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पहले सम्मान के लिए किए जूते पॉलिश, अब राशि के भुगतान वास्ते कटोरा लेकर मांगनी पड़ी भीख

हनुमानगढ़. पहले तो सेवानिवृत्ति पर दिए जाने सम्मान पत्र को लेकर बैंक कार्यालय के समक्ष जूते पॉलिश किए। अब पीएफ राशि के पूर्ण ब्याज भुगतान की मांग को लेकर सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी ने बैंक के जंक्शन स्थित एजीएम कार्यालय के समक्ष कटोरा लेकर भीख मांगनी पड़ी।
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पहले सम्मान के लिए किए जूते पॉलिश, अब राशि के भुगतान वास्ते कटोरा लेकर मांगनी पड़ी भीख

पहले सम्मान के लिए किए जूते पॉलिश, अब राशि के भुगतान वास्ते कटोरा लेकर मांगनी पड़ी भीख

पहले सम्मान के लिए किए जूते पॉलिश, अब राशि के भुगतान वास्ते कटोरा लेकर मांगनी पड़ी भीख
- सेवानिवृत्त कर्मचारी की गांधीगिरी, बैंक प्रबंधन पर परेशान करने का लगाया आरोप
हनुमानगढ़. पहले तो सेवानिवृत्ति पर दिए जाने सम्मान पत्र को लेकर बैंक कार्यालय के समक्ष जूते पॉलिश किए। अब पीएफ राशि के पूर्ण ब्याज भुगतान की मांग को लेकर सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी ने बैंक के जंक्शन स्थित एजीएम कार्यालय के समक्ष कटोरा लेकर भीख मांगनी पड़ी। रिटायर्ड कर्मचारी जिनेन्द्र झांब गत वर्ष कई बार विभिन्न मांगों को लेकर एसबीआई की धानमंडी ब्रांच व एजीएम कार्यालय के सामने कई बार धरना दे चुके हैं। निरंतर संघर्ष के चलते उनको रुका हुआ भुगतान तथा सेवानिवृत्ति पर दिया जाने वाला सम्मान पत्र बैंक प्रबंधन ने दिया जो पहले उनको बिना किसी कारण के नहीं दिया गया था। जबकि उनका सेवाकाल बैंक के रेकॉर्ड में हमेशा बेदाग रहा। बस कुछ अफसरों से खटपट के कारण निजी रंजिश के चलते बैंककर्मी को परेशान किया गया।
जिनेन्द्र झांब ने बताया कि उन्होंने 22 फरवरी 1984 को बैंक जॉइन किया था। 22 फरवरी को 40 साल पूरे हो गए। उसे रिटायर्ड हुए पौने तीन साल का समय हो चुका है। तब वे धानमंडी ब्रांच में चीफ एसोसिएट थे। पिछले पौने तीन साल में उन्हें बार-बार छोटे-मोटे अधिकार प्राप्त करने के लिए बैंक शाखा के सामने धरने लगाने पड़े। जिन-जिन बातों के लिए उन्होंने धरने लगाए वह-वह बातें कानूनन ठीक थीं, इसलिए बैंक ने मानी भी। लेकिन अब यह जरूरी हो गया है कि अपनी कोई भी बात मनवानी है तो धरना लगाया जाए। झांब के अनुसार उनके रिटायरमेंट पर उनका पीएफ जो 26 लाख रुपए से अधिक था, तीन माह 17 दिन बाद उसे दिया गया। बैंक का लिखित नियम है कि एक-एक दिन का ब्याज दिया जाए। लेकिन उसे शून्य ब्याज दिया गया। साढ़े तीन माह का 26 लाख रुपए का ब्याज कम नहीं होता। जब उन्होंने लड़ाई लड़ी तो कम ब्याज दिया गया। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट का रूलिंग लगाया जो पीएसयू पर लागू होता है। स्टेट बैंक भी पीएसयू है। उस रूलिंग के हिसाब से पूरे ब्याज की मांग उनकी ओर से की जा रही है। बैंक प्रबंधन प्रोसेस में होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। झांब के अनुसार वे हार्ट पेशेंट हैं। उन्हें बार-बार अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए बैंक शाखा के सामने धरना लगाना पड़ता है। इससे उसके नियोक्ता बैंक की भी बेइज्जती होती है। उनके शरीर को भी दर्द होता है।

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