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MP पुलिस ने अपने घरों में चोरी करने वाले चोरों को मात्र 4 दिनों में ढ़ूंढ़ निकाला

- पुलिस के घरों में चोरी करने वालों पर हुई तीव्र कार्रवाई- इस चोरी से उठे थे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

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हरदा

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Deepesh Tiwari

Jan 31, 2023

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हरदा। मध्यप्रदेश में होने वाली चोरियों के मामले में जहां एक ओर पुलिस महीनों तक चोरों के बारे में कोई सुराग तक नहीं लगा पाती और तो और कई बार तो इन चोरियों से जुड़े मामलों पर कभी खुलासा ही नहीं हो पाता। वहीं पुलिस के घरों में होने वाली चोरी पर पुलिस तुरंत सक्रिय होकर चोरों को पकड़ लिया जाता है।

ऐसा ही एक मामला हरदा से सामने आया है जहां करीब 4 दिन पहले एक ही रात में चोरों ने पुलिस वालों के 12 घरों के निशाना बनाते हुए नेशनल हाइवे के किनारे बसी पुलिस लाइन में घरों से लाखों रूपए की नकदी व गहने चुरा लिए थे। पुलिस वालों के घरों में हुई इस चोरी के बाद तेजी से लिए गए एक्शन के चलते पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है। जिनसे पूछताछ की जा रही है, वहीं इस दौरान मौके पर एसपी ओर एएसपी भी पहुंच गए हैं।

ऐसे समझें मामला
ज्ञात हो कि एक डीएसपी सहित कुल 12 घरों में एक ही रात में हुई चोरी के बाद मौके पर एफएसएल की टीम व डॉग स्कवॉड भी पहुंची थी, जो जानकारी लेने के दौरान पिड़गांव के एक चने के खेत में जाकर रुक गए थे। पुलिस वालों के घरों में हुई इन चोरियों के बाद तमाम तरह के सवाल पैदा हो गए थे। यहां लोगों कहना था कि जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं तो ये हमें कैसे सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं।

वहीं पुलिस वालों के घरों में हुई चोरी के बाद पुलिस की गश्त और उनकी सक्रियता पर सवाल खड़े होने लगे थे जिस पर एसपी मनीष अग्रवाल ने कहा है कि जांच कर रहे हैं,किसी बाहरी चोर गिरोह का हाथ होने की आशंका है।

डीएसपी का घर भी नहीं छोड़ा था चोरों ने
दरअसल इंदौर रोड स्थित नई और पुरानी पुलिस लाइन में बारह पुलिसकर्मियों के घर 26 जनवरी को चोरी हुई थी। वहीं इसी रात अजाक्स थाने के डीएसपी एसएल सिसोदिया के घर भी चोरी हुई। एक ही मकान से करीब 5 से 6 लाख रुपए के जेवरात और नकदी रुपए चोरी हुए थे। वहीं पुरानी पुलिस लाइन में डीएसपी एसएल सिसोदिया, आरक्षक जितेंद्र राजपूत, ड्राइवर ओम राव व नई पुलिस लाइन मे क्षिप्रा ब्लाक में रवीश कामले, सपना चौहान, यशदीप पटेल, राहुल ठाकुर, वेतवा ब्लाक में उमेश पंवार, सिंध ब्लाक में सजन ठाकुर और ताप्ती ब्लाक में दुर्गेश पटेल, सुरेश बघेल, मयंक चौहान के घरों के ताले टूटे थे।

उठने लगे थे सवाल
एक ओर जहां पूरे शहर की सुरक्षा इन पुलिस के कर्मचारियों पर ही निर्भर है वहीं इस चोरी के बाद लोगों का कहना था कि पुलिस वालों के घरों में एक ही रात में चोरी होना साफ तौर पर पुलिस की निष्क्रियता को दर्शाता है। साथ ही इनके द्वारा की जाने वाली गश्त पर भी ऐसे में सवाल उठने लाजमी है? जानकारों का भी यह कहना था जब किसी शहर में पुलिस वालों के ही घर सुरक्षित न हो, तो वहां रहने वाले जो इनकी सुरक्षा में होते हैं वे कितने सुरक्षित हैं ये समझा ही जा सकता है?

वहीं अब ये कह रहे लोग
पुलिस वालों के घर में चोरी करने वालों की 4 दिनों में ही गिरफ्तारी अब कुछ ओर ही स्थिति पैदा कर रही है। लोगों का आरोप है कि जब हमारे घरों में चोरी होती है तो चोर पकड़े ही नहीं जाते या महीनों तक कोई सुराग ही नहीं लगता लेकिन पुलिस वालों के घर होने वाली चोरी में चोर कुछ ही दिनों में पकड़े जाते हैं, ऐसे में ये साफ दिखता है कि अन्य घरों में होने वाली चोरी में इनकी भी मिलीभगत होती है। जबकि इससे पहले लोग इसलिए खौफ में थे कि जब पुलिस वालों के घरों में तक चोरी हो सकती है तो हम कितने सुरक्षित हैं। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि पुलिस को ऐसी ही कार्रवाई दूसरों के घरों में होने वाली वारदातों के दौरान भी अपनानी होगी तभी वे आमजन का विश्वास जीत सकेंगे।

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