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इंदिरागांधी नहर में प्रवाहित पानी कितना प्रदूषित, जयपुर लैब में चलेगा पता

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़/टिब्बी. इंदिरा गांधी नहर की रीलाइनिंग कार्य के लिए चली साठ दिन की बंदी के बाद नहर में प्रवाहित हो रहे मटमैले रंग के पानी में अब सुधार होने लगा है। गुरुवार को नहर में हरे रंग का पानी प्रवाहित हो रहा था।  

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इंदिरागांधी नहर में प्रवाहित पानी कितना प्रदूषित, जयपुर लैब में चलेगा पता

इंदिरागांधी नहर में प्रवाहित पानी कितना प्रदूषित, जयपुर लैब में चलेगा पता

इंदिरागांधी नहर में प्रवाहित पानी कितना प्रदूषित, जयपुर लैब में चलेगा पता
-इंदिरा गांधी नहर के पानी में हुआ सुधार
हनुमानगढ़/टिब्बी. इंदिरा गांधी नहर की रीलाइनिंग कार्य के लिए चली साठ दिन की बंदी के बाद नहर में प्रवाहित हो रहे मटमैले रंग के पानी में अब सुधार होने लगा है। गुरुवार को नहर में हरे रंग का पानी प्रवाहित हो रहा था। जलदाय विभाग के अधिकारी हालांकि नहर के हरे रंग के पानी को पूर्णतया साफ मान रहे हंै। इसी दौरान पीएचईडी की टीम ने कुछ सेंपल लेकर जांच के लिए जयपुर भी भेजे हैं। केमिकल आदि की जांच स्थानीय स्तर पर विभागीय प्रयोगशाला में संभव नहीं है। इसलिए सेंपल को जांच के लिए जयपुर भिजवाया गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि इंदिरागांधी नहर में बीते दिनों प्रवाहित पानी कितना प्रदूषित था। इस बीच विभागीय अधिकारी शुक्रवार शाम तक इस पानी की रंगत में और सुधार होने की संभावना जता रहे हैं। नहर की मरम्मत के बाद 28 मई को इंदिरा गांधी नहर में पेयजल प्रवाहित किया गया था। बताया जा रहा है कि नहर में प्रवाहित किया पानी रसायनयुक्त व बदबूदार था। इस संबंध में जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता राजकपूर का कहना है कि फिलहाल नहर में हरे रंग का पानी प्रवाहित हो रहा है। अब हरिके से स्वच्छ पानी प्रवाहित होने के कारण शुक्रवार शाम तक मसीतांवाली हैड पर बिल्कुल साफ पानी आने की संभावना है। इंदिरा गांधी नहर बंदी के बाद नहर व इसकी वितरिकाओं में प्रवाहित हो रहे पानी को पेयजल के तौर पर वाटरवकर््स की डिग्गियों को भरे जाने के सवाल पर जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता कुलवंत सुथार का कहना है कि नहर में जब गंदा पानी बह रहा था तब डिग्गियों में पानी भरना बंद करवा दिया गया था। बाद में इंदिरा गांधी नहर व इसकी वितरिकाओं में पांच जगह सैम्पल लिए गए हैं। स्थानीय स्तर पर हुई जांच के बाद सैम्पल रिपोर्ट में नहर के पानी में घातक केमिकल नहीं पाए गए हैं। यह पानी पीने योग्य पाया गया है। इसके बाद डिग्गियों को 40 फीसदी तक भरा गया है। नहर में बिल्कुल साफ पानी आने के बाद डिग्गियों को पूरा भरवा दिया जाएगा।

डाला जा रहा अपशिष्ट
नहरबंदी समाप्त होने के बाद जून में इंदिरागांधी नहर में केमिकल युक्त पानी प्रवाहित होने के बाद राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार से पत्राचार कर प्रदूषित पानी को रोकने की मांग की। इसका असर अब नजर आने लगा है। पानी की गुणवत्ता में लगातार सुधार देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पंजाब क्षेत्र में सतलुज नदी में फैक्ट्रियों का अपशिष्ट डाला जा रहा है। नहरबंदी समाप्त होने पर जब पानी प्रवाहित किया जाता है तब जाकर इसका पता चलता है। रुटीन में बहने वाले पानी की तो चर्चा भी नहीं होती।

इन जिलों को पानी
राजस्थान की इंदिरागांधी नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर सहित राजस्थान के दस जिलों को पेयजल मिलता है। चार जून को संपन्न बीबीएमबी की बैठक में राजस्थान के लिए निर्धारित शेयर के अनुसार इंदिरागांधी नहर में पांच से दस जून तक ६००० क्यूसेक व 11 से ३० जून तक ४००० क्यूसेक पानी चलाने की स्वीकृति दी गई। इसी तरह भाखड़ा में १०००, गंगकैनाल में २००० व नोहर-सिद्धमुख परियोजना में ५०० क्यूसेक पानी चलेगा। जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ के एसई शिवचरण रैगर ने बताया कि इंदिरागांधी नहर में बीते दिनों प्रवाहित पानी का रंग कुछ अलग था। कुछ केमिकल भी इस पानी में मिला था। तत्काल पंजाब सरकार से संपर्क साधकर इस पानी का प्रवाह बंद करवाया गया। अब साफ पानी की आवक हो रही है।

...इंदिरागांधी नहर पर नजर.....
-राजस्थान क्षेत्र में इंदिरागांधी नहर की लंबाई ४४५ किमी है।
-डिजाइन के अनुसार इस नहर में पानी चलाने की क्षमता १८५०० क्यूसेक है।
-इस नहर से सहित प्रदेश के १० जिलों की प्यास बुझ रही है।
-1958 में इंदिरागांधी फीडर का निर्माण शुरू हुआ था।

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