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महामारी का दुष्प्रभाव : दुनियाभर में लगभग 50,000 बच्चों पर मौत का खतरा

एक नए अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना महामारी के चलते नियमित टीकाकरण में दिक्कतों की वजह से 2020 से 2030 के बीच दुनियाभर में लगभग 50,000 बच्चों की ज्यादा मौतें हो सकती हैं। यह शोध "द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ" जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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एक नए अध्ययन में बताया गया है कि कोरोना महामारी के चलते बच्चों के नियमित टीकाकरण में रूकावटों की वजह से 2020 से 2030 के बीच दुनियाभर में करीब 50,000 अतिरिक्त बच्चों की मौत हो सकती है। यह शोध "द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ" पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में कोविड-19 के कारण खसरा, रुबेला, ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी), हेपेटाइटिस बी, मेनिनजाइटिस ए और पीले बुखार के टीकाकरण पर पड़े असर का मूल्यांकन किया।

30,000 से अधिक अफ्रीका में बच्चों की मौत का अनुमान
अतिरिक्त मृत्यु दर में से 30,000 से अधिक अफ्रीका और लगभग 13,000 दक्षिण-पूर्व एशिया से होने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से खसरे के टीकाकरण में व्यवधान के कारण है। वैश्विक स्तर पर, खसरे के टीकाकरण में व्यवधान के कारण लगभग 44,500 से अधिक अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है।

अध्ययन के मुताबिक, नतीजे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रों में खासकर खसरे के लिए अतिरिक्त बोझ और रोकथाम के अवसरों को उजागर करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के दल ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2023 और 2030 के बीच विशेष प्रयासों से लगभग 80 प्रतिशत अतिरिक्त मौतों को रोका जा सकता है।

अध्ययन के लेखकों ने कहा, "टीकाकरण के प्रभाव और अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए रणनीतियों के लिए ये अनुमान कोविड-19 महामारी से संबंधित कवरेज व्यवधान के प्रभावों के बारे में सबसे पहले हैं।

वैज्ञानिकों ने वैक्सीन इम्पैक्ट मॉडलिंग कंसोर्टियम के मॉडलिंग समूहों का इस्तेमाल किया जो 112 निम्न और मध्यम आय वाले देशों से हैं, ताकि 14 बीमारी पैदा करने वाले रोगाणुओं के लिए टीका के प्रभाव का अनुमान लगाया जा सके।

कंसोर्टियम अपनी वेबसाइट के अनुसार, इंपीरियल कॉलेज, यूके से संचालित होता है और दुनिया भर में टीकाकरण कार्यक्रमों के प्रभाव का अनुमान लगाने के लिए शोध समूहों के साथ समन्वय करता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अध्ययन के नतीजे प्रभावित टीका समूहों के लिए समय पर टीकाकरण गतिविधियों और हस्तक्षेपों के महत्व पर बल देते हैं।

उन्होंने "निरंतर वैश्विक, ठोस प्रयासों" और "मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता" का भी आह्वान किया, जो मौजूदा चुनौतियों से पार पाने और स्वास्थ्य सेवा की लचीलापन बढ़ाने के लिए आवश्यक होंगे।

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