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हाथ में पॉलिसी पकड़ाकर बीमा क्लेम के लिए तरसा रही सरकार

पुरुषोत्तम झा. हनुमानगढ़. किसानों के दर्द को कम करने के लिए सरकार ने फसल बीमा योजना शुरू की। लेकिन यह योजना जमीन पर कंपनियों के भंवरजाल में उलझकर रह गई है। स्थिति यह है कि ओलावृष्टि व बेमौसम बरसात से हजारों हैक्टैयर में हर वर्ष फसल बर्बाद हो रही है। परंतु सरकार स्तर पर उक्त योजना की सही मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से फसल बीमा कंपनियां मनमानी कर रही है। हर वर्ष किसानों की ओर से हजारों पॉलिसियां करवाई जा रही है। इन बीमा पॉलिसियों, उनसे वसूल की जा रही प्रीमियम राशि और कपंनियों की ओर से जारी क्लेम रा

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हाथ में पॉलिसी पकड़ाकर बीमा क्लेम के लिए तरसा रही सरकार

हाथ में पॉलिसी पकड़ाकर बीमा क्लेम के लिए तरसा रही सरकार


-किसानों की आंख से निकल रहे आंसू, सिस्टम का नहीं पसीज रहा कलेजा
-प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खेत में खराबे के बाद क्लेम राशि लेने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे धरतीपुत्र

पुरुषोत्तम झा.
हनुमानगढ़. किसानों के दर्द को कम करने के लिए सरकार ने फसल बीमा योजना शुरू की। लेकिन यह योजना जमीन पर कंपनियों के भंवरजाल में उलझकर रह गई है। स्थिति यह है कि ओलावृष्टि व बेमौसम बरसात से हजारों हैक्टैयर में हर वर्ष फसल बर्बाद हो रही है। परंतु सरकार स्तर पर उक्त योजना की सही मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से फसल बीमा कंपनियां मनमानी कर रही है। हर वर्ष किसानों की ओर से हजारों पॉलिसियां करवाई जा रही है। इन बीमा पॉलिसियों, उनसे वसूल की जा रही प्रीमियम राशि और कपंनियों की ओर से जारी क्लेम राशि पर नजर दौड़ाएंगे तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आ रही है। जमीनी सच यह है कि बीमा कंपनियां टालमटोल की नीति को तवज्जो देकर मुनाफा कमा रही है। जबकि गरीब किसान अपने खेत में फसल खराब होने बाद भी क्लेम के लिए चक्करघिनी बना हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष खरीफ 2022 में जिले की 21 पटवार मंडलों तथा रबी 2022-23 में 59 पटवार मंडलों का सेटलमेंट अभी तक नहीं हुआ है। इससे हजारों किसानों के हाथ खाली हैं। वहीं बीते बरसों की बात करेंं तो हजारों बीमा पॉलिसियां ऐसी है, जिसमें छोटी-छोटी कमियों की वजह से उनका क्लेम रोका गया है। कृषि आयुक्त कार्यालय स्तर पर हजारों आवेदन लंबित हैं। परंतु किसानों को फूटी कौड़ी नहीं मिल रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में किसानों का कहना है कि यह किसानों को कम, बीमा कंपनियों को ज्यादा राहत प्रदान कर रही है। जबकि योजना का मकसद किसानों को राहत पहुंचाना था। कृषि विभाग हनुमानगढ़ के संयुक्त निदेशक रमेश चंद्र बराला के अनुसार जिले में करीब 80 पटवार मंडलों का सेटलमेंट बकाया चल रहा है। इन पटवार मंडलों के शत-प्रतिशत किसान अभी फसल बीमा क्लेम से वंचित हो रहे हैं। इस मामले में उच्च स्तर पर बैठक हो चुकी है। जल्द सकारात्मक निर्णय होने की उम्मीद है।

टालमटोल की नीति
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में कई तरह की दिक्कतें आ रही है। कुछ मामले ऐसे हैं जहां निस्तारण केवल आयुक्त कार्यालय स्तर पर होने होते हैं। अगर इन मामलों का निपटारा जिला कलक्टर स्तर पर होने लगे तो कुछ राहत मिल सकती है। अभी स्थिति यह है कि कंपनी की ओर से छोटी-छोटी कमियोंं का अड़ंग्गा लगाने पर इसका निस्तारण सीधे आयुक्त स्तर पर होता है। इस तरह बीमा कंपनियां टालमटोल की नीति का फायदा उठा रही है। देशभर में यही स्थिति देखने को मिल रही है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह सुंडा कहते हैं कि फसल बीमा योजना से किसानों को कम, बीमा कंपनियों को ज्यादा लाभ मिल रहा है। योजना के नियमों में कुछ संशोधन की जरूरत है। इस पर सरकार को सोचना चाहिए। बेहतर तो यह होता कि राज्य सरकार स्तर पर बीमा करवाने का कार्य करना चाहिए। जिसकी मॉनिटरिंग तहसील व जिला स्तर पर करने की व्यवस्था हो।

क्लेम से पहले खेत की ऑडिट
चालीस बीघे से अधिक क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों को क्लेम जारी करने से पहले उनके खेत की ऑडिट की जाती है। इसमें संबंधित किसान के भूमि के अलावा संबंधित फसल का भौतिक सत्यापन किया जाता है। बीमा पॉलिसी और मौके पर खेत व फसल में अंतर पाए जाने पर क्लेम को रोका जाता है। बीते बरसों में भी क्लेम रोकने के प्रकरण सामने आ चुके हैं। बीते रबी 2022-23 में 10 हेक्टैयर से अधिक भूमि की पॉलिसी की बीमा कंपनी ऑडिट करने के बाद ही क्लेम जारी करेगी।

......फैक्ट फाइल...
-हनुमानगढ़ जिले में रबी 2022-23 में कुल 25 लाख 14 हजार पॉलिसी धारकों से बीमा कंपनी ने 276 करोड़ का प्रीमियम वसूला था। जबकि 2 मार्च 2024 तक करीब 10 लाख पॉलिसी धारकों को 267 करोड़ का क्लेम जारी किया गया है।

-हनुमानगढ़ जिले मेंं खरीफ 2022 में 27 लाख 23 हजार फसल बीमा पॉलिसी हुई थी, इनमें बीमा कंपनी ने 214 करोड़ रुपए का प्रीमियम वसूल किया था। इसमें 2 मार्च 2024 तक 8 लाख 88 हजार पॉलिसी धारक किसान को 85 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम जारी किया गया है।

-हनुमानगढ़ जिले में रबी 2022-23 में 59 पटवार मंडल तथा खरीफ 2022 में 21 पटवार मंडलों का अभी तक बीमा कंपनी स्तर पर सेटलमेंट ही नहीं किया गया है। इससे शत-प्रतिशत बीमा क्लेम अटका हुआ है।

-हनुमानगढ़ जिले में रबी सीजन 23-24 में कुल छह लाख हेक्टैयर में फसलों की बिजाई हुई है। इन दिनों खराब मौसम से प्रभावित फसलों की सूचना किसानों को 72 घंटों में देनी होगी। तभी आगे क्लेम के हकदार होंगे।