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सरकारी चाकरी से ज्यादा मजा तो बेरोजगारी में

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. दिन-रात सरकारी चाकरी के बावजूद अगर बैंक खाता बेरोजगारों से भी ज्यादा खाली हो तो इसे क्या कहिएगा। भारत निर्माण केन्द्रों की सुरक्षा में लगे प्रहरियों की हालत ऐसी ही है। उनसे ज्यादा मजे में तो बेरोजगार हैं जो उनके मानदेय से अधिक बेरोजगारी भत्ता पा रहे हैं। जहां बेरोजगारों को सरकार तीन से साढ़े तीन हजार रुपए भत्ता दे रही है, वहीं प्रहरियों को तीन हजार से भी कम मानदेय मिल रहा है।

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Rajiv Gandhi Services Centers' Name Change Expenses

सरकारी चाकरी से ज्यादा मजा तो बेरोजगारी में

सरकारी चाकरी से ज्यादा मजा तो बेरोजगारी में
- सेवा केन्द्रों के सुरक्षा प्रहरियों को दिन-रात सेवा के बावजूद बेरोजगारी भत्ते से भी कम मिल रहा मानदेय
- सेवा केन्द्रों के नाम बदलने पर खर्चा, मानदेय में वृद्धि पर नहीं
हनुमानगढ़. दिन-रात सरकारी चाकरी के बावजूद अगर बैंक खाता बेरोजगारों से भी ज्यादा खाली हो तो इसे क्या कहिएगा। भारत निर्माण केन्द्रों की सुरक्षा में लगे प्रहरियों की हालत ऐसी ही है। उनसे ज्यादा मजे में तो बेरोजगार हैं जो उनके मानदेय से अधिक बेरोजगारी भत्ता पा रहे हैं। जहां बेरोजगारों को सरकार तीन से साढ़े तीन हजार रुपए भत्ता दे रही है, वहीं प्रहरियों को तीन हजार से भी कम मानदेय मिल रहा है। प्रदेश में नौ हजार से अधिक सुरक्षा प्रहरी हैं जो भारत निर्माण राजीव गांधी सेवा केन्द्रों की सुरक्षा में पिछले पांच साल से अधिक समय से तैनात हैं। दिन में अफसरों की हाजिरी भरने और रात में सेवा केन्द्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के बाद भी उनके मानदेय में एक पैसे की बढ़ोतरी नहीं की गई है।
मजेदार यह है कि इस अवधि में राजीव गांधी से अटल और अटल से फिर राजीव गांधी नाम सेवा केन्द्रों का रख दिया गया है। इसमें भी सरकारों ने लाखों रुपए खर्च कर दिए। लेकिन प्रहरियों की पीड़ा की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। केन्द्र सरकार ने वर्ष 2012-13 में ग्राम पंचायतों तथा पंचायत समिति मुख्यालयों पर सेवा केन्द्रों की सुरक्षा के लिए आऊट सोर्सिंग बेसिस के आधार पर प्रहरी नियुक्ति कर उनका मासिक 3822 रुपए मानदेय तय किया। इस राशि में से एक हजार से पन्द्रह सौ रुपए तक संबंधित फर्म काट लेती है। कई बार इससे भी अधिक कटौती कर दी जाती है। ऐसे में प्रहरी के हाथ में मुश्किल से 2500 से 3000 रुपए आ पाते हैं। प्रतिवर्ष मानदेय में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी सरीखा नियम तो यहां लागू ही नहीं है।


भत्ते के लिए आ रहे खूब
राज्य सरकार नई बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत युवकों को तीन हजार तथा युवतियों व दिव्यांग बेरोजगारों को साढ़े तीन हजार रुपए भत्ता दे रही है। जिले में पिछले में माह तक 1230 बेरोजगारों को भत्ते का भुगतान किया जा चुका है। एक से दस जुलाई के बीच 1435 नए आवेदन भी जमा हो चुके हैं।


ड्यूटी दिन-रात, दिहाड़ी मजदूर
सेवा केंद्रों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को रात्रि में सुरक्षा के लिए तैनात किया हुआ है। मगर अधिकारी उनसे दिन में भी ड्यूटी करवाते हैं। मनरेगा में न्यूनतम मजदूरी 192 रुपए निर्धारित है। यदि सेवा केन्द्रों के सुरक्षाकर्मियों को पूरा मानदेय 3822 रुपए भी मिले तो केवल 127 रुपए ही प्रतिदिन मजदूरी होती है। एजेंसी के माध्यम से भुगतान होने के कारण हर बार इस राशि में कैंची चलती है। जिले की बात करें तो यहां सभी 251 सेवा केन्द्रों पर 21 मई 2013 से सुरक्षा प्रहरी नियुक्त हैं।


भिजवाई रिपोर्ट
सेवा केन्द्रों के सुरक्षाकर्मियों के मानदेय बढ़ोतरी को लेकर मुख्यालय स्तर पर निर्णय होगा। इस संबंध में स्थानीय स्तर पर सौंपे गए ज्ञापन वगैरह के आधार पर रिपोर्ट भिजवाई हुई है। भुगतान को लेकर नए निर्देश मुख्यालय जारी करेगा। - परशुराम धानका, सीईओ, जिला परिषद।


फैक्ट फाइल
प्रदेश में कुल सेवा केन्द्र : 9278
इनमें से पंचायत समिति मुख्यालय पर : 245
ग्राम पंचायतों पर कुल सेवा केन्द्र : 9000
जिला मुख्यालय पर जन सुविधा सेवा केन्द्र : 33
जिले में भत्ता प्राप्त बेरोजगार - 1230
जुलाई में आए नए आवेदन - 1435
सेवा केन्द्रों के प्रहरियों को मानदेय - 2500 से 3000
बेरोजगारों को मिल रहा भत्ता - 3000 से 3500