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गांव की गलियों में बनी नालियां साफ करने में जुटे छात्र

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गांव की गलियों में बनी नालियां साफ करने में जुटे छात्र

छात्रों ने संभाला फावड़ा....

- बोले डेंगू के भय से घर से निकलना भी मुश्किल

पल्लू.( हनुमानगढ़ ) भले ही स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर पल्लू में डेंगू के प्रकोप को हल्के में ले रहे हो मगर वास्तविकता यही है इन दिनों पल्लू में डेंगू इस कदर फ़ैल रहा है कि लोग घरों में ही सुरक्षित समझने में असहज से हो रहे है। एक महिला व दुकानदार की डेंगू से हुई मौत के बाद कस्बा वासियों में भय का माहौल है।

वहीं चिकित्सा विभाग कस्बे में दुकानदार की मौत को पल्लू कस्बे का नहीं मान रहा। प्रकाशित खबरों पर चिकित्सा विभाग अपने कर्मचारियों को फोगिंग करने कस्बे में भेजता है जो मुख्य मार्गों पर खाना पूर्ति कर चले जाते है। जहां हर समय गलियों में कीचड़ पसरा रहता है वहां कर्मी पहुंचते ही नहीं।

वर्तमान में कस्बे में आलम ये है कि आधा दर्जन डेंगू के प्रकोप से जूझ रहे लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन है। किसी का बीकानेर ईलाज चल रहा है तो किसी का जिला अस्पताल में।

छात्रों ने उठाया बीड़ा

पल्लू में चिकित्सा विभाग, ग्राम पंचायत एवं प्रशासन के नाकाम प्रयासों के बाद कस्बे में पानी निकासी के लिए बनी गलियां कीचड़ से अटी पड़ी है। वहीं जगह-जगह कचरे के ढ़ेर लगे है। ग्रामीण ज्यादातर कस्बे में अव्यस्थित साफ-सफाई से परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि डेंगू जैसी घातक बिमारी का कारण कस्बे में पसरे कचरे से अटी नालियां है। । ऐसे में कस्बे के स्कूली छात्रों ने स्वयं प्रेरित होकर इस समस्या का समाधान किया।

कस्बें में पढऩे वाले छात्र शिशपाल, दीपक नाई, अभिषेक जोशी, प्रदीप पारीक, प्रहलाद सिंह भाटी, महेश, विनोद जाखड़, सु़निल जांगिड़ सहित करीब दो दर्जन छात्रों व युवाओं ने हाथ में फावड़ा थाम कर सड़क किनारे कीचड़ से अटी नालियां साफ करने में जुट गए है। वहीं गलियों में पसरे कीचड़ पर सुखी रेत डालकर सामान्य रास्ता करने में निस्वार्थ भाव से लगे है। वहीँ चिकित्सा विभाग ने छात्रों के इस कार्य से प्रभावित होकर फिनायल, केरोसीन तेल व उपयोगी दवाओं सहित मास्क दिए।

नगरपालिका जैसा कस्बा सफाई कर्मी नहीं

पल्लू उपतहसील १३ ग्राम पंचायतों के करीब ५० से अधिक गांवों का संगम है यहां क्षेत्र के सभी गांवों का आना जाना रहता है वहीं साल में दो बार भरने वाला मां ब्रह्माणी का विशाल मेला भी यहां विशेष महत्व रखता है। घनी आबादी का क्षेत्र होने के कारण यहां जरूरत नगरपालिका जैसी है मगर यहां पंचायत मुख्यालय होने के कारण एक भी सफाई कर्मी मौजूद नहीं है।

यहां साफ सफाई विशेष समय में पंचायत द्वारा करवाई जाती है लेकिन कस्बे में दैनिक सफाई नहीं होने के कारण ही गलियां कचरे से अट जाती है। घरों या दुकानों में सफाई करने के बाद कचरे को गलियों में ही फेंक दिया जाता है। ऐसे में कस्बे सफाई कर्मीयों की जरूरत मुख्य मुद्धा है। इस बारें में ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन को अवगत करवाया है
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पल्लू कस्बे में डेंगू का प्रकोप हावी है। इस कारण युवा छात्रों को प्रेरित कर यहां एक अभियान छेड़ा गया है। सफाई कर्मियों की स्थाई नियुक्ति यहां नहीं होने से सफाई व्यवस्था खराब है। मगर समय-समय पर सफाई पंचायत अपने स्तर पर भी करवाती है। - लेखराम भांभू, सरपंच ग्राम पंचासत पल्लू