिवशंकर को प्रसन्न करने के लिए व्रत, उपवास, रुद्राभिषेक, आरती, शिवपुराण के माध्यम से उपासना की जाती है। वर्तमान में संगरिया के श्रीराम पंचायती मंदिर, हिसारिया धर्मशाला स्थित श्रीसीताराम मंदिर, वार्ड 1९ स्थित गोपाल सेवा सदन, श्रीदुर्गा पंचायती मंदिर, रामबाग, श्रीरामदेव मंदिर, सरस्वती माता मंदिर, पावर हाऊस कलोनी स्थित हनुमान मंदिर, भोमियाजी मंदिर, गीताभवन, ऋषि आश्रम मंदिर, श्रीबांके बिहारी मंदिर, गुरुनानक बस्ती स्थित गणेश मंदिर, शिवबाड़ी, कुटिया, 59 हैड स्थित त्रिदेव मंदिर, झूलेलाल मंदिर आदि प्रमुख मंदिरों में शिवालय बना हुआ है। यहां नियमित रुप से श्रद्धालू भगवान शिव की उपासना के लिए पहुंचते है। इन सबमें तीन मंदिर ऐसे है जो रियासतकालीन समय में स्थापित है व इन्हे बने हुए शताब्दी के करीब समय बीत चुका है। इनमें श्रीराम पंचायती मंदिर व हिसारिया धर्मशाला स्थित श्रीसीताराम मंदिर 1930 से पूर्व तथा वार्ड 1९ स्थित गोपाल सेवा सदन 1950 से पूर्व स्थापित किए हुए है। तीनों मंदिरों की स्थापना बीकानेर स्टेट की राज्यसभा के दो बार सदस्य रहे विद्वान पंडित रामचंद्र शास्त्री के द्वारा की गई। वे श्रीराम पंचायती मंदिर के पांच दशक से अधिक समय तक आचार्य भी रहे।


हिसारिया धर्मशाला का श्रीसीताराम मंदिर शिवालय

संगरिया की हिसारिया धर्मशाला के श्रीसीताराम मंदिर में शिवालय का निर्माण 1930 के करीब का है इसकी प्राण प्रतिष्ठा पंडित रामचंद्र शास्त्री द्वारा करवाई गई है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष श्रावण मास के अवसर पर प्रतिदिन संध्या के समय भगवान शिव का अभिषेक कर विशेष श्रंगार किया जाता है। पंडित लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया कि करीब दो दशक से अधिक समय से जारी इस परम्परा के तहत दिन में भगवान के लिए भांग को सूखे मेवे के साथ ***** कर लेप बनाया जाता है। भांग के जल के साथ भगवान का अभिषेक किया जाता है व भगवान को भांग का लेप कर विशेष श्रंगार किया जाता है। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए इसे करीब एक घंटे तक रात्रि को खुला रखा जाता है। शिवभक्तों का दल प्रतिदिन इसके विशेष मेहनत कर पूजन सामग्री, पुष्प, बेलपत्र, भांग, धतूरा, पत्ते आदि एकत्रित करते है व भगवान का नित्य अलग अलग श्रंगार कर भगवान शिव को रिझाते है। मंदिर में पारंपरिक फल फूल के श्रंगार के साथ साथ आधुनिक रुप से पैकिंग शीतल पेय, टॉफी, चॉकलेट से भी भगवान को रिझाने का प्रयास किया जाता है। मंदिर में स्वतंत्रता दिवस पर किया गया श्रंगार सोशल मीडिया पर छाया रहा। पंडित अनिल शर्मा, दिनेश शर्मा, सौरभ बंसल, नरोत्तम गर्ग, कैलाश मोदी, मोनू सेतिया, रोहित कोचर, अनिल बाघला, कपिल करवा, सतीश बजाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालू इस अवसर पर उपस्थित रहते है। मंदिर में इस अवसर पर भगवान शिव के रुद्राष्टक, शिवस्त्रोत, शिवाष्टक सहित अनेक मंत्रों व भजनों का जाप भी किया जाता है।