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सरकारी स्कूल में पढऩे वाला आरबीआई में मैनेजर, अब बना आईएएस ऑफिसर

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सरकारी स्कूल में पढऩे वाला आरबीआई में मैनेजर, अब बना आईएएस ऑफिसर

सरकारी स्कूल में पढऩे वाला आरबीआई में मैनेजर, अब बना आईएएस ऑफिसर

सरकारी स्कूल में पढऩे वाला आरबीआई में मैनेजर, अब बना आईएएस ऑफिसर

हनुमानगढ़ के सिविल लाइन निवासी चंद्रशेखर मीणा ने हासिल की 655 रैंक
तीन बार लगातार किया प्रयास सफलता नहीं मिली, बदले विषय और बने आईएएस
हनुमानगढ़. कर्म तेरे हाथों में हैं..मन में आगे बढऩे की आस.. मेहनत से कभी पीछे न हटना खुद पर रखना विश्वास.....पूरे होंगे सपने फिर ही पूरी होगी सफलता की प्यास...बदल जाएगी जिंदगी तेरी तू आम से बन जाएगा खास... परिवार में न तो कोई आईएएस है और न ही आईपीएस, पर माता-पिता का सपना था हमारा चंद्रशेखर मीना बड़ा होकर आईएएस ऑफिसर बने। इस सपने को पूरा करने के लिए छह वर्ष नौ माह व बीस दिन- दिनरात मेहनत की और बन गया आईएएस। जंक्शन सिविल लाइन निवासी चंद्रशेखर मीना पुत्र शिवपाल मीना का आईएएस में चयन हुआ है। चंद्र शेखर ने चार प्रयासों के बाद पांचवी दफा में 655 रैंक पाकर अपना सपना साकार किया।
वर्तमान में चंद्रशेखर मुंबई आरबीआई में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। खास बात है कि अब तक तीन सरकारी नौकरी छोड़ चुके हैं। इसे पहले गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन व कोटा में एसबीआई बैंक में पीओ की नौकरी कर चुके हैं।
हालांकि इससे पहले उनका सीआरपीएफ में एस्टिेंट कमांडेंट पद पर भी चयन हुआ था। लेकिन पदभार ग्रहण नहीं किया। माता मन्नी देवी ने के अनुसार आरबीआई में नौकरी के बाद थकहारकर घर आता और चाय व नाश्ते के बाद आधा घंटा आराम कर पढऩे बैठ जाता। कई दफा पूरी रात ही जागता रहता तो कई दफा देर-रात तक पढ़ते-पढ़ते नींद आने से सुबह ऑफिस जाने के लिए उठाना पड़ता था। सुबह दस से शाम छह बजे की नौकरी करने के बावजूद रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करता था। आरबीआई में बड़े पद पर होने के बावजूद लक्ष्य को पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
छाई निराशा
बातचीत के दौरान चंद्रशेखर के माता-पिता ने बताया कि लगातार तीन बार के प्रयास के बाद चयन नहीं होने पर निराश हो गया था। लेकिन इसके बाद विषयों में बदलाव कर फिर से प्रयास किया तो पांचवी बार में चयन हो गया।
सरकारी स्कूल में पढ़ा
टिब्बी से सिलावा खुर्द में चंद्रशेखर आठवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ा। माता-पिता का सपना आईएएस बनाने का था तो इसे नौंवी में जंक्शन के एनपीएस स्कूल में दाखिला करवा दिया। हिन्दी से इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रवेश लेने के बाद काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पत्रिका की चंद्रशेखर से हुई बातचीत में बताया कि कक्षा के दौरान कई दफा तो समझ नहीं आता था कि अध्यापक क्या पढ़ा कर चले गए। घर पर सेल्फ स्टडी पर जोर दिया और दसवीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए। इसके पश्चात ग्यारहवीं में जंक्शन के गुरु हरकिशन स्कूल में दाखिला ले लिया। यहां से बारहवीं करने का बाद धनबाद से आईआईटी की और इसके बाद से एक-के बाद एक सरकारी नौकरी में चयन होता रहा।
बहन और माता ने दिया साथ
चंद्रशेखर ने बताया कि नौकरी करने के बाद रात को पढ़ते-पढ़ते नींद आना स्वाभाविक था। लेकिन मां और बहन रात दो बजे से पहले सोने नहीं देते थे। कई दफा बहन मुंह पर पानी के छीटें तक डाल देती थी। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनकी बहन से लड़ाई भी हो जाती थी। चंद्रशेखर मीना ने बताया कि दोनों भाई बहन आईएएस की तैयारी ऑनलाइन करते थे, सेल्फ स्टडी या छुट्टी के दिन टेस्ट सीरीज देने भी जाते थे। जानकारी के अनुसार ने इनकी बहन जोधपुर एमबीएम से आईआईटी की डिग्री हासिल कर चुकी है। वर्तमान में आईएएस की तैयारी में लगी है।