
हनुमानगढ़ जिले के पीलीबंगा का चिकित्सालय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत चिकित्सकों के भरोसे
पीलीबंगा. कस्बे व आस पास के क्षेत्र में मलेरिया व डेंगू बुखार व जीका वायरस जैसी अन्य मौसमी बीमारियों ने दस्तक दे दी है। परन्तु मौसमी बिमारियों के ईलाज का जिम्मेदारी कस्बे के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कार्यरत महज तीन चिकित्सक पर ही है। इसमें से भी दो चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।
चिकित्सकों की कमी के चलते विभिन्न बीमारियों का ईलाज करवाने वाले प्रतिदिन करीब पांच सौ मरीजों को चिकित्सकों के अभाव में राज्य सरकार की अति महत्वकांक्षी निशुल्क दवा योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है । राजकीय चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को चिकित्सक नहीं होने के कारण मजबूरीवश निजी चिकित्सकों या झोलाछाप हकीमों के पास महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है ।
चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार पीलीबंगा के राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों के 7 पद स्वीकृत हैं, उनमें से छह पद लंबे समय से रिक्त है। एक स्थाई चिकित्सक के रूप में दंत चिकित्सक पद स्थापित है। इसके अलावा दो चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि चिकित्सालय में मरीजों की भीड़ का दबाव कम करने के लिए गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के इलाज करने की जिम्मेदारी भी दंत चिकित्सक को सौंप दी जाती है । दंत चिकित्सक को अन्य बिमारियों के ईलाज की जानकारी न होने से संबधित मरिजों का भी सरकारी हस्पताल से मोह भंग होने लग गया ।
आए दिन चिकित्सकों व नर्सिग स्टाफ से होता है झगड़ा
राजकीय चिकित्सालय में मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या के अनुपात में चिकित्सक नहीं होने के कारण मरीजों की देखभाल सही नहीं हो पाने से खफा मरीज के परिजनों द्वारा ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ से झगड़ा किया जाता है। जिससे अव्यवस्थाएं बढ़ जाती है । नागरिकों ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों के रिक्त पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए क्षेत्र की समाजसेवी संस्था, राजनीतिक व विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों की ओर से विधायक, चिकित्सा मंत्री तथा विभाग के उच्चाधिकारियों से लंबे समय से मांग की जा रही थी । परंतु चिकित्सकों की नियुक्ती नहीं होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं गड़बड़ाइ हुई है ।
हस्पताल के सुत्रों ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी के चलते ड्यूटी पर कार्यरत चिकित्सक द्वारा प्रतिदिन सड़क हादसों में पहुंचने वाले मामूली जख्मी मरीज को भी जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया जाता है । जिससे मामूली घायल मरीज को 25 किलोमीटर दूरी तय कर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय चिकित्सालय में इलाज करवाना पड़ता है । (नसं.)
राजकीय चिकित्सालय में स्थाई चिकित्सक महज डेंटल डॉक्टर ही है। इनके अलावा दो चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर हैं। राजकीय चिकित्सालय में प्रतिदिन साढ़े तीन सौ से चार सौ की ओपीडी है। - डॉ. मनोज अरोड़ा, प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय, पीलीबंगा
Published on:
06 Nov 2018 12:44 pm
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