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शहर को रिंग रोड की दरकार, अनुमान: 200 करोड़ की लागत से होगा भूमि अधिग्रहण 28 किमी सड़क का होगा निर्माण, 524 करोड़ के अनुमानित प्रोजेक्ट में दो नए आरओबी भी दिखेंगे।

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हनुमानगढ़. शहर को रिंग रोड की दरकार है। ट्रैफिक व्यवस्था से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार से रिंग रोड के निर्माण की मांग करते हुए बजट की डिमांड भेजी गई है। रिंग रोड की लंबाई का अनुमान 28 किमी निधार्रित किया गया है। हालांकि वस्तुस्थिति का ज्ञान, भूमि का सर्वे करने के बाद ही हो पाएगा। इस प्रोजेक्ट पर करीब 524 करोड़ की लागत का आंकलन किया गया है। इस रिंग रोड की सौगात जिला मुख्यालय को मिले, इसके लिए स्थानीय नेताओं ने राज्य सरकार से बजट देने की मांग की है। इस रिंग रोड के जरिए पंद्रह मिनट के अंतराल में नवां से कोहला, थेड़ी गगान होते हुए मक्कासर के दो केएनजे को छोड़ते हुए सूरतगढ़-श्रीगंगानगर बाइपास पर पहुंचा जा सकेगा। यानि की 15 मिनट के सफर में जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ के चारों तरफ चक्कर लगा सकेंगे। वर्तमान में गांव नवां से कोहला जाने के लिए शहरी क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन रिंग रोड का निर्माण होने के बाद शहरी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। हनुमानगढ़ में ऐसा होगा रिंग रोड रिंग रोड का निर्माण गांव नवां से शुरू किया जाएगा। यहां से सड़क गाहड़ू होते हुए भारत माला के साथ-साथ टिब्बी मार्ग पर पहुंचेगी। टिब्बी मार्ग को जोड़ते हुए गांव कोहला के पास पहुंचेगी और यहां से रिंग रोड़ थेड़ी गगान से निकलेगी। लेकिन श्रीनगर व दो केएनजे को छोड़ते हुए सूरतगढ़-श्रीगंगानगर बाइपास पर इस रिंग रोड का मिलान होगा। इस पर करीब 200 से 225 करोड़ की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। दो रेलवे ओवरब्रिज का भी होगा निर्माण इस रिंग रोड़ के दौरान घग्घर नदी पर दो जगह पुल का निर्माण भी किया जाएगा। इसके अलावा करीब 80 करोड़ की लागत से टिब्बी रेलवे लाइन व सूरतगढ़ रेलवे लाइन पर दो रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी इसी रिंग रोड के अंतर्गत करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 524 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। अगर राज्य सरकार इसके बजट की घोषणा करती है तो जिला मुख्यालय का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। इससे पूर्व मीठे पानी का 281 करोड़ का प्रोजेक्ट था, जो फेल हो चुका है। सर्वे कर डीपीआर होगी तैयार बजट की घोषणा के बाद भूमि का सर्वे किया जाएगा। इस सर्वे के दौरान भूमि अधिग्रहण के लिए चिन्हित की जाएगी। इसके बाद जिला प्रशासन के अधिकारी भूमि अधिग्रहण के दौरान किस आधार पर काश्तकारों को अवार्ड पारित करेंगे, यह तय करेंगे। भूमि अधिग्रहण के लिए कुल अनुमानित 524 करोड़ के बजट में से 200 करोड़ रुपए निधार्रित किए गए हैं। इसके पश्चात कंसलटेंसी कंपनी से डीपीआर तैयार करवाई जाएगी और रेलवे लाइनों पर आरओबी के निर्माण के लिए जीएडी तैयार कर रेलवे से अप्रूवल मांगी जाएगी। भूमि के दामों में बढ़ोतरी राज्य सरकार की ओर से घोषणा होने के पश्चात रिंग रोड के आसपास के भूमि के दामों में बढ़ोतरी होने की तो संभावना है। हालांकि काश्तकारों को वर्तमान बाजार के मुताबिक मुआवजा नहीं मिलने पर पूर्व में नेशनल हाइवे के दौरान किए गए आंदोलन की तर्ज पर किसान संगठन विरोध प्रदर्शन भी कर सकते हैं।