
आयुर्वेद के अनुसार देसी बबूल के पंचतत्त्व (बीज, फली, पत्ते, फूल और गोंद) रोगों को दूर करने में अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल में लिए जाते हैं।
भारत में बबूल को कीकर के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर इसकी मुलायम टहनियों को दातुन बना कर प्रयोग में लेते हैं। इसके कई अन्य फायदे भी हैं। आयुर्वेद के अनुसार देसी बबूल के पंचतत्त्व (बीज, फली, पत्ते, फूल और गोंद) रोगों को दूर करने में अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल में लिए जाते हैं। ये तासीर में गर्म और स्वाद में कसैला होता है।
खांसी, खूनी दस्त, फोड़े-फुंसी में भी फायदेमंद
10 ग्राम बबूल की कोपलें, 10 ग्राम गोखरू को दरदरा कर आधा लीटर पानी में भिगो लें। सुबह इसे हाथों से मलने के बाद छानकर पी लें। यूरिन में जलन, रक्त की शुद्धि के अलावा फोड़े-फुंसी, एग्जिमा जैसे त्वचा रोगों में यह लाभदायक है।
नजला-खांसी : १० ग्राम गोंद को चूसने से राहत मिलेगी।
पेचिस व खूनी दस्त: 5 ग्राम इसके गोंद को आधा गिलास बकरी के दूध या सादा पानी से सुबह-शाम लेने से जल्द आराम मिलता है।
मुंह के छाले : बबूल के एक ग्राम फूलों के चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में २-३ बार मुंह के छालों पर लगाएं।
पायरिया व मुंह की बदबू: इसकी कोमल टहनी की दातून दांतों को मजबूत रखती है। साथ ही पायरिया, मुंह से बदबू की समस्या भी दूर होती है।
पीलिया : इसके फूलों के चूर्ण में मिश्री के पाउडर को बराबर मात्रा में मिलाएं। 5 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार पानी से लें।
तलवों में जलन:१०० ग्राम सूखे पत्तों के चूर्ण में बराबर मात्रा में पिसी मिश्री मिलाएं व पानी से आधा चम्मच सुबह-शाम लें। बबूल के अन्य फायदे
पुरुषों में शीघ्रपतन की समस्या दूर करने के लिए बिना बीज वाली बबूल कि कच्ची फलियाँ, बबूल की पत्तियां और बबूल का गोंद तीनों को बराबर मात्रा में लेकर सुखा लें, सूखने पर कूट पीसकर महीन कपडे़ से छान लें और इसके बराबर वजन की मिश्री मिला कर और दोबारा तीन बार कपड़े से छान लें, इस चूर्ण को कांच की शीशी में रख लें और रोज सुबह और रात में सोते समय एक-एक चम्मच गर्म दूध के साथ तीन महीने तक सेवन करें। शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
Published on:
29 Aug 2017 06:43 pm
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