
ramlila
नवनीत द्विवेदी
हरदोर्ई. आप यह खबर पढकऱ थोड़ा सा चौंक सकते हैं। मगर यह बात है एक दम सच। जी हां हरदोई शहर में दीवाली के मौसम के बजाय होली के मौैसम में रामलीला का मंचन होता है। यह अलग बात है कि जिलेे के शाहाबाद सहित विभिन्न इलाकों में नवरात्रि से लेकर दीवाली तक रामलीला मंचन का आयोजन होता है। शाहाबाद तहसील मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर आयोजन होते हैं। मगर इस मामले में हरदोई शहर मेें आयोजन नहीं होते हैं।
वैसे तो हरदोई शहर मेेें करीब सौ वर्ष पुरानी श्रीराम लीला मेला प्रदर्शनी एवं कमेटी है और कमेटी के पास शहर में नुमाइश मैदान के रूप में भूमि का एलांटमेंट भी है। मगर रामलीला का आयोजन जनवरी माह सेे मार्च माह तक किया जाता हैै। कमेटी पिछले काफी समय से हर साल मकर सक्रांति के बाद नुमाइश मेले का आयोजन करती है जो कि होली तक चलता है इस दौरान रामलीला का भव्य आयोजन होता है। कवि सम्मेलन मुशायरे, दंगल भी होते हैैं। लोगों का कहना है कि हरदोई को हिरणाकश्यप और प्रहलाद की नगरी से जोड़ के देखा जाता है, शायद इसलिए यहां होली के मौसम में रामलीला का आयोजन होता है। वैसे भी ऐसा माना जाता है कि होली का पर्व होलिका माता यानी हिरणाकश्यप की बहन होरिका द्वारा प्रहलाद को आग के ढेर पर बैठकर जलाने के प्रयास की घटना की याद में होता हैै। हरदोई को लेकर तरह-तरह की किंवदंतियां हैं।
नवरात्र में इन प्रमुख मंदिरों पर लगता है भक्तों का जमाबड़ा
हरदोई शहर में बड़ा चौराहा के निकट स्थित माता शीतला देवी मंदिर, महोलिया शिवपार स्थित माता काली जी का मंदिर, सांडी रोड स्थित माता श्रवण देवी मंदिर, लखनऊ रोड स्थित माता जानकी राम मंदिर, नुमाइश चौराहा स्थित माता दुर्गा जी मंदिर
शाहाबाद स्थित माता संकटा देवी मंदिर, सांडी कस्बा स्थित माता मंगला देवी मंदिर हरदोई-सीतापुर की सीमा पर स्थित माता ललिता देवी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगती है।
शारदीय नवरात्र पर्व को लेकर जिले में उत्सव सा माहौल हैं। हर तरफ देवी मां के गुणगान के स्वर सुनाई पड़ रहे हंैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पर्व पर देवी भक्त सभी दुव्यर्सनों को छोडकऱ मां की आराधना में लीन हो रहे हैं। सभी लोग सुख समृद्घि की कामना के साथ देवी मंदिरों में मत्था टेक कर महामाई की पूजा अर्चना कर रहे हैं। घरों में कलश स्थापना के साथ पुरोहितों ने पूजन अर्चन संपन्न कराया।
दिन भर चले पूजन अर्चन
कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए आचार्य गण काफी व्यस्त रहे। बाजारों में पूजन सामग्री को लेकर खासी भीड़ रही और फलों के दाम काफी चढ़े रहे। लोगों ने उपवास रखकर मां की आराधना शुरू की। लोगों ने आस्था के इस पर्व पर हर तरफ खुशी और अमन चैन के लिए प्रार्थना की।
Published on:
21 Sept 2017 09:00 pm

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