लोकरंग महोत्सव में गाए मीरा,रामदेव के भजन और गुरूवाणीआयोजन के दूसरे दिन अबगांव कलां में सजी समधुर शामहरदा। जिले में चल रहे तीन दिनी लोकरंग महोत्सव के दूसरे शनिवार को गायक कलाकारों ने ग्राम अबगांव कलां में कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।इसमें गायक कलाकारों ने रैदास,मीरा,रामदेव,कबीर के भजन और गजलें सुनाईं। सर्द बयार के बीच ठिठुरा देने वाली रात में गीत संगीत की महफिल में गायकों ने अपनी सुमधुर आवाज में एक से एक स्वर लहरियां बिखेरी। जिससे सुनने के लिए लंबे समय तक संगीत प्रेमी रसिक श्रोता डटे रहे।
---कला के मामले में समृद्ध अबगांव कलां में लोकरंग महात्सव की दूसरी शाम सजी। इसमेंअबगांव के मंडल के रेवाराम विश्वकर्मा, पूनम विश्नोई, सत्यनारण बागड़ी और उनकी टीम ने वादय यंत्रों की धुन और थाप पर गुरुवाणी के गायन से उत्सव का आगाज किया। इसके बाद गायकों ने मीरा और रामदेव महाराज के एक से एक कर्णप्रिय भजन सुनाए,जिसे सभी ने सराहा। भोपाल से आयी कलाकार सीमा बजाज ने अपनी प्रस्तुति में रैदास, कबीर भजन गुनगुनाए। इसके बाद उन्होंने प्रख्यात शायर दुष्यंत कुमार की गजलें तरन्नुम में गायी, जिसमें गरीब और शोषित वर्ग की स्थिति को बखूबी बयां किया गया।। रवि की खड़ताल ने सबका ध्यान अपनी ओर खिंचा। उज्जैन के तराना से आए कलाकार पुरूषोत्तम एवं साथियों ने कबीर की बातों को मालवी में संगीत के माध्यम से लोगो तक खूबसूरत ढंग से पहुंचाया।भारतीय प्रतिष्ठान संस्था भोपाल से आए सत्येंद्र पांडे ने कहा कि एक ही प्रकार की कला में इतनी सारी विविधता है,और उनसे परंपराएं बन जाती हैं। विविधता के सम्मान के लिए लोक कला की आवश्यकता हैं। आपसी बंधुता और समरसता के संदेश के साथ संस्था के रीतेश गोहिया ने सभी कलाकारों व सुधि श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता जताई। इसी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
हरदा। प्रस्तुति देते कलाकार।
हरदा। कार्यक्रम में मौजूद श्रोता।