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हनुमानगढ़ जिले के पल्लू क्षेत्र में पैंथर का हमला, एक व्यक्ति घायल

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. जिले में पल्लू क्षेत्र के गांव ढाणी लेघान की रोही में गुरुवार को पैंथर आ गया। इस दौरान पैंथर के हमले से एक जना गंभीर रूप से घायल हो गया।  

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हनुमानगढ़ जिले के पल्लू क्षेत्र में पैंथर का हमला, एक व्यक्ति घायल

हनुमानगढ़ जिले के पल्लू क्षेत्र में पैंथर का हमला, एक व्यक्ति घायल

हनुमानगढ़ जिले के पल्लू क्षेत्र में पैंथर का हमला, एक व्यक्ति घायल
-पूरे दिन भागदौड़ में व्यस्त रहा प्रशासनिक अमला, गांवों में करवाई मुनियादी
-पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण दिन भर रहा जयपुर की टीम का इंतजार
हनुमानगढ़. जिले में पल्लू क्षेत्र के गांव ढाणी लेघान की रोही में गुरुवार को पैंथर आ गया। इस दौरान पैंथर के हमले से एक जना गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसका उपचार चल रहा है। वहीं पैंथर के आने के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल बन गया। गुरुवार को दोपहर करीब सवा एक बजे वन विभाग के रेंजर रणवीर मील व पुलिस टीम ने पहुंच कर झाडिय़ों में छिपे हुए पैंथर के होने की पुष्टि की। इसके बाद उच्च अधिकारियों को सूचना देकर रेसक्यू टीम को अवगत करवाया। समाचार लिखे जाने तक जयपुर से रवाना हुई टीम मौके पर नहीं पहुंची थी। ग्रामीण व प्रशासनिक अधिकारी टीम के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इधर पैंथर देवासर के किसान कुरडाराम सिहाग के खेत में झाडिय़ों के बीच छिपा रहा।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के गांव ढाणी लेघान की रोही में गांव के पश्चिम दिशा की ओर एक खेत में विचरण करते हुए एक भारी भरकम जानवर को खेतों में काम कर रहे लीलगर व महेंद्र गुसांई ने देखा। प्रथम दृष्टया वो टाइगर जैसा लगा। इसके बाद उन्होने आसपास काम कर रहे किसानों व अन्य ग्रामीणों को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई और वो जानवर रास्ते के पास ही झाडिय़ों में औझल हो गया। ऐसे में ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग और पुलिस प्रशासन को सूचना दी। तथा झाडिय़ों के चारों ओर साधनों व ट्रैक्टरों से घेरा बनाकर उसको वहीं रोके रखा। दोपहर करीब सवा एक बजे पहुंची वन विभाग की टीम और पुलिस के जवानों ने सभी को सतर्क कर झाडिय़ों की ओर बढ़े तो वो वहां से भाग गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने पुष्टि करते अपने उच्च अधिकारियों को सूचना दी। हैड कांस्टेबल शिवभगवान ने बताया कि करीब चार-पांच फीट की हाइट का लंबा चौड़ा जानवर था जिसे वनविभाग की टीम ने अपनी पुस्तिका में मिलान करते हुए पैंथर बताया। वो वहां से भाग कर किसी दूसरे स्थान पर चला गया। ऐसे में सभी लोगों को सावधान करते हुए गांवों में मुनियादी करवाई तथा सतर्क रहने की सलाह दी।
एक जने पर टूट पड़ा पैंथर
झाडिय़ों से ओझल होने के बाद जब पुलिस व वन विभाग की टीम पैंथर के पद चिन्हें पर चल रहे थे। इसी दौरान कुछ किसान भी पैंथर के पद चिन्हों पर चलने लगे। तभी एक ढलान में स्थित झाड़ी में छिपे पैंथर को देखा गया। अचानक पैंथर ने एक किसान पर हमला बोल दिया। मगर गनीमत रही कि पैंथर ढलान में था। इससे वो पकड़ नहीं बना पाया और किसान उसके चंगुल से छूट गया। इससे एक बार मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पैंथर फिर दूसरी झडिय़ों में जाकर छिप गया। वहां मौजूद पुलिस के जवानों ने पैंथर के हमले से घायल हनुमान बेनीवाल निवासी केलनियां को अस्पताल पहुंचाया। जहां उसका उपचार चल रहा है।

मशीन नहीं आई काम
मौके पर हनुमानगढ़ से एडीएफओ राजीव गुप्ता व मोनिका रानी सहित वन विभाग का अन्य स्टॉफ भी पहुंचा। टीम के पास ट्रैंकुलाइजर गन थी। मगर कम अभ्यास के कारण करीब चार लाख रुपए की गन मशीन कोई काम ना आ सकी। मशीन गन खोलकर तैयार करने की कोशिश की मगर अनुभव के अभाव वो भी वापस पैक कर दी। गुप्ता ने बताया कि इस गन के साथ पर्याप्त उपकरण नहीं है और उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं होने के कारण इसका उपयोग नहीं कर सकते है। जयपुर की टीम का इंतजार करना होगा क्योंकि उनके साथ मेडिकल की पूरी टीम होती है। जो इसमें सक्षम है। इस दौरान थाना प्रभारी अमर सिंह, एएसआई जसवंत पूनियां, नायब तहसीलदार जगदीश मीणा, साहबराम भूकर सहित अन्य ग्रामीण मौजूद थे।

जानिए तेंदुए के बारे में
वन विभाग के रेंजर रणवीर मील ने बताया कि इस जानवर की पहचान पैंथर के रूप में हुई है। जिसका स्थानीय नाम बघेरा, दोगला एवं तेंदुआ भी है। इसकी लंबाई २०० से २५० सेमी तथा ऊंचाई ६० से ८० सेमी होती है। इसका वजन ५० से ७० किलोग्राम तक हो सकता है। यह जंगलों के बाहर व मानव बस्तियों के ईर्द गिर्द रहता है तथा गाय, बकरी, हरिण, कुत्ते, सुअर, मोर, भेड़ आदि का शिकार करता है। यह रात्रिचर जानवर है जो रात के समय ही अपना शिकार करता है। यह कई बार घातक सिद्ध हो सकता है।

पहले भी आने की सूचना
पल्लू क्षेत्र में पैंथर के आने के बाद आसपास के गांवों में भय का माहौल बना रहा। वहीं इससे पहले भी टिब्बी व हनुमानगढ़ के आसपास के क्षेत्र में छह-सात वर्ष पहले पैंथर आ चुका है। हलांकि उस समय पैंथर झाडिय़ों में इस तरह छिपा हुआ था कि उसे साफ तौर पर नहीं देखा जा सका था। बाद में पैंथर हरियाणा सीमा होते हुए आगे चला गया था।

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