
Dress changed in school only after one year of Carona, lower T-shirt made uniform
दुकान के नाम की स्लिप साथ में:
निजी स्कूलों में प्रवेश तय होते ही पालकों को स्लिप दी जाती है। इसमें ड्रेस व किताब की दुकानों का नाम व रेट लिखे होते हैं। सेंट मेरी की ड्रेस 3 दुकानों पर मिल रही है। लेकिन मोनोपॉली व कमीशनखोरी के चलते सभी ने एक जैसे रेट रखे हैं,जिससे पालक चाहकर भी अन्य विकल्प नहीं अपना सकता है। सेंट मेरी को एनसीईआरटी की किताबें न चलाने के कारण 3 माह पहले डीईओ ने नोटिस दिया। लेकिन बाद में विभाग व प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब फिर वहीं स्थिति है। खास बात यह है कि 10 वीं एनसीईआरटी की किताबें जरुर बच्चों के पास हैं,लेकिन शिक्षक निजी प्रकाशक की किताब में पढ़ा रहे हैं। बच्चे जब कहते हैं कि यह चैप्टर उनकी बुक में नहीं है तो शिक्षक उन्हें प्रताड़ित करते हैं। 15 तारीख को फीस जमा न करने पर लेट फीस के नोटिस पैरेटेंस को भेजे जा चुके हैं।
यूनिफार्म की परिभाषा ही बदल दी:
यूनिफार्म का अर्थ है एक समान। स्कूलों में सभी की ड्रेस एक जैसी रखने की शुुरुआत इसलिए हुई कि सभी बच्चे खुद को आपस में एक दूसरे के बराबर समझें। इससे उनके मन में अमीर-गरीब होने का भाव पैदा नहीं होगा। वे आपस में एक दूसरे से आसानी से घुल मिल कर अपने विचार साझा कर सकें। अब कमीशनखोरी के चक्कर में सभी निजी स्कूलों ने सप्ताह में 2 से 3 दिन और अलग अलग हाउस के नाम पर ड्रेस तय कर दी हैं। जिससे यूनिफार्म लागू करने का उददेश्य और इसकी परिभाषा ही बदल गई है।
-आरजी सातनकर,रिटायर शिक्षक
फ्री बंटने वाले लाेअर टी-शर्ट को बना दिया ड्रेस:
पुलिस,खेल व अन्य विभाग विभिन्न कार्यक्रमों में बच्चों व युवाओं को फ्री में टी शर्ट व लोअर स्पोटर्स किट के रुप में बांटते हैं। निजी स्कूलों ने अचानक इसे सप्ताह में दो दिन की ड्रेस बना दिया। तय दुकानों पर ये ड्रेस 1200 रुपए से बिक रही है,जिसमें क्वालिटी भी नहीं है। सनफ्लावर स्कूल में एलकेजी की किताबों का सेट 1411 रुपए का है। 210 रू.की किताब में 12 पेज हैं यानि औसतन 20 रुपए प्रति पेज कीमत है। 180 रु. कीमत की किताब में करीब 15 पेज हैं।किताबों के प्रिंट पर नई रेट स्लिप लगाकर सील लगाई है। राष्ट्रीय व राज्य बाल संरक्षण आयोग व शिक्षा मंत्री से शिकायत करेंगे।
-मनीष शर्मा,सामाजिक कार्यकर्ता
नहीं दे रहे एक-दो किताबें:
पालक प्रेम दुबे ने बताया कि प्रबंधन शिक्षकों के जरिए पूरी किताबें लाने का दबाव बना रहा है। किसी से पुरानी किताबें जुगाड़ की थी। दो किताबें स्कूल ने बदल दी। अब दुकानदार दो किताब नहीं दे रहे हैं। पूरा सेट लेने का दबाव बना रहा है। काॅपियां,कवर,स्टेपलर भी लेने की मजबूरी है। अन्य सामान न लेने पर वे कहते हैं कि अभी स्टॉक खत्म हो गया,जबकि पूरा सेट लेने वालों को गोदाम से निकालकर दे रहे हैं।
पालकों से लूट,अफसर मौन:
एड.एसपी शुक्ला ने कहा कि निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से बैग का वजन बढ़ गया है। पालक आर्थिक रुप से लुटे जा रहे हैं। बच्चों के कंधों में दर्द होने लगा है। उम्र व क्लास अनुसार बस्ते के बैग के लागू नियम का खुला उल्लंघन हो रहा है। अफसर मौन हैं। पालक बच्चों के भविष्य के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं।
इनका कहना है
अभी तक तो ऐसी कोई शिकायत नहीं आयी है। यदि कोई शिकायत आएगी तो जरुर कार्रवाई की जाएगी। अपने स्तर पर अधिकारियों से निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति पता करवाता हूं।
-एलएन प्रजापति,डीईओ,हरदा
Published on:
10 Jul 2023 08:55 pm
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