
मसीतांवाली हैड से प्रदेश के बारह जिलों में प्रवाहित हो रहा पानी, सुरक्षा की दृष्टि से लगी रैलिंग हुई क्षतिग्रस्त
मसीतांवाली हैड से प्रदेश के बारह जिलों में प्रवाहित हो रहा पानी, सुरक्षा की दृष्टि से लगी रैलिंग हुई क्षतिग्रस्त
-विभागीय अधिकारियों की अनदेखी पर अब स्थाई लोक अदालत ने सुनाया फैसला
-छह महीने में लोहे की रैलिंग बदलने के साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का आदेश
हनुमानगढ़. राजस्थान की इंदिरागांधी नहर परियोजना की विभिन्न नहरों को मसीतांवाली हैड के जरिए पानी मिलता है। करीब साठ वर्ष पहले निर्मित उक्त हैड को इंदिरागांधी नहर के प्रवेश द्वार के नाम से भी जाना जाता है। लंबे समय तक रख-रखाव नहीं की वजह से प्रदेश की करीब बारह जिलों को जलापूर्ति करने वाली इस नहर के प्रमुख हैड की स्थिति वर्तमान में बदहाल हो गई है। सिंचाई परियोजना की दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण प्वाइंट होते हुए भी इसकी हालत सुधारने को लेकर सरकारी तंत्र गंभीर नहीं हो रहा है। इस मामले को एडवोकेट राजीव गिला व संदीप टक्कर की ओर से स्थाई लोक अदालत में रखने पर अब इस प्रकरण में फैसला सुनाया गया है। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने फैसला सुनाते हुए जिला कलक्टर हनुमानगढ़, इंदिरागांधी नहर परियोजना हनुमानगढ़ के अधीक्षण अभियंता व अधिशाषी अभियंता के नाम आदेश जारी कर छह माह के भीतर हैड की हालत सुधार कर इसकी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। आदेश में बताया है कि इंदिरागांधी नहर के मसीतांवाली हैड के नौरंगदेसर वितरिका और रावतसर वितरिका पर बने पुल पर दोनों ओर लगी लोहे की पुरानी व असुरक्षित हो चुकी है। इसकी रैलिंग को हटाकर उसके स्थान पर तकनीकी रूप से स्वीकृत सरंचना के अनुसार उचित व पर्याप्त ऊंचाई व मोटाई की मजबूत लोहे की रैलिंग लगाई जाए। साथ ही बताया है कि सुरक्षा की दृष्टि से इसे इस तरह लगाया जाए जिससे दुर्घटना की आशंका नहीं रहे। इसके अलावा उसे सड़क की ओर से लोहे की जाली लगाकर कवर करने का निर्देश भी दिया गया है। हैड के पास बने पुल के पश्चिमी व पूर्वी ओर स्थित सड़कों पर मोड़ से पूर्व दोनों तरफ इस आशय का संकेतक भी लगाया जाए। जिसमें उल्लेख हो कि आगे घुमावदार खतरनाक मोड़ है। नहर का पुल स्थित है, इसके अतिरिक्त मुख्य इंदिरागांधी नहर के पुल के पूर्वी तरफ जो स्मारिका लगी हुई है, उसे चारों ओर से इस प्रकार से कवर किया जाए कि आमजन वहां नहीं पहुंच सके। अप्रार्थी संख्या एक यानी कलक्टर को यह आदेश भी दिया गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि इंदिरागांधी नहर में बहाव के साथ कभी-कभी जो मानव व जानवरों के शव आते हैं, उनको नहर से निकालकर उनके संबंध में उचित कार्रवाई कर उनका सम्मानजनक तरीके से निस्तारण के इंतजाम भी करें।
उचित व्यक्ति की हो तैनाती
स्थाई लोक अदालत की ओर से जारी आदेश में व्यवस्था सुधार के साथ ही संबंधित अधिकारियों को इस बात के लिए भी पाबंद किया गया है कि लोहे की रैलिंग व सुरक्षा को लेकर समुचित प्रबंध करने के साथ ही उचित व्यक्ति की तैनाती भी करें। नवीन कार्यों की समय-समय पर देखरेख करने को लेकर भी संबंधित अधिकारियों को पाबंद किया गया है। ताकि भविष्य में हैड की स्थिति बदहाल नहीं हो सके।
1961 में हैड से पहली बार प्रवाहित हुआ था पानी
परिवादी की ओर से लोक अदालत में पेश परिवाद में बताया गया है कि इंदिरागांधी नहर परियोजना राज्य व देश की महत्वपूर्ण परियोजना है। इस नहर का प्रथम भाग राजस्थान फीडर कहलाता है। इस नहर में 11 अक्टूबर 1961 में मसीतांवाली हैड के मार्फत पानी प्रवाहित किया गया था। लंबे समय तक मरम्मत के अभाव में हैड के आसपास लगी लोहे की रैलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे दुर्घटना की आशंका रहती है। इसलिए पुल की रैलिंग की ऊंचाई उठाने की जरूरत है। करीब साठ वर्ष पहले बने हैड की हालत सुधारने को लेकर फरियाद लगाई गई है।
.....इंदिरागांधी नहर खास...............
-राजस्थान क्षेत्र में इंदिरागांधी नहर की लंबाई 445 किमी है।
-इस नहर से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू व नागौर सहित प्रदेश के बारह जिलों की प्यास बुझ रही है।
-1958 में इंदिरागांधी फीडर का निर्माण शुरू हुआ था।
-11 अक्टूबर 1961 में राजस्थान में पहली बार इंदिरागांधी नहर की नौरंगदेसर वितरिका में पानी प्रवाहित किया गया था।
-नहरी क्षेत्रों से राज्य में 5000-6000 करोड़ का उत्पादन हो रहा है।
.....वर्जन....
सुधार के लिए छह महीने का वक्त
राजस्थान की जीवनदायिनी के नाम से चर्चित इंदिरागांधी नहर के प्रमुख हैड मसीतांवाली की स्थिति बदहाल हो रही है। हैड पर सुरक्षा की दृष्टि से लगी लोहे की रैलिंग क्षतिग्रस्त हो गई है। इस मामले में सुधार के लिए हमने स्थाई लोक अदालत में परिवाद लगाया था। अब स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष ने इस मामले में फैसला सुनाकर संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था सुधार के लिए पाबंद किया है। इसके लिए छह माह का वक्त दिया गया है।
-राजीव गिला, एडवोकेट, हनुमानगढ़
Published on:
16 Sept 2022 09:39 am
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