हनुमानगढ़ जिले में गुलाबी सुंडी से हुए खराबे की रिपोर्ट तैयार, जांच में पांच से 90 प्रतिशत नुकसान की पुष्टि
-कलक्ट्रेट के आगे किसानों ने डाला पड़ाव तो जिला प्रशासन ने दिखाई सक्रियता
हनुमानगढ़. कृषि वैज्ञानिक व अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गत दिनों जिले में करीब पचास खेतों में जाकर नरमा-कपास के नमूने संकलित थे। इसकी वैज्ञानिक स्तर पर जांच के बाद जिले में नरमा-कपास में गुलाबी सुंडी के असर से अलग-अलग स्थानों पर पांच से 90 प्रतिशत तक खराबे की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि विभागीय टीम ने इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर मंगलवार को जिला प्रशासन को सौंप दी। लेकिन किसानों के साथ हुई वार्ता में कलक्टर ने खराबे की स्थिति का खुलासा नहीं किया। किसान नेता ओम जांगू ने इस संबंध में खराबे की स्थिति को जानने का प्रयास किया तो कलक्टर ने बस इतना ही कहा कि खराबा हुआ है। वहीं खराबे को जांचने के लिए कृषि विभाग की ओर से गठित दल के सदस्यों के अनुसार विभागीय टीम की ओर से संकलित किए गए नमूनों की जांच के बाद इसकी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसमें जिले में गुलाबी सुंडी से नरमा-कपास की फसल में औसतन 42 प्रतिशत खराबा होने की बात सामने आई है। जबकि अलग-अलग खेतों में पांच से 90 प्रतिशत तक खराबा होने की पुष्टि हुई है।
जिले की स्थिति यह है कि वर्तमान में नरमा-कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप आने से फसल खराब हो गई है। इसकी खेती पर बड़ा पैसा करने के बाद अब किसानों के हाथ खाली होने से वह बेचैन हो रहे हैं। गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमा की फसल में हुए खराबे की विशेष गिरदावरी करवाकर प्रति बीघ 50 हजार रुपए मुआवजा देने की मांग को लेकर नरमा उत्पादक किसानों ने मंगलवार को पूर्व घोषणानुसार जिला कलक्ट्रेट के सामने पड़ाव डाल दिया। तब जाकर जिला प्रशासन के अफसरों की आंख खुली है। मंगलवार दोपहर में किसानों से हुई वार्ता के बाद शाम को कलक्ट्रेट कार्यालय में भू-अभिलेख शाखा प्रभारी व एसडीएम दिव्या कुमारी ने जिले के समस्त तहसीलदारों को इस संबंध में निर्देशित किया। इसमें नियमित गिरदावरी में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से नरमा व कपास (बीटी कॉटन) की फसल में हुए नुकसान का आंकलन/ सर्वे करते हुए वास्तविक नुकसान की सूचना तीन दिवस में भिजवाने को लेकर निर्देशित किया गया है।
इससे पहले संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले काफी संख्या में किसान सुबह ग्यारह बजे कलक्ट्रेट पहुंचे। पड़ाव स्थल हुई सभा में किसान नेताओं ने जिला प्रशासन पर किसान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। इस दौरान किसान प्रतिनिधियों ने ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर बेमियादी समय के लिए पड़ाव जारी रखने की चेतावनी दी। किसान नेताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि सरकार मांग अनसुना करती है तो किसान आगे संघर्ष की रणनीति अपनाएंगे। किसान नेता रेशमसिंह मानुका व चरणप्रीत सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन जल्द किसानों की मांग पर गौर करे। ऐसा नहीं करने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। वक्ताओं ने कहा कि यहां कीट वैज्ञानिक आए। उन्होंने सर्वे भी किया लेकिन किसानों के साथ रिपोर्ट सांझा नहीं की। इसी बीच बारिश और आंधी की वजह से शेष बची नरमा की फसल भी पूरी तरह खराब हो गई। ग्वार और मूंग की फसल भी प्रभावित हुई। संबंधित अधिकारियों से मूंग की खरीद को लेकर बात की गई तो उन्होंने बताया कि एक नवंबर से मूंग की सरकारी खरीद शुरू होगी। यानि अभी पूरा अक्टूबर माह पड़ा है। बारिश की वजह से मूंग की अधिकतर फसल बर्बाद हो चुकी है। जिन किसानों ने मूंग की फसल काट ली है, उनकी मजबूरी औने-पौने दामों में बाजार में बेचने के लिए जाने की है जबकि अधिकारी कह रहे हैं कि एक नवंबर से मूंग की खरीद शुरू की जाएगी। मूंग की फसल कटकर तैयार है और बाजार में पहुंच चुकी है। तब तक किसान अपने घर पर फसल नहीं रख सकता।