
एमियोट्रोफिक लैटरल स्लेरोसिस (ALS) का अब हो सकता है सरल ब्लड टेस्ट के ज़रिए निदान
एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस दिमाग की नसों की एक ऐसी बीमारी है जिससेमस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान होने लगता है, इसकी वजह से मांसपेशियों पर नियंत्रण धीरे-धीरे कम होने लगता है।
आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कैसे अब इस बीमारी का परीक्षण मात्र एक खून जांच के द्वारा किया जा सकता है । इससे पहले ऐसा पॉसिबल नहीं था । परंतु हाल ही में हुए शोध में यह बात सामने आई है कि अब ALS का पता खून जांच के बाद होने वाले परीक्षण से किया जा सकता है। जिस कारण से इसका इलाज करना भी अब आसन होता जा रहा है।
इस बिमारी में आपके शरीर में कुछ ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। साथ ही इस बीमारी से ग्रस्त हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सा न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिका) प्रभावित हुआ है। इस बीमारी के संकेतों और लक्षणों में शामिल हो सकते हैं -
1.दैनिक कार्यों को सामान्य रूप से करने में या चलने में कठिनाई
2.लड़खड़ाना और गिरना
3.टांग, पैर या टखनों में कमजोरी
4.हाथ में कमजोरी या अकड़न होना
बीमारी के कारण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं।
अनुवानसिक — एएलएस से ग्रसित लगभग 10 प्रतिशत मामले जेनेटिक हो सकते हैं। मतलब कि यह समस्या परिवार के अन्य सदस्यों में भी आ सकती है। जेनेटिक रूप से एएलएस वाले मामलों में इस बीमारी के पारित होने का जोखिम 50 फीसदी होता है।
उम्र — एएलएस का जोखिम आयु के साथ बढ़ता जाता है और 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में यह बीमारी सबसे ज्यादा होती है।
जेंडर— 65 वर्ष की आयु से पहले यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करती है। हालांकि, यह जेंडर अंतर 70 वर्ष की आयु के बाद गायब हो जाता है।
Updated on:
31 Jan 2022 11:47 am
Published on:
31 Jan 2022 11:44 am
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
