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भाखड़ा के किसानों का आंदोलन जारी, सबने वादा किया, निभाया किसी ने नहीं

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़.भाखड़ा क्षेत्र के किसानों का कलक्टे्रट के समक्ष पडाव मंगलवार को छठे दिन जारी रहा। किसानों ने अब आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। किसानों का आरोप है कि सरकार व प्रशासन ने पानी चलाने का वादा किया था, लेकिन किसी ने अब तक इसे निभाया नहीं है। इस वजह से खेत प्यासे हैं बीबीएमबी की बैठक में राजस्थान की भाखड़ा नहर के लिए 850 क्यूसेक शेयर निर्धारित किया गया है।  

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भाखड़ा के किसानों का आंदोलन जारी, सबने वादा किया, निभाया किसी ने नहीं

भाखड़ा के किसानों का आंदोलन जारी, सबने वादा किया, निभाया किसी ने नहीं

भाखड़ा के किसानों का आंदोलन जारी, सबने वादा किया, निभाया किसी ने नहीं

हनुमानगढ़.भाखड़ा क्षेत्र के किसानों का कलक्टे्रट के समक्ष पडाव मंगलवार को छठे दिन जारी रहा। किसानों ने अब आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। किसानों का आरोप है कि सरकार व प्रशासन ने पानी चलाने का वादा किया था, लेकिन किसी ने अब तक इसे निभाया नहीं है। इस वजह से खेत प्यासे हैं बीबीएमबी की बैठक में राजस्थान की भाखड़ा नहर के लिए 850 क्यूसेक शेयर निर्धारित किया गया है। इस समय वादे के मुताबिक नहर में विभागीय अधिकारी पानी नहीं चला पा रहे। इससे किसानों में रोष बढ़ रहा है। जिला परिषद सदस्य मनीष मक्कासर ने बताया कि राज्य सरकार को भाखड़ा नहर में जल्द पानी चलाने का प्रयास करना चाहिए। जिससे किसान कपास की बिजाई कर सकें। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान आंदोलन कर रहे हैं। पड़ाव स्थल पर ही किसान छह दिनों से भोजन-पानी कर रहे हैं। कलक्टर के बुलावे पर रविवार को किसानों व प्रशासनिक अधिकारियों की वार्ता भी हुई। इसमें किसान नेताओं ने दो टूक में भाखड़ा नहर में साढ़े बारह सौ क्यूसेक पानी चलाने की मांग रखी। किसानों के रोष को देखते हुए पड़ाव स्थल पर पुलिस का जाब्ता बढ़ाया गया है।

इस तरह बढ़े कपास के रेट
हनुमानगढ़ जिले में कपास की खेती किसानों के लिए कुछ मायने में फायदे का सौदा साबित हो रही है। वर्ष 2022 में कपास के रेट 12500 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। वर्ष 2023 में भी 9200 रुपए प्रति क्विंटल तक इसके भाव लगे हैं। कृषि उपज मंडी समिति हनुमानगढ़ के सचिव सीएल वर्मा बताते हैं कि बीते एक दशक की बात करें तो तीन बरसों से इसके रेट ठीक मिल रहे हैं। इससे पहले तक कपास के इतने अच्छे रेट नहीं रहे हैं। दो-तीन बरसों से अच्छे रेट मिलने की वजह से किसानों का रुझान कपास की बिजाई की तरफ लौटने लगा है। परंतु सिंचाई पानी के अभाव में किसान कपास की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं।

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