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पैसों के अभाव में फीकी ना पड़ जाए सुनहरे प्रोजेक्ट की चमक

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पैसों के अभाव में फीकी ना पड़ जाए सुनहरे प्रोजेक्ट की चमक


-बड़ोपल ढाब में बहुप्रतिक्षित सेम निवारण कार्य की जमीनी हकीकत
-राज्य सरकार बजट जारी करने में कर रही कंजूसी
हनुमानगढ़. सेम (जल प्लावन) के कारण बर्बाद हुए किसानों को आबाद करने के लिए भाजपा सरकार ने जून २०१७ में सुनहरा प्रोजेक्ट बनाकर काम शुरू करवाया था। इसके तहत जिले की बड़ोपल ढाब में पंपिंग स्टेशन बनाने का काम शुरू किया गया। लेकिन अब नई सरकार ने बजट जारी करने में रुचि नहीं दिखाई तो इस अहम प्रोजेक्ट का काम अधरझूल में लटक सकता है। इस तरह सेम निवारण को लेकर तैयार उक्त सुनहरे प्रोजेक्ट की चमक फीकी पडऩे की चिंता भी किसानों को सता रही है। प्रोजेक्ट के अनुसार पाइप लाइन बिछाने के साथ ही बड़ोपल ढाब में २३ करोड़ से पंपिंग स्टेशन, सम्पवैल का निर्माण होना था। इसके तहत तत्कालीन सरकार ने करीब १८ करोड़ की राशि जारी कर दी, यह राशि अब खत्म हो गई है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने करीब दो माह पहले शेष राशि का भुगतान करने को लेकर मुख्यालय को अवगत करवा दिया था। लेकिन सरकार स्तर पर अभी तक शेष बजट जारी करने को लेकर कोई हलचल नहीं होने के कारण इस प्रोजेक्ट के अधर झूल में लटकने की आशंका है।
हालांकि स्थानीय अधिकारी संबंधित निर्माण एजेंसी से संपर्क करके निर्माण जारी रखने का आग्रह कर रहे हैं। लेकिन बजट जारी नहीं होने पर संबंधित निर्माण एजेंसी कभी भी हाथ खड़े कर सकती है। जून २०१७ में शुरू किए गए सेम निवारण प्रोजेक्ट के तहत अप्रेल २०१९ तक पंपिंग स्टेशन का निर्माण पूर्ण कर सेम के पानी को पंपिंग कर घग्घर डिप्रेशन क्षेत्र में डालने का काम शुरू करने का लक्ष्य है। मगर हकीकत में निर्माण तभी पूरा होगा, जब सरकार शेष बजट जारी करेगी। जल संसाधन विभाग उत्तर संभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने बताया कि बजट की डिमांड सरकार को भेज रखी है। राशि मिलने का इंतजार है। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले के करीब ४० गांव सेम समस्या से प्रभावित हैं। प्रोजेक्ट के पूरा होने पर इन गांव के लोगों की जमीन खेती योग्य हो सकेगी। करीब चार दशक से किसान इस समस्या को झेल रहे हैं।


अप्रैल में ट्रायल प्रस्तावित
अभी तक सेम प्रोजेक्ट के तहत करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में १००० मिली मीटर क्षमता की पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है। सम्पवैल यानी जल संग्रहण के लिए बड़ी डिग्गी भी बना ली गई है। पैनल रूम का निर्माण जारी है। इसके बाद इंजन व पंप की आपूर्ति करवाकर इसे इंस्टॉल करने का कार्य शुरू किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत अप्रेल में ट्रायल होना है। मगर बजट की अड़चन दूर नहीं हुई तो प्रोजेक्ट पूरा होने में और वक्त लग सकता है। बड़ोपल ढाब में जल संग्रहण के लिए बड़ी डिग्गी बनाई गई है। यहां जमा पानी को पंप करके घग्घर डिप्रेशन एरिया में डालने का काम होगा। जिससे सेम प्रभावित भूमि को ऊपजाऊ बनाया जा सके।

फाइल पर जमी धूल
भूमि को सेम मुक्त बनाने को लेकर करीब तीन वर्ष पहले एक प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसमें जिले की पीलीबंगा, रावतसर तथा टिब्बी तहसील में हजारों हेक्टेयर में मौजूद सेमग्रस्त भूमि को खेती योग्य बनाने के लिए ड्रेन से पानी निकालकर नहरों में डालने के उपरांत करीब ३५०० से ५००० हेक्टेयर में पानी सूख गया। लेकिन इन मृदाओं में लवण इक्कठे होने से फसलें नहीं उगाई जा सकती। भूमि सुधार के दृष्टिगत कृषि विभाग ने करीब छह माह पहले ३५०० हेक्टेयर भूमि को खेती योग्य बनाने के लिए करीब ४७.८४५ करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बनाकर सरकार को भिजवाया था। इसमें सेम मुक्त हुए क्षेत्र में जेसीबी मशीन से ऐरो व सरकंडा निकालने, समतलीकरण, बालू रेत डालने, जुताई करवाकर भूमि को खेती योग्य बनाना था। इन कार्यो पर प्रति हेक्टेयर १३६७०० रुपए खर्च होने का अनुमान है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 50 प्रतिशत अनुदान किसानों को उपलब्ध करवाने के मकसद से यह प्रोजेक्ट सरकार को भिजवाया गया था। लेकिन अब तक इस फाइल पर धूल जमी हुई है।