पशुपालकों को सरकार ने दी राहत तो अब यह अटका रहे रोड़ा
-पशु चिकित्सा संघ राजस्थान ने शुरू किया आंदोलन
-कामधेनु पशु बीमा योजना में पशुपालकों को 40-40 हजार रुपए का सहयोग देने की योजना
हनुमानगढ़. पशु चिकित्सा संघ राजस्थान ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। आक्रोशित पशु चिकित्सकों ने राज्य सरकार की ओर से पशु चिकित्सकों को एनपीए स्वीकृत नहीं करने के विरोध में कामधेनु बीमा योजना का बहिष्कार शुरू कर दिया है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही एनपीए स्वीकृत करने की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। जबकि देश के 17 राज्यों में यह स्वीकृत हो चुकी है। पूर्व में सीएम ने इस बारे में विचार करके निर्णय देने का आश्वासन दिया था। परंतु अब तक एनपीए को लेकर स्थिति साफ नहीं करने की वजह से पशु चिकित्सकों में रोष बढ़ रहा है।
अब सरकार पर दबाव बनाने को लेकर आंदोलन का रास्ता तैयार किया गया है। ताकि सरकार मांगों को लेकर गंभीर हो सके। जानकारी के अनुसार कामधेनु पशु बीमा योजना के तहत दो दुधारू पशुओं का बीमा करवाया जाएगा। इसमें प्रीमियम भी सरकार खुद भरेगी। पशु की मौत पर प्रति पशु चालीस हजार रुपए का सहयोग पशुपालक को दिया जाएगा। इस योजना में बीमा तभी होगा, जब पशु चिकित्सकों की ओर से संबंधित पशु पालक को प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इस शर्त की वजह से आगे कामधेनु पशुधन बीमा योजना के क्रियान्वयन में परेशानी आ सकती है। पशु चिकित्सक भी सीएम स्तर पर वार्ता करने की कोशिशें कर रहे हैं। ताकि शांतिपूर्ण तरीके से बेहतर रास्ता निकाला जा सके।
लम्पी से हुआ नुकसान
बीते दिनों लम्पी बीमारी से जिले में पशुधन को बड़ा नुकसान हुआ था। सर्वे के मुताबिक करीब तीन हजार पशुओं की मौत हुई। इसमें आधे पशु पालकों को ही अब तक चालीस-चालीस हजार रुपए की सहायता राशि मिल पाई है। बाकी परिवारों का सत्यापन होने पर उन्हें राहत राशि मिल सकेगी। पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. हरीश गुप्ता के अनुसार जिन पशुपालकों ने पंजीकरण करवा लिया है, उनका भौतिक सत्यापन होगा। नियमानुसार उन्हें सहायता राशि मिलेगी।
इसलिए कर रहे विरोध
पशु चिकित्सा संघ राजस्थान के जिलाध्यक्ष डॉ. महावीर सहारण के अनुसार छह सितम्बर 2023 को सीएम गहलोत ने प्रदेश में कामधेनु बीमा योजना शुरू की है। इसमें राज्य सरकार ने 750 करोड़ का प्रावधान रखा है। राज्य के 80 लाख पशुओं को इस मुफ्त बीमा योजना के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 1.10 करोड़ गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे। लेकिन पशु चिकित्सकों को नोन प्रेक्टिस अलाउंस (एनपीए) का लाभ नहीं देने की वजह से सभी आंदोलन कर रहे हैं। चिकित्सकों ने पशु बीमा योजना के साथ गोपालन विभाग के समस्त कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। वेटनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन तथा पशु चिकित्सक संघ की ओर से एक साथ कार्य बहिष्कार की घोषणा से पशुपालन विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें आ सकती है।