सुसाइड नोट की सत्यता जांच में जुटी पुलिस, सूदखोरों से तंग युवक के आत्महत्या का मामला
– महिला सहित दो पर आत्महत्या दुष्प्रेरण का मामला दर्ज
– 72 घंटे बाद लिया था परिजनों ने शव, पुलिस ने दिया था आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी का आश्वासन
हनुमानगढ़. सूद और कर्ज से तंग होकर जोड़कियां निवासी युवक के नहर में कूदकर आत्महत्या मामले में जंक्शन थाना पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता जांचने में जुटी हुई। साथ ही नामजद आरोपियों से भी पूछताछ कर रही है। इस संबंध में मृतक के परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने एक महिला सहित दो जनों के खिलाफ आत्महत्या दुष्प्रेरण का मामला दर्ज किया था।परिजनों ने मृतक का लिखा सुसाइड नोट पुलिस को दिया है। इसमें जोड़किया निवासी एक महिला मेट व पुरुष के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का आरोप लगाया था।
मृतक के परिजनों, ग्रामीणों व विभिन्न संगठनों के लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर रविवार को जिला अस्पताल में धरना लगा दिया था। रविवार व सोमवार को पोस्टमार्टम कराने व शव लेने से इनकार कर दिया था। बाद में मंगलवार को पोस्टमार्टम तो करवा लिया गया। मगर परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी से पहले शव लेने से मना कर दिया। आखिरकार निरंतर समझाइश पर 72 घंटे बाद बुधवार को परिजनों ने शव लेकर दाह संस्कार कराया। युवक ने मोबाइल फोन से लिखित सुसाइड नोट वायरल किया था। इसमें कर्ज व ब्याज से तंग होकर आत्महत्या करने की बात सामने आई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि जब तक शव बरामद नहीं हुआ था तब तक पुलिस कहती रही कि थी कि जब तक शव बरामद नहीं होता और मुकदमा दर्ज नहीं करवाया जाता तब तक आगे की कार्रवाई नहीं की जा सकती। लेकिन शव बरामद होने व आत्महत्या दुष्प्रेरण का मुकदमा दर्ज करवाने के बाद भी पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है।
सूदखोरी ले बैठी जान
बृजलाल पुत्र अर्जुनलाल मेघवाल निवासी जोड़किया ने पुलिस को रिपोर्ट दी कि इंद्रसेन उर्फ बबलू (27) पुत्र लालचंद निवासी जोड़किया गुरुवार को घर से निकला था। उसकी बाइक व चप्पलें जेआरके नहर किनारे मिली थी। उसने नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। उसका शव शनिवार को जेआरके नहर में मिला। सूचना मिलने पर जंक्शन पुलिस पहुंची तथा शव को मोर्चरी में रखवा दिया। इंद्रसेन ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर शेयर किया था। इसमें लिखा था कि मैं अपनी मर्जी से जान दे रहा हूं। अपने माता-पिता को अब और कर्ज में नहीं डुबो सकता। विक्रम यादव और सावित्री मेट से क्रमश: 40 व 30 हजार रुपए ब्याज पर उधार लिए थे। पता नहीं उन दोनों ने कौनसा ब्याज लगाया कि 40 हजार रुपए छह लाख रुपए बना दिए। इसी तरह सावित्री ने 30 हजार रुपए के एक साल में ही 4 लाख रुपए बना दिए। इनका केवल ब्याज चुकाने के लिए कई ही लोन लेने पड़े। दोनों को 5 लाख रुपए चुकाने के बावजूद उनका ब्याज ही पूरा नहीं हो रहा है। अब और माता-पिता को कर्ज में नहीं डुबो सकता। सूदखोरों के परेशान करने की बात इन्द्रसेन ने परिजनों को आत्महत्या करने से दो दिन पहले बताई भी थी।