30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बैरिएट्रिक सर्जन्स ने केंद्र सरकार से की मोटापे को बीमारी घोषित करने की मांग

एक श्वेत पत्र एवं अपील पत्र सौंप कर मोटापे को बीमारी एवं गैर कास्मेटिक समस्या घोषित करने की मांग की गई...

2 min read
Google source verification

image

Dilip Chaturvedi

Mar 23, 2018

obesity

obesity

बैरिएट्रिक सर्जरी को हेल्थ बीमा के दायरे में लाने के लिए दुनिया भर के 100 से भी ज्यादा बैरिएट्रिक सर्जन भारत में तीन दिवसीय बैठक में केंद्र सरकार से मोटापे को बीमारी व गैर-कास्मेटिक समस्या घोषित करने की मांग करेंगे। नई दिल्ली में 22 मार्च से शुरू हुए पहले विश्व बैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी मानकीकरण सहमति बैठक (डब्ल्यूसीएम-बीएमएसएस) में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने शिरकत की। इस बैठक के दौरान सर्जन केंद्रीय मंत्री को एक श्वेत पत्र एवं अपील पत्र सौंप कर उनसे मोटापे को बीमारी एवं गैर कास्मेटिक समस्या घोषित करने की मांग की गई।

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहित भंडारी ने कहा, "बैरिएट्रिक सर्जरी के बारे में एक खास तरह की भ्रांति कायम है और इस भ्रांति के कारण ज्यादातर सरकारी संस्थाएं मोटापा घटाने के लिए की जाने वाली बैरिएट्रिक सर्जरी को स्मेटिक सर्जरी मानती हैं। हालांकि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने बैरिएट्रिक सर्जरी को सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के तहत की जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया माना है और इसलिए ऐसी सर्जरी पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति बीमा कंपनियों द्वारा की जानी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने भी बैरिएट्रिक एवं मेटाबोलिक सर्जरी पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति करना शुरू कर दिया है और लेकिन ज्यादातर बीमा कंपनियां ऐसी सर्जरी की प्रतिपूर्ति नहीं करती है और इसलिए देशभर में इस बारे में एकसमान बीमा नियम बनाए जाने की जरूरत है। " ओबेसिटी सर्जरी सोसायटी आफ इंडिया (ओएसएसआई) के अध्यक्ष डॉ. अरुण प्रसाद ने कहा कि मोटापा होने तथा भारत में टाइप 2 मधुमेह के संकट को नए सिरे से समझने की जरूरत है। दुनिया में मोटापे की समस्या के मामले में भारत चीन और अमरीका के बाद तीसरे नंबर पर है।

उन्होंने कहा, "भारत में मोटापे की समस्या के समाधान के रास्ते में सबसे प्रमुख चुनौती मोटापे के कारणों, मोटापे के वैज्ञानिक उपचार, बढ़ रहे टाइप 2 मधुमेह के बारे में जागरूकता का अभाव है। इसके अलावा सरकार द्वारा मोटापे को बीमारी मानने से इंकार किया जाना और मुख्य बीमा कंपनियों द्वारा मोटापे के उपचार पर बीमा लाभ नहीं दिया जाना भी मोटापे की समस्या के समाधान के मार्ग में प्रमुख बाधा है।"

प्रसाद ने कहा, "वक्त का तकाजा है कि सभी हितधारक एक साझे मंच पर आएं और मोटापे की इस बीमारी को परिभाषित करें। साथ ही इस बीमारी के बोझ का आकलन कर इसके उपचार की एक नीति सुझाएं औरदिशानिर्देश तय करें ताकि बीमा कंपनियां एवं सरकार दोनों ही मोटापे के उपचार को मेडिकल बीमा के दायरे में लाएं।"

मोटापे ने स्मोकिंग को छोड़ा पीछे
एक शोध के आधार पर शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि एक ओर जहां धूम्रपान के स्तर में गिरावट आई है, वहीं मोटापे के स्तर में जबरदस्त वृद्धि हुई है। स्मोकिंग में आई कमी की वजह को कैंसर बताया जा रहा है। कैंसर से बचने के लिए लोग स्मोकिंग को छोड़ रहे हैं, लेकिन वहीं मोटापे के भी शिकार हो रहे हैं, जो कैंसर से भी खतरनाक है। यूके के कैंसर अनुसंधान में हुए अध्ययन में मोटापे की बढ़ती दर के पीछे जो वजहें बताई हैं, उनमें धूम्रपान, अधिक वजन, सूर्य की तरफ से आने वाली पराबैंगनी विकिरणें , शराब का सेवन, खाने में फाइबर की बहुत कम मात्रा और बाहरी वायु प्रदूषण प्रमुख हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह कैंसर के लि धूम्रपान को वजह माना जाता है...आने वाले समय में कैंसर की मुख्य वजह मोटापा होगा।

Story Loader