शिवलिंग की स्थापना के लिए परसाई जी ने ग्रावासियों को सभी बात बताई। इसके वाद गांव में ही एक छोटी सी कुटिया बनाकर इस शिवलिंग की स्थापना कर दी गई। सभी लोग पूजा करने लगे। 6 -7 माह के बाद अधिक बरसात होने पर यह मंदिर ढह गया। ग्रामीणों की मदद से मलबे से शिवलिंग को बाहर निकाला गया। इसके बाद मंदिर निर्माण के लिए सहयोग जुटाया गया। मंदिर के ऊपर विशाल गोल चक्र बनाए गए हैं। इसमें सीमेंट के स्थान पर अमाड़ी बीज, बील फल, अलसी का उपयोग किया गया। मंदिर का गुम्मद उसी घोल का बना हुआ है। यह मंदिर की सुंदरता को बढ़ाता है।