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अजब-गजब : दूसरे के कंधे पर इस तरह चलती थी बंदूक

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक फोटो वायरल हो रखा है और काफी पसंद भी किया जा रहा है। यह फोटो बड़ी सी बंदूक का है और इसको दो व्यक्तियों ने थाम रखा है।

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Jai Narayan Purohit

Sep 15, 2016

two with an old gun in Sangaria museum

two with an old gun in Sangaria museum

संगरिया में है दस से बारह फीट लंबी चार बंदूक

सोशल मीडिया पर फोटो हो रही वायरल

कृष्ण करवा. संगरिया. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक फोटो वायरल हो रखा है और इसको काफी पसंद भी किया जा रहा है। दरअसल, यह फोटो यह बड़ी सी बंदूक का है और इसको दो व्यक्तियों ने थाम रखा है। एक व्यक्ति ने बदूंक को कंधे पर रखा हुआ है जबकि दूसरा उसका ट्रिगर दबा रहा है। खास बात यह है कि इस फोटो को चर्चित जुमले दूसरे के कंधे पर बंदूक चलाने से जोड़ दिया गया है। तभी तो इस फोटो का शीर्षक 'दूसरे के कंधे पर इस तरह चलती है बंदूकÓ दिया गया है। बंदूक थामे व्यक्तियों के पहनावे से यह फोटो विदेशी प्रतीत होता है, लेकिन इसी तरह की बंदूक भारत में भी हैं। हनुमानगढ़ जिले के संगरिया कस्बे में ग्रामोत्थान विद्यापीठ परिसर स्थित सर छोटूराम कलात्मक संग्रहालय में भी इस तरह की बंदूकें हैं।

ऐसे होता था दूसरे का कंधा

सर छोटूराम कलात्मक संग्रहालय में सैकडों साल पुरानी चार ऐसी बंदूकें है, जिन्हें चलाने के लिए दूसरे के कंधे की आवश्यकता पड़ती थी। बताया जाता है कि इन बंदूकों की लंबाई अधिक होने के कारण युद्ध के दौरान इनको ईंटों व मिट्टी के बने ढांचे या स्वरूप (वर्तमान समय के बंकर समान) पर रखकर चलाया जाता था। इसके लिए किले की दीवारों पर बने झरोखों का भी उपयोग किया जाता था। इनके उपयोग करने के लिए विशेष रूप से धातु के स्टैण्ड भी बनाए जाते थे। दुश्मन के अचानक सामने आने या मौके पर स्टैण्ड की व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में एक योद्धा इसे चलाता था व दूसरा इसे अपने कंधे पर रखता था।

दस फीट से 12 फीट लंबी बंदूक

संग्रहालय में इस प्रकार की चार बंदूक हैं जो दस फीट से अधिक लंबाई की हैं। इनको लम-छड़ बंदूक भी कहा जाता था। इसमें एक बंदूक 12 फीट, एक साढ़े 11 फीट व दो दस-दस फीट के करीब है। इनका हत्था व आगे की नली विशेष धातु के बने हुए हैं। इनका वजन 25 से 35 किलाग्राम के मध्य है। प्रारंभ में मोटी नली वाली बंदूक चला करती थी बाद में नली की मोटाई कम होती गई।

पटियाला के महाराजा ने की थी भेंट

बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा ने बताया कि यह बंदूकें तत्कालीन पटियाला व पंजाबी यूनियन स्टेट (पेप्सू) के महाराजा द्वारा पंजाब दौरे पर गए शिक्षा संत स्वामी केशवानंद को संग्रहालय के लिए भेंट की थी। स्वामी केशवानंद को देश के विभिन्न स्थानों से प्राप्त उपहारों व कलाकृतियों को संजो कर कलात्मक संग्रहालय का रूप दिया है। इसमें बंदूकों के साथ भाला, तीर कमान, गदा आदि बहुत सी चीजें शामिल हैं। दुनिया भर की ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं को संजोकर रखने वाला यह संग्रहालय अपने अंदर काफी जानकारी समेटे हुए है।


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