परम्परागत खेती छोड़ आधुनिक व आर्गेनिक खेती अपनाकर दो भाई हुए माला-माल
— फल-सब्जियों के साथ मत्स्य पालन, खेत में उगाया च्आगरा का पेठाज्
— खेती-किसानी में नवाचार पर सम्मानित
हनुमानगढ़ जिले की संगरिया तहसील में परम्परागत खेती छोडकऱ नाथवाना गांव के चक एक डीएलपी निवासी दो भाई अनुज पूनियां व कालूराम पूनियां फल सब्जियों के साथ मशहूर च्आगरा का पेठाज् तैयार करने के लिए सफेद पेठा उत्पादन जैसी आधुनिक खेती अपनाकर दूसरे किसानों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं। दोनों भाइयों ने पांच बीघा में करेला, तौरी, कद्दू, हरी मिर्च, घीया, तर, पेठा, खीरा, टिंडा, बैंगन, नींबू, देसी अंगूर, भिंडी, लौकी, टमाटर की सब्जियां तथा तरबूज, खजूर, खरबूजा, जुगुनी पेठा, ताईवान का पीला तरबूज, मक्का आदि उगाए हैं। इसी साल 15 मार्च को किसान मेला में प्रगतिशील किसान के तौर पर अनुज जिला कलक्टर से सम्मानित हुए। बारहमासी नींबू खेती वार्षिक पुरस्कार सहित इन्हें कई पुरस्कार व सम्मानपत्र मिले हैं।
किसान अनुज पूनियां के अनुसार परपंरागत गेहूं, कपास, सरसों की बजाए फल-सब्जियों के उत्पादन व बिक्री से दूसरे किसान प्रेरित होने लगे हैं। खेत में बनी डिग्गी मत्स्य पालन के काम ले रहे हैं। किसान भाई आरजे-31 नर्सरी नाम से अपनी ढाणी में वे लोग फल सब्जियां बाजार भाव से कम मूल्य में बेचते हैं। ताजा आर्गेनिक फल-सब्जियां हाथों-हाथ गांव शहर से लोग खुद आकर ले जाते हैं। प्रतिदिन 12-15 हजार रुपए बिक्री होती है। प्रति बीघा में 70 क्विंटल प्याज उत्पादन कर बीस रुपए प्रति किलो बेच मुनाफा कमाया। देसी अंगूर की बेल में फल लग चुके। खजूर सीजन में फिर से तैयार होगा। भारी-भरकम पेठा दिखाते हुए बताया कि मिक्सवेज बनाने में होटलों से काफी डिमांड है।
— आर्गेनिक खेती से बढ़ा उत्पादन
जमीन में प्लाऊ, दो ट्रेक्टर गोबर, केंचुआ खाद, निराई-गुडाई व सौर ऊर्जा संचालित टï्यूबवैल का जमीनी मीठा साफ-सुथरा पानी से बूंद-बूंद सिंचाई पद्धत्ति करते हुए बायोखाद उपयोग करते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति व पैदावार बढ़ती है। बिजाई के बाद प्लास्टिक शीट लगाते हैं। अच्छे किस्म बीज से उत्पादन जल्दी व अधिक मिल रहा है। इससे बेल पर जुड़वा फल उग रहे हैं। भारतीय अनुसंधान केंद्र नई दिल्ली व बीकानेर से ड्रिप इरिगेशन का प्रशिक्षण भी लिया है। सिंचाई जल परीक्षण कर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थाई नई दिल्ली ने अपनी रिपोर्ट में यहां की मिट्टी-पानी को फसलों के लिए उपयुक्त बताया है।
— मेहनत के साथ पांच गुणा मुनाफा
अनुज के अनुसार एक बीघा में गेहूं उगाने पर 30 हजार मिलते जबकि आधा बीघा में फल सब्जियों से 40-50 हजार की आमदन है। गेहूं उगाता तो दिनभर खाली रहता। फल सब्जियों के कारण पूरा दिन काम में जुटे हैं। हालांकि दूसरी फसलों से मेहनत ज्यादा है, पर मुनाफा भी पांच गुणा है। परिवार में उनकी पत्नी ऐकता, पिता मनीराम, भाई कालूराम, बेटा रोहित, प्रवीण व भीमसैन के अलावा 10-12 जनों को रोजगार दिया है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए फसल तुड़ाई कार्य महिलाओं को सौंपा। कालूराम पूनियां कहते हैं कि घर की खेती होने से परिवार को खाने के लिए ताजा फल-सब्जियां मिलती हैं। मक्का के दाने हमेशा छल्ली में बनते हैं पर इनके यहां सिट्टों पर भी दाने उगे। किसान यदि नवाचार करें तो हानि की संभावना कम है। सामाजिक प्रतिठा के साथ आय का साधन बढ़ता है।
— सफेद पेठा फसल से मिलेगा लाखों का फायदा
अनुज बताते हैं कि सफेद पेठा की खेती से किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। पेठे की फसल तीन महीने में तैयार हो जाती है। खर्च काफी कम है। प्रति एकड़ की बात करें तो डेढ़ से दो लाख आमदनी हो सकती है। पेठे का तीन महीने तक स्टॉक भी रख सकते हैं व मंडी में अच्छा भाव मिलने पर बेच सकते हैं। उन्होंने अपने खेत में सब्जी व फल के साथ सफलतापूर्वक पेठा खेती का नवाचार किया है। लखनऊ से बीज मंगवाया। दिसंबर 22 के प्रथम सप्ताह में बिजाई की। ड्रिप इरिगेशन के बाद बड़े आकार के फल उपजे। चार क्विंटल पेठा तीस रुपए प्रति किलो के भाव से बेच चुके। डेढ़ बीघा लंबी एक लाईन में करीब पांच क्विंटल के हिसाब से 30-40 क्विंटल ओर मिलेेगी।
— औषधीय गुणों से भरपूर है पेठा
सफेद पेठा वैसे तो मिठाई बनाने के काम आता है लेकिन औषधीय गुणों से भरपूर ज्यूस स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है। सफेद पेठा एक ऐसी सब्ज़ी है जो घर-घर में नहीं बनती लेकिन फायदे हजारों हैं। सुबह खाली पेट ज्यूस पीने से वजन कम होता है। शरीर डिटॉक्स होने से लेकर कई फायदे हैं। सफेद पेठा कैल्शियम, फॉस्फोरस, थियामिन व रिबोफ्लाविन जैसे विटामिन से भरपूर होता है, जो एनर्जी बढ़ाने के साथ थकान दूर करता है।