
बाजार के मिजाज को समझकर सहकारी समितियों को तलाशने होंगे कारोबार के दूसरे रास्ते
बाजार के मिजाज को समझकर सहकारी समितियों को तलाशने होंगे कारोबार के दूसरे रास्ते
-ग्राम सेवा सहकारी समितियों को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने की योजना
-व्यवसाय विविधिकरण की सीख देने को लेकर पांच दिवसीय कार्यशाला का आगाज
हनुमानगढ. बाजार हर दिन बदल रहा है। ऐसे में बदलाव से कदमताल करना बेहद जरूरी है। तभी प्रतिस्पद्र्धा के दौर में सहकारी समितियां अच्छा कार्य कर सकेगी। इस तरह के विचार जंक्शन के कृषि विभाग कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने व्यक्त किए। टे्रनर दीपक नागर ने कहा कि गांवों में कच्चा माल बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापक तथा अध्यक्ष यदि व्यापारिक सोच को विकसित करके कारोबार करेंगे तो निश्चित तौर पर इनकी आय में बढ़ोतरी होगी। वित्तीय तौर पर मजबूती मिलने से समितियों का भविष्य उज्जवल बनेगा। इस मौके पर उन्होंने जिले में ग्राम सेवा सहकारी समिति के व्यवस्थापकों को फसली ऋण वितरण तथा खाद-बीज के अलावा अन्य कारोबार से जुडऩे की सलाह दी। मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों के समूह से जुडकऱ शहद आदि का कारोबार करने की सलाह दी। इसके अलावा पशु पालकों से जुडकऱ दुग्ध आधारित उत्पाद बनाकर इसके कारोबार से जुडऩे की बात कही। साथ ही गांवों में जन औषधि केंद्र खोलने की योजना के बारे में बताया। वक्ताओं ने कहा कि व्यवसाय विविधिकरण की सोच विकसित करने के लिए इस तरह की ट्रेनिंग हम दे रहे हैं। ताकि व्यवस्थापक व समिति के अध्यक्ष बाजारवाद की सोच को समझ सकें। ग्राम सेवा समिति की टीम को व्यवसायिक रूप से दक्ष बनाने का प्रयास है। इससे निश्चित तौर पर किसानों को भी लाभ मिलेगा। वक्ताओं का कहना था कि सहकारिता आंदोलन का आधार ग्राम सेवा सहकारी समितियां हैं। यहीं से सहकारिता आंदोलन का सपना शुरू होता है। आज सहकारिता आंदोलन के बल पर गांवों का स्वरूप काफी हद तक बदला है। इसलिए ग्राम सेवा सहकारी समितियों को वित्तीय तौर पर मजबूती प्रदान करने की सोच के साथ ऐसे आयोजन करवाए जा रहे हैं। अभी तक राजस्थान के अलवर, अजमेर, दौसा, सीकर, जयपुर में इस तरह की ट्रेनिंग करवाई जा चुकी है। अब हनुमानगढ़ में ट्रेनिंग दी जा रही है। ताकि ग्राम सेवा सहकारी समिति को वित्तीय तौर पर मजबूती प्रदान किया जा सके। इसके तहत नया कारोबार करने तथा नया उद्योग विकसित करने को लेकर डीपीआर कैसे बनाएं, ऋण प्राप्त करने के लिए किस तरह का माध्यम का उपयोग करें, बाजार के मिजाज को कैसे समझें। इस तरह की जानकारी समिति के व्यवस्थापकों व अध्यक्षों को ट्रेनिंग में दी जा रही है। ट्रेनर्स का कहना था कि समिति अध्यक्षों व व्यवस्थापकों को व्यापार के नए अवसर तलाशने होंगे। कृषि आधारित कारोबार में नुकसान की आशंका ज्यादा नहीं रहती। ऐसे में जमीनी सोच के साथ यदि समितियां कारोबार के अन्य रास्ते तलाशेगी तो इनकी आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत बनेगी।
नाबार्ड वित्त पोषित कार्यक्रम
ग्राम सेवा सहकारी समिति अध्यक्षों को विभागीय नियमों की जानकारी देने तथा सरकार की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने को लेकर 19 से 23 फरवरी तक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। नाबार्ड वित्त पोषित कार्यक्रम में अलवर सीसीबी तथा जयपुर मुख्यालय का अहम योगदान है। केंद्रीय सहकारी बैंक के एमडी मनोज कुमार मान ने बताया कि अध्यक्षों व्यवस्थापकों को सहकारिता नियमों की जानकारी देकर उन्हें कार्य के बारे में बताया जा रहा है। नीति व नियमों को समझाकर उन्हें बैंक की तर्ज पर कारोबार करने की सीख दी जा रही है। केंद्रीय सहकारी बैंक हनुमानगढ़ से 250 ग्राम सेवा सहकारी समितियां जुड़ी हुई है।
इतने किसान जुड़े हैं
जिले में संचालित करीब ढाई सौ ग्राम सेवा सहकारी समितियों के जरिए केंद्रीय सहकारी बैंक हनुमानगढ़ हर वर्ष करोड़ों का कारोबार करता है। बैंक की साख सीमा 1500 करोड़ निर्धारित की गई है। करीब एक लाख किसान इस बैंक से सीधे तौर पर जुड़े हुए हंैं। इनको बैंक की ओर से फसली ऋण वितरित किया जा रहा है। फसली ऋण वितरण के अनुपात में ग्राम सेवा सहकारी समितियों को कुछ कमीशन मिलता है। इसके अलावा खाद व बीज का कारोबार भी समितियां कर रही है।
Published on:
21 Feb 2024 11:16 am
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