
फोटो सोर्स- पत्रिका
Success Story: मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर...लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया। मजरूह सुल्तानपुरी की मशहूर लाइनें कीर्ति कलम पर बिल्कुल सटकी बैठती हैं। मध्यप्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी की बेटी कीर्ति ने अपनी कामयाबी से परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। पहले वह 12वीं में टॉपर और अब BSF की अफसर। जब वह ट्रेनिंग पूरी करके घर लौटी तो पूरे गांव ने धूमधाम से स्वागत किया।
बारजा गांव की रहने वाली कीर्ति कलम जब पहली बार बीएसएफ की ट्रेनिंग करके कीर्ति खाकी वर्दी में घर लौटीं तो बड़ी संख्या में ग्रामीण पांच किलोमीटर दूर टिमरनी रेलवे स्टेशन पहुंचे। स्टेशन पर फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया गया।
कीर्ति ने यह सिद्ध कर दिया कि कड़ी मेहनत, मजबूत इरादे और देश सेवा की जज्बा हो तो संसाधनों की कमी भी सफलता बाधा नहीं बन सकती है। ग्रामीण परिवेश, सीमित सुविधाएं और आर्थिक संघर्षों के बाबजूद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। जो क्षेत्र की बंटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। कीर्ति के पिता गांव में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी और सुविधाओं के बावजूद पिता भंवरसिंह कलम ने कीर्ति की शिक्षा और सपनों का पूरा समर्थन किया।
कीर्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। निरंतर मेहनत व अनुशासन के बल पर बीएसएफ में चयनित होकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, लक्ष्य के प्रति समर्पण और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बीएसएफ की ट्रेनिंग पूर्ण कर बुधवार को गांव लौटने पर कीर्ति का रेलवे स्टेशन पर स्वागत किया गया। इस दौरान अतुल बारंगे, उपेंद्र गद्रे, गौरव गद्रे आदि मौजूद रहे। पूर्व विधायक संजय शाह ने भी बारजा पहुंच कर कीर्ति का सम्मान किया।
Updated on:
05 Jan 2026 05:59 pm
Published on:
05 Jan 2026 05:26 pm
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